21/07/2020
किसी भी पूजन-पाठ की पूर्ति करने के लिए हवन या होम किया जाना आवश्यक है यदि उचित मात्रा में शास्त्रोक्त हवन सामग्री यज्ञ (हवन-होम) की अग्नि में मंत्रों के साथ अर्पित की जाए तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरी पृथ्वी पर पड़ता है।
हवन की अग्नि में जो भी आहुतियां डाली जाती है वह वातावरण में अवशोषित हो कर सूक्ष्म अंश मे परिवर्तित होकर वायु में घुल जाती है। प्रभु प्रदत्त जो भी जीवन साधन हमारे पास है हमें वह सूक्ष्म, जड़ व चेतन सभी के साथ यथा सम्भव बांटना चाहिए। जब हम हवन/यज्ञ करते हैं तो जो हवन सामग्री अग्नि को प्राप्त होती है वह समस्त वायुमंडल में पहुँच कर सभी मनुष्य, जीव - जंतु व अदृश्य को भी प्राप्त होती है जिससे सबका कल्याण होता है।
हर मनुष्य का ये कर्तव्य है कि हम से जो बन पड़े हमें संसार के कल्याण हेतु समर्पित करना चाहिए। समस्त सुख साधन स्वयं के लिए संचय करना और जन कल्याण की न सोचना यह नितांत स्वार्थी बनाता है। यज्ञ से आपका और हित और परोपकार दोनों ही होता रहता है। यही सनातन धर्म की परम्परा है। हम दोनों पति पत्नी इस कार्य के लिए सदैव समर्पित रहते हैं। श्रीमती कोमल देवी शुक्ला विभिन्न प्रकार की हवन सामग्री बनाने में सिद्ध हस्त है। जिसकी दिव्य सुगन्ध से हमारा घर , प्रांगण व आस पड़ोस महकता रहता है।
हवन के नियम अनुसार 4 ऐसे तत्व/पदार्थ हैं जिनके उपयोग से मनवांछित फल प्राप्त होता है। हवन सामग्री में ये पवित्र पदार्थ समावेशित किए जाते हैं। - सुगंधित, पुष्टिकारक, मिष्ठान्न तथा रोगनाशक। आइए जानते हैं विस्तार से-
'सुगंधित' पदार्थों में केशर, अगर, तगर, चंदन, इलायची, जायफल, जावित्री, छड़ीला, कपूर, कचरी, बालछड़, पानड़ी आदि का उपयोग करना उचित है।
'पुष्टिकारक' तत्व में घृत, गुग्गुल, सूखे फल, जौ, तिल, चावल, शहद व नारियल आदि-आदि का उपयोग करना उचित है।
'मिष्ठान्न' पदार्थ के लिए गुड़, छुहारा, दाख आदि का उपयोग करना उचित है।
'रोगनाशक' तत्वों के लिए गिलोय, जायफल, सोमवल्ली, ब्राह्मी, तुलसी, अगर, तगर, तिल, इन्द्र जव, आमला, मालकांगनी, हरताल, तेजपत्र, प्रियंगु, केसर, सफेद चंदन, जटामांसी आदि का उपयोग करना उचित है।
समय समय पर आपके लिए अन्य जानकारी देते रहेंगे। आप हमें सम्पर्क भी कर सकते है। +91 79057 33766
प्रभु सबका कल्याण करें 🙏🌺
आचार्य पंडित कमल किशोर शुक्ला 🙌
श्रीमती कोमल देवी शुक्ला 🙌