Acharya KAMAL Kishore Shukla

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25/02/2022

Must watch..it's a big relief in coming time for Scorpio sign..⚘🙏

🕉 नमः शिवाय 🙏🌷
08/02/2021

🕉 नमः शिवाय 🙏🌷

🕉 नमः शिवाय।

रुद्राष्टाध्यायी को यजुर्वेद का अंग माना जाता है। वैसे तो भगवान शिव अर्थात रुद्र की महिमा का गान करने वाले इस ग्रंथ में दस अध्याय हैं जो कि संस्कृत भाषा मे है, इसमे भगवान शिव के स्वरूप का अत्यंत सुंदर एवं स्पष्ट वर्णन मिलता है। इस स्तुति को करने वाले व्यक्ति को असीम शांति का अनुभव होता है और कष्टों से मुक्ति मिलती है।

भगवान शिव शंकर की स्तुति इस प्रकार है।

ॐ नमः भगवते रुद्राय | ॐ अथात्मानग्ं शिवात्मानग् श्री रुद्ररूपं ध्यायेत् ॥

शुद्धस्फटिक संकाशं त्रिनेत्रं पंच वक्त्रकम् । गंगाधरं दशभुजं सर्वाभरण भूषितम् ॥

नीलग्रीवं शशांकांकं नाग यज्ञोप वीतिनम् । व्याघ्र चर्मोत्तरीयं च वरेण्यमभय प्रदम् ॥

कमंडल्-वक्ष सूत्राणां धारिणं शूलपाणिनम् । ज्वलंतं पिंगलजटा शिखा मुद्द्योत धारिणम् ॥

वृष स्कंध समारूढम् उमा देहार्थ धारिणम् । अमृतेनाप्लुतं शांतं दिव्यभोग समन्वितम् ॥

दिग्देवता समायुक्तं सुरासुर नमस्कृतम् । नित्यं च शाश्वतं शुद्धं ध्रुव-मक्षर-मव्ययम् ।

सर्व व्यापिन-मीशानं रुद्रं वै विश्वरूपिणम् । एवं ध्यात्वा द्विजः सम्यक् ततो यजनमारभेत् ॥

अर्थात : तीन नेत्रों वाले , पांच मुख वाले,त्रिशूल धारण करने वाले ,गंगा को धारण करने वाले,दस भुजाओं वाले,नीले गले वाले, चंद्रमा को माथे पर धारण करने वाले, व्याघ्र चर्म पर बैठने वाले ,वृषभ के कंधे पर सवारी करने वाले, नागों का यज्ञोपवीत धारण करने वाले , कमंडल और जनेऊ धारण करने वाले, भूरी जटाओं वाले भगवान शिव की स्तुति करता हूं।

The yajurveda is one of the oldest Veda among four vedad of Sanatana Dharma. Which is in Sanskrit language, it gives a very clear description of Lord Shiva's form. The person performing this praise experiences boundless peace and is free from sorrow.

Meaning of the prayer : three-eyed, five-faced, holding trident, holding the Ganges, ten-armed, blue-throated, holding the moon on the forehead, sitting on dark skin, riding on the shoulder of Ta**us , Who holds the serpent's yagyopaveet, who holds the kamandal and janeu, praises Lord Shiva with brown hair.

धन्यवाद/ thanks 🙏

भगवान शिव शंकर हम सब का कल्याण करे।
May Lord Shiva Shankar bless all of us.🌷🙏

🌻हर्ष का अवसर है।🌻आज मेरी अर्धांगिनी श्रीमती कोमल देवी शुक्ला का जन्मदिन है। माता भगवती से प्रार्थना है कि वह उन्हें सदा...
22/07/2020

🌻हर्ष का अवसर है।🌻आज मेरी अर्धांगिनी श्रीमती कोमल देवी शुक्ला का जन्मदिन है। माता भगवती से प्रार्थना है कि वह उन्हें सदा स्वस्थ,सुखी व दीर्घायु प्रदान कर सौभाग्यवती बनाये रखें। 🙏😊

इस अवसर पर मैं माँ जगदम्बे के चरणों में शत् शत् नमन और प्रार्थना करता हूँ। कि वह सदा उन्हें अपना आशीर्वाद देती रहें और हमारा पथ प्रदर्शन करती रहें। ताकि हम समाज कल्याण के कार्यो में तत्पर रहें। 🙏

🌺 देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्‌। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि॥
🌼 शरणागत-दीनार्त-परित्राण-परायणे! सर्वस्यार्तिंहरे देवि!नारायणि! नमोऽस्तुते।।
🌻 सर्व मंगलं मांगल्ये शिवे सर्वाथ साधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते॥
🌸 सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः। मनुष्यों मत्प्रसादेन भवष्यति न संशय॥
🏵 सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्दैरिविनाशनम्।।

🍀🙏हर हर महादेव🙏🍀

🌺सभी को आशीर्वाद के साथ धन्यवाद🙌 🌺

किसी भी पूजन-पाठ की पूर्ति करने के लिए हवन या होम किया जाना आवश्यक है यदि उचित मात्रा में शास्त्रोक्त हवन सामग्री यज्ञ (...
21/07/2020

किसी भी पूजन-पाठ की पूर्ति करने के लिए हवन या होम किया जाना आवश्यक है यदि उचित मात्रा में शास्त्रोक्त हवन सामग्री यज्ञ (हवन-होम) की अग्नि में मंत्रों के साथ अर्पित की जाए तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरी पृथ्वी पर पड़ता है।

हवन की अग्नि में जो भी आहुतियां डाली जाती है वह वातावरण में अवशोषित हो कर सूक्ष्म अंश मे परिवर्तित होकर वायु में घुल जाती है। प्रभु प्रदत्त जो भी जीवन साधन हमारे पास है हमें वह सूक्ष्म, जड़ व चेतन सभी के साथ यथा सम्भव बांटना चाहिए। जब हम हवन/यज्ञ करते हैं तो जो हवन सामग्री अग्नि को प्राप्त होती है वह समस्त वायुमंडल में पहुँच कर सभी मनुष्य, जीव - जंतु व अदृश्य को भी प्राप्त होती है जिससे सबका कल्याण होता है।

हर मनुष्य का ये कर्तव्य है कि हम से जो बन पड़े हमें संसार के कल्याण हेतु समर्पित करना चाहिए। समस्त सुख साधन स्वयं के लिए संचय करना और जन कल्याण की न सोचना यह नितांत स्वार्थी बनाता है। यज्ञ से आपका और हित और परोपकार दोनों ही होता रहता है। यही सनातन धर्म की परम्परा है। हम दोनों पति पत्नी इस कार्य के लिए सदैव समर्पित रहते हैं। श्रीमती कोमल देवी शुक्ला विभिन्न प्रकार की हवन सामग्री बनाने में सिद्ध हस्त है। जिसकी दिव्य सुगन्ध से हमारा घर , प्रांगण व आस पड़ोस महकता रहता है।

हवन के नियम अनुसार 4 ऐसे तत्व/पदार्थ हैं जिनके उपयोग से मनवांछित फल प्राप्त होता है। हवन सामग्री में ये पवित्र पदार्थ समावेशित किए जाते हैं। - सुगंधित, पुष्टिकारक, मिष्ठान्न तथा रोगनाशक। आइए जानते हैं विस्तार से-

'सुगंधित' पदार्थों में केशर, अगर, तगर, चंदन, इलायची, जायफल, जावित्री, छड़ीला, कपूर, कचरी, बालछड़, पानड़ी आदि का उपयोग करना उचित है।

'पुष्टिकारक' तत्व में घृत, गुग्गुल, सूखे फल, जौ, तिल, चावल, शहद व नारियल आदि-आदि का उपयोग करना उचित है।
'मिष्ठान्न' पदार्थ के लिए गुड़, छुहारा, दाख आदि का उपयोग करना उचित है।

'रोगनाशक' तत्वों के लिए गिलोय, जायफल, सोमवल्ली, ब्राह्मी, तुलसी, अगर, तगर, तिल, इन्द्र जव, आमला, मालकांगनी, हरताल, तेजपत्र, प्रियंगु, केसर, सफेद चंदन, जटामांसी आदि का उपयोग करना उचित है।

समय समय पर आपके लिए अन्य जानकारी देते रहेंगे। आप हमें सम्पर्क भी कर सकते है। +91 79057 33766

प्रभु सबका कल्याण करें 🙏🌺

आचार्य पंडित कमल किशोर शुक्ला 🙌
श्रीमती कोमल देवी शुक्ला 🙌

🌸🙏जय माँ सरस्वती🙏🌸माता सरस्वती की उपासना- मंत्र जाप एवं यज्ञ प्रत्येक उम्र के मनुष्यों के लिए लाभकारी और कल्याणकारी है ।...
17/07/2020

🌸🙏जय माँ सरस्वती🙏🌸

माता सरस्वती की उपासना- मंत्र जाप एवं यज्ञ प्रत्येक उम्र के मनुष्यों के लिए लाभकारी और कल्याणकारी है ।

बुद्धि, ज्ञान, विद्या की देवी; वह सभी कलाकारों, छात्रों, लेखकों और बुद्धिजीवियों द्वारा अध्ययन और ललित कला में उन्नत स्मृति और प्रगति के लिए पूजा जाता है। मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए सरस्वती यज्ञ किया जाता है।

सरस्वती देवी का आशीर्वाद ज्ञान (ज्ञान), बुद्धी (सोचने की क्षमता) देता है, मुख्य रूप से अध्ययनरत बच्चों में स्मृति स्मरण में सुधार करता है। इस पूजा को करना हर बच्चे के लिए जीवन में एक बेहतर करियर बनाने के लिए बहुत आवश्यक है। साथ ही, यह सभी वैदिक ज्ञान को प्राप्त करने में मदद करता है।

भगवान ब्रह्मा की पत्नी, देवी सरस्वती, ज्ञान के सभी रूपों की प्रतिनिधि देवी हैं - अर्थात, सीखना, गायन आदि। वह देवता हैं, जो हमें अभिनय, नृत्य, अनुसंधान, संगीत, शिक्षा, गायन, चित्रकला में सफलता प्रदान करती हैं। मूर्तिकला आदि वह भाषण और बोली की आराध्य देवी भी हैं और वाग्देवी या मा वाणी है । हिंदू रीति-रिवाजों में, कुछ भी शुरू करने से पहले एक के गुरु, सरस्वती और गणेश का स्वागत करते हैं। इन तीन श्रुतियों को वंदना त्रयी कहा जाता है।

जो व्यक्ति यह कहते हैं कि हमें याद नहीं रहता, भूलने की बीमारी प्रतीत होती है। छात्रों शिक्षा में बार बार समस्याएं आती है उनके लिए जप व दशांश यज्ञ विशेष लाभकारी है। जीभ के दोषों जैसे हकलाना हकलाना आदि से पीड़ित लोगों के लिए बेहतर परिणाम चाहते है उनको भी महासरस्वती यज्ञ का सुझाव दिया जाता है।

सरस्वती यज्ञ बच्चों को नई कक्षा में प्रवेश के समय तथा परीक्षाओं से पहले और उनके महत्वपूर्ण प्रदर्शन से पहले अवश्य करना या गुरु/ ब्राह्मण द्वारा करवाना चाहिए जाता है। इससे देवी सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है है और सफलता का मार्ग प्रशस्त होने लगता है।

➡️ 🌺🙌 यहाँ लखनऊ में ही नहीं बल्कि भारत के अन्य राज्यों में रहने वाले यहाँ तक की विदेशों मे रह रहे अभिभावकों ने मां सरस्वती यज्ञ / पूजा के अनुष्ठान मेरे द्वारा सम्पन्न कराये है और उन्हे माँ सरस्वती के आशीर्वाद से बहोत अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। बच्चों के परीक्षाओं मे अच्छा प्रदर्शन किया है। कई दूरदर्शन के कलाकारों ने भी काफी अच्छी सफलता सरस्वती यज्ञ के माध्यम से पायी है। कुछ ही समय में अपने करियर की ऊंचाई तक पहुंच गये।🌺 🙌

🙏सरस्वती मंत्र :🙏
या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्र वृस्तावता।
या वीणा वर दण्ड मंडित करा या श्वेत पद्मसना।।
या ब्रह्माच्युत्त शंकर: प्रभृतिर्भि देवै सदा वन्दिता।
सा माम पातु सरस्वती भगवती नि:शेष जाड्या पहा।।1।।
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ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।
वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।
रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।
सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।
वन्दे भक्तया वन्दिता च मुनीन्द्रमनुमानवै:।

जो लोग सरस्वती के कठिन मंत्र का जप नहीं कर सक‍ते उनके लिए प्रस्तुत है मां सरस्वती का सरल अष्टाक्षर मंत्र। इस मंत्र का पाठ नित्य करने से विद्या और बुद्धि में वृद्धि होती है। यह मंत्र देवी सरस्वती का मूल मंत्र है : -

🌸शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रिया तू।'

🌸श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।

🌸ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।

सरस्वती यज्ञ के लाभ: 🔥

नाम, प्रसिद्धि, सफलता के लिए। कामनाओं की पूर्ति के लिए। शैक्षिक क्षेत्र और अन्य शिक्षण में वांछित सफलता प्रदान करने के लिए। पारिवारिक सुख में सुधार के लिए।

अभिमंत्रित सरस्वती यंत्र का पूजन करने से एवं पढने के स्थान में आदर पूर्वक स्थापित करने से भी अत्यंत लाभ प्राप्त किये जा सकते हैं।

शिक्षा में ज्ञान और सफलता में सुधार करने में सहायता के लिए।
दिमाग तेज करने और बेहतर याददाश्त पाने के लिए।
हकलाने को नियंत्रित करने के लिए, एक अलग स्टुटर्स के मामले में।
शांतिपूर्ण और शक्तिशाली दिमाग की प्राप्ति के लिए
छात्रों के सीखने में तेजी लाने के लिए
उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए।
परीक्षा में अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए।
किसी भी कला में निपुणता हासिल करने की प्रेरणा पाने के लिए।

अधिक जानकारी व यज्ञ आयोजन के लिए आपका स्वागत है।
+91 79057 33766

🌺देवी उपासक एवं पथ प्रदर्शक 🌺
🌸 आचार्य पंडित कमल किशोर शुक्ला🌸
🌸श्रीमती कोमल देवी शुक्ला 🌸

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🌼बगलामुखी मुखी माता के चरणों में शत् शत् नमन।🌼बृहस्पतिवार को माता बगलामुखी का जाप, अनुष्ठान व यज्ञ का विशेष महत्व है। श्...
16/07/2020

🌼बगलामुखी मुखी माता के चरणों में शत् शत् नमन।🌼

बृहस्पतिवार को माता बगलामुखी का जाप, अनुष्ठान व यज्ञ का विशेष महत्व है।

श्री बगलामुखी मंत्र :-

।। ॐ हल्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिहवां कीलय बुद्धिं विनाशय हल्रीं ॐ स्वाहा ।।

दस महाविद्याओं में एक महाविद्या माता बगुला मुखी है। वेदों में इनका नाम बल्गामुखी है। इनकी आराधना मात्र से साधक के सारे संकट दूर हो जाते हैं, शत्रु परास्त होते हैं और श्री/धन वृद्धि होती है। बगलामुखी का जप साधारण व्यक्ति भी कर सकता है, लेकिन इनकी तंत्र उपासना किसी योग्य व्यक्ति के सान्निध्य में ही करनी चाहिए। देवी के अर्गला स्तोत्र का पाठ करने मात्र से इनकी आराधना हो जाती है। साधक को पीले वस्त्र (बिना सिले) पहनकर पीले आसन पर बैठकर सरसों के तेल का दीपक जलाकर पीली सरसों से यज्ञ करना चाहिए। इससे उसके सारे मनोरथ पूर्ण होंगे और शत्रु परास्त होंगे। यह महारुद्र की शक्ति हैं।

इस शक्ति की आराधना करने से साधक के शत्रुओं का शमन तथा कष्टों का निवारण होता है। यों तो बगलामुखी देवी की उपासना सभी कार्यों में सफलता प्रदान करती है, परंतु विशेष रूप से युद्ध, विवाद, शास्त्रार्थ, मुकदमे, और प्रतियोगिता में विजय प्राप्त करने, अधिकारी या मालिक को अनुकूल करने, अपने ऊपर हो रहे अकारण अत्याचार से बचने और किसी को सबक सिखाने के लिए बगलामुखी देवी का वैदिक अनुष्ठान सर्वश्रेष्ठ, प्रभावी एवं उपयुक्त होता है। असाध्य रोगों से छुटकारा पाने, बंधनमुक्त होने, संकट से उद्धार पाने और नवग्रहों के दोष से मुक्ति के लिए भी इस मंत्र की साधना की जा सकती है। आपको अपने जीवन में पडने वाले सकारात्मक प्रभाव को आप स्वयं ही महसूस करने लगेंगे। साथ ही आपके जीवन की प्रगति का मार्ग प्रशस्त होने लगेगा।

माँ बगलामुखी की साधना करने वाला साधक सर्वशक्ति सम्पन्न हो जाता है. यह मंत्र विधा अपना कार्य करने में सक्षम हैं. मंत्र का सही विधि द्वारा जाप किया जाए तो निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होती है. बगलामुखी मंत्र के जाप से पूर्व बगलामुखी कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए।

देवी बगलामुखी पूजा अर्चना अत्यंत सावधानी पूर्वक सही विधि से की जानी चाहिए क्योंकि ये एक उग्र देवी है और शीघ्र फल प्रदायी है। इनकी साधना किसी योग्य गुरु के सानिंध्य में ही की जाती है।

हवन, पूजन एवं जाप से सम्बन्धित जानकारी के लिए आप संपर्क कर सकते हैं। +91 79057 33766

भगवती आप सबका कल्याण करें 🙏

🙏देवी साधक एवं नित्य सेवक🙏
🌸 आचार्य पंडित कमल किशोर शुक्ला 🌸
🌸 श्रीमती कोमल देवी शुक्ला 🌸

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🍀हरा रंग बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है।🍀 इस युवा ग्रह को बलवान बनाने तथा बुध ग्रह से जुड़े यदि बुरे परिणाम जीवन में म...
15/07/2020

🍀हरा रंग बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है।🍀

इस युवा ग्रह को बलवान बनाने तथा बुध ग्रह से जुड़े यदि बुरे परिणाम जीवन में मिल रहे हैं तो दूर करना अत्यंत आवश्यक है। हम कुछ विशेष परिस्थितियों में आसानी से जान सकते हैं कि बुध ग्रह हमारे लिए किस प्रकार का अच्छा या बुरा परिणाम दे रहे हैं।

🍀जैसे बच्चों का पढ़ाई में मन न लगना या न लगना ।
🍀बार-बार व्यापार बदलने पर भी लाभ न मिलना।
🍀घर मे बहन व बेटियों का खुशहाल रहना या लगातार परेशान रहना।
🍀सन्तान प्राप्ति मे समस्या या सम्बन्धित कमजोरी।
🍀बच्चो का आज्ञाकारी होना या माता पिता की बात न मानना, गलत संगत करना।

आदि यदि शुभ लक्षण दिखाई दे तो बुध अच्छा अन्यथा यह खराब दशा को दर्शाते है।

➡️आइए जानें उन्हें कैसे शुभ बनाया जाए...

एकाक्षरी बीज मंत्र- 'ॐ बुं बुधाय नम:।'
बीज मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।'
जप संख्या- 9,000 (9 हजार)।

(कलियुग में 4 गुना जाप एवं दशांश हवन का विधान है।)

दान सामग्री- हरा वस्त्र, मूंग, हरे फल, स्वर्ण, कांस्य पात्र, गजदंत, घी।

(उक्त सामग्री को हरे वस्त्र में बांधकर उसकी पोटली बनाएं तत्पश्चात उसे मंदिर में अर्पण करें अथवा बहते जल में प्रवाहित करें।)

दान का समय- सूर्योदय से 5 घटी छोड़ शेष पूरा दिन।

हवन हेतु समिधा- अपामार्ग। ( चिरचिटा)। ( प्रदूषण रहित )

औषधि स्नान- अक्षत, गोरोचन, विधारा की जड़, शहद, जायफल मिश्रित जल से।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें : +91 79057 33766

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् ॥
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः

जनहित में प्रयासरत , सनातन धर्म के लिए समर्पित 🌷
आचार्य पंडित कमल किशोर शुक्ला 🙏
श्रीमती कोमल देवी शुक्ला🙏
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जन सामान्य इस कोरोना काल में स्वयं को और सम्पूर्ण वातावरण को शुद्ध बनाने के लिए और अद्भुत दैवीय शक्तियों की निरंतर प्राप...
14/07/2020

जन सामान्य इस कोरोना काल में स्वयं को और सम्पूर्ण वातावरण को शुद्ध बनाने के लिए और अद्भुत दैवीय शक्तियों की निरंतर प्राप्ति के लिए नित्य हवन बड़ी ही सरलता से कर सकते हैं। यह हम सब के लिए अत्यंत आवश्यक है।

यहाँ आपके कल्याण हेतु निम्नलिखित आहुतियां आप अपने नित्य हवन में शामिल कर सकते हैं।

🌺प्रातःकालीन आहुतियाँ
निम्न मंत्रों से घी एवं सामग्री से आहुँतियाँ देनी है ।
ओ३म् सूर्यो ज्योतिज्र्योतिः सूर्यः स्वाहा।
ओ३म् सूर्यो वर्चो ज्योतिवर्चः स्वाहा।
ओ३म् ज्योतिः सूर्यः सूर्यो ज्योतिः स्वाहा।
ओ३म् सजूर्देवेन सवित्रा सजूरुषसेन्द्रवत्या जुषाणः सूर्यो वेतु स्वाहा ।।

🌺सांयकालीन आहुतियाँ
ओ३म् अग्निज्र्योति ज्र्योतिरग्निः स्वाहा।
ओ३म् अग्निर्वर्चो
अग्निर्वर्चो ज्योतिर्वर्चः स्वाहा।
ओ३म् अग्निज्र्योतिः ज्र्योतिरग्निः स्वाहा।
(यह आहुति मौन हाकर देनी है)
ओ३म् सजूर्देवेन सवित्रा सर्जूरात्रयेन्द्रवत्या। जुषाणो अग्निर्वेतु स्वाहा।।

🌺प्रातः तथा सायंकाल की आहुतियाँ
ओं भूरग्नये प्राणाय स्वाहा। इदमग्नये प्राणाय इदं न मम ।
ओं भुवर्वायवेऽपानाय स्वाहा । इदं वायवेऽपानाय इदन्न मम ।
ओं स्वरादित्याय व्यानाय स्वाहा। इदमादित्याय व्यानाय इदन्न मम ।
ओं भूर्भुवः स्वरग्निवाय्वादितेभ्यः प्राणापानव्यानेभ्यः स्वाहा ।
इदमग्न्विाय्वादितेभ्यः प्राणापाणव्यानेभ्यः इदन्न मम ।
ओं आपो ज्योति रसोऽमृतं ब्रह्म भूर्भुवः स्वरों स्वाहा ।।
ओं यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते तया मामद्य मेध्याग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ।।
ओं विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव। यद् भद्रं तन्नासुव स्वाहा।।
ओं अग्ने नय सुपथा राये अस्मान् विश्वानि देव वयुनानि विद्वान्
युयोध्यस्मज्जुहुराणमेनो भूयिष्ठान्ते नम उक्तिं विधेम स्वाहा ।।

यज्ञ , हवन सम्बन्धित विस्तृत जानकारी के लिए आप सम्पर्क कर सकते हैं।

प्रभु आप सबका कल्याण करें। 🙏🌷🙏

🌸आचार्य पंडित कमल किशोर शुक्ला 🌸

गायत्री मंत्र और गायत्री यज्ञ। ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।उस प्राणस्वरूप...
12/07/2020

गायत्री मंत्र और गायत्री यज्ञ।

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें।

गायत्री यज्ञ के माध्यम से दरिद्रता का शमन:

व्यापार, नौकरी में हानि हो रही है या कार्य में सफलता नहीं मिलती, आमदनी कम है तथा व्यय अधिक है तो गायत्री मंत्र का जप काफी फायदा पहुंचाता है। शुक्रवार को पीले वस्त्र पहनकर हाथी पर विराजमान गायत्री माता का ध्यान कर गायत्री मंत्र के आगे और पीछे 'श्रीं' सम्पुट लगाकर जप करने से दरिद्रता का नाश होता है। इसके साथ ही रविवार को व्रत किया जाए तो अधिक लाभ होता है।

आचार्य पंडित कमल किशोर शुक्ला 🌺🙏🌺

यज्ञं जनयन्त सूरयः। -ऋग्वेद 10/66/2हे विद्वानों! संसार में यज्ञ का प्रचार करो।अयं यज्ञो विश्वस्य भुवनस्य नाभिः। -अथर्ववे...
12/07/2020

यज्ञं जनयन्त सूरयः। -ऋग्वेद 10/66/2
हे विद्वानों! संसार में यज्ञ का प्रचार करो।

अयं यज्ञो विश्वस्य भुवनस्य नाभिः। -अथर्ववेद 9.15.14
यह यज्ञ ही समस्त विश्व-ब्रह्मांड का मूल केंद्र है।

ऋषियों द्वारा ईश्वरीय चिंतन में निरत जीवन पद्धति खोजी गई जिसमें यज्ञ से मानव मन में स्थापित वांछित लाभ पाया जा सकता है। इस विधि व्यवस्था को त्रिकाल संध्या के रूप में ऋषियों ने भी अपनाया और यज्ञ के अध्यात्म को अवतारी सत्ताओं ने भी स्वीकारा।

आचार्य पंडित कमल किशोर शुक्ला 🙏🌺🙏

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