Healing with Geeta

Healing with Geeta YouTube में 'Healing with Geeta' चैनल पर गीता के मायने, श्रीरामचरितमानस के महत्व और कहानी सुनिए...

वन्दना के क्रम में गुरु महाराज के बाद ब्राह्मणों और सन्तों की वन्दना गोस्वामी तुलसीदास ने की है। वह लिखते हैं-बन्दउँ प्र...
14/12/2025

वन्दना के क्रम में गुरु महाराज के बाद ब्राह्मणों और सन्तों की वन्दना गोस्वामी तुलसीदास ने की है। वह लिखते हैं-

बन्दउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।
सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।
पहले पृथ्वी के देवता (ब्राह्मण) की वन्दना करता हूँ जो मोह से उपजे सभी संशय को हरने वाले हैं। उसके बाद सुजन (सन्त) समाज को प्रेम सहित सुन्दर वाणी से प्रणाम करता हूँ जो सभी गुणों की खान हैं।

साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू।
जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बन्दनीय जेहिं जग जस पावा।।
साधु का चरित्र कपास के चरित्र के समान शुभ है जिसका फल नीरस, विशद (स्वच्छ/उज्ज्वल) और गुणमय है। जो दुःखों को सहकर दूसरों के छिद्रों (दोषों) को ढकता है जिसके कारण उसने जगत में वन्दनीय यश पाया।

मुद मङ्गलमय सन्त समाजू। जो जग जङ्गम तीरथराजू।।
राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा।।
सन्तों का समाज आनन्द और कल्याणमय है, जो जगत में जङ्गम (चलता-फिरता) तीर्थराज हैं। ऐसे चलते-फिरते तीर्थराज में रामभक्ति ही गङ्गा की धारा है और उनका ब्रह्म का प्रचार करना ही सरस्वती हैं जो अदृश्य है।

बिधि निषेधमय कलिमल हरनी। करम कथा रबिनन्दनि बरनी।
हरि हर कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल मुद मङ्गल देनी।।
साधु द्वारा बताए गए विधि और निषेध (क्या करना है, क्या नहीं) रूपी कर्मों की कथा कलियुग के पापों को हरने वाली रविनन्दिनी (यमुनाजी) हैं। इनके साथ भगवान विष्णु और भगवान शिव की कथाएँ त्रिवेणी बनकर सुशोभित हैं। साधुओं से जब ये कथाएँ सुनते हैं तो सब आनन्द और कल्याणों को देने वाली हैं।

बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा।।
सबहि सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत सादर समन कलेसा।।
उन सन्तों का धर्म में अटल विश्वास ही अक्षयवट है और शुभकर्म ही तीर्थराज का समाज है। सन्तजन सब देश, सब समय सहज ही सुलभ हैं और उनकी सेवा-सत्कार करने से सभी क्लेशों का शमन हो जाता है।

अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देह सद्य फल प्रगट प्रभाऊ।।
वह तीर्थराज (सन्तजन) अकथनीय और अलौकिक है। तत्काल प्रकट प्रभाव में फल देने वाला है।

सुनि समुझहिं जन मुदित मन, मज्जहिं अति अनुराग।
लहहिं चारि फल अछत तनु, साधु समाज प्रयाग।।
जो जन सन्तसमाजरूपी तीर्थराज प्रयाग के बारे में प्रसन्न मन से सुनते, समझते और इसमें अनुराग के साथ गोते लगाते हैं उनको शरीर के रहते ही चारों फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) मिल जाते हैं।

क्रमश...
#राम #राम #सीताराम

फोटो- ChatGPT

...मङ्गलाचरण से आगेगोस्वामी तुलसीदास मङ्गलाचरण के बाद गुरु महाराज की वन्दना करते हैं। उन्होंने गुरु महाराज को सीधे स्मरण...
13/12/2025

...मङ्गलाचरण से आगे
गोस्वामी तुलसीदास मङ्गलाचरण के बाद गुरु महाराज की वन्दना करते हैं। उन्होंने गुरु महाराज को सीधे स्मरण नहीं किया। वह पहले पाँव की, चरणों की धूल की, फिर पदनख यानी चरण के नाखूनों की वन्दना करते हैं। आइए आनन्द लीजिए...

बन्दउँ गुरु पद कञ्ज, कृपा सिन्धु नररूप हरि।
महामोह तम पुञ्ज, जासु बचन रबि कर निकर।।
तुलसी बाबा कहते हैं- मैं उन गुरु के चरणकमलों की वन्दना करता हूँ जो कृपा के समुद्र और नररूप में आए हुए भगवान विष्णु हैं। वह यदि कुछ बोल देते हैं तो उसे सुनकर महामोह रूपी अँधियारा मिट जाता है जैसे सूर्य के उदय होने पर अँधियारे का नाश हो जाता है।

बन्दउँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा।।
अमिय मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू।।
मैं गुरु महाराज के चरणों की धूल की वन्दना करता हूँ, जो कि रुचिपूर्ण, महकती है और अनुरागरूपी रस से भरी हुई है। उनके चरणों की धूल अमरमूल (जो अमर करती है) का चूर्ण है, जो सभी भवरोगों का परिवार सहित शमन कर देती है। यहाँ गोस्वामी तुलसीदास ने भवरोगों का नाश नहीं लिखा, उन्होंने लिखा- भवरोगों का शमन। मतलब यह कि भवरोग मनुष्यों को जलाते हैं। जो चीज जलती है, उसका ही तो शमन किया जाता है। भवरोग हैं- काम, क्रोध, मद, लोभ। ये चारों ही हमारे चित्त को जलाते हैं।

सुकृति सम्भु तन बिमल बिभूती। मञ्जुल मङ्गल मोद प्रसूती।।
जन मन मञ्जु मुकुर मल हरनी। किएँ तिलक गुन गन बस करनी।।
वही धूल शम्भु (भगवान शिव) के तन की स्वच्छ भभूत है और सुन्दर मङ्गल और प्रसन्नता की जननी है। वही धूल जन (गुरु के जन, भगवान के जन यानी भक्त) के मन के मैल को दूर करती है और यदि उसी धूल का तिलक कर लिया जाए तो सभी गुण वश में हो जाते हैं।

अब चरण-नखों की वन्दना...
श्री गुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिब्य दृष्टि हियँ होती।।
दलन मोह तम सो सप्रकासू। बड़े भाग उर आवइ जासू।।
श्री गुरु महाराज के चरण-नखों की ज्योति मणियों की ज्योति के समान है। उसे स्मरण करते ही हृदय में दिव्य दृष्टि का उदय होता है। वह ज्योति, वह प्रकाश मोह रूपी अन्धकार का दलन (नाश) कर देता है। बड़े भाग्य से ही वह प्रकाश हृदय में आता है।

उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।
सूझहिं राम चरित मनि मानिक। गुपुत प्रगट जहँ जो जेहि खानिक।।
गुरु के चरण-नखों की ज्योति के आते ही हृदय नेत्र खुल जाते हैं। हृदय में भी नेत्र होते हैं क्या? यहां हृदय नेत्र का अर्थ अन्तर्मन से है। आगे है मिटहिं दोष दुख भव रजनी के... गुरु के चरण-नखों की ज्योति का स्मरण होते ही संसार रूपी रात के दोष और दुःख मिट जाते हैं। उन्हीं चरण-नखों के प्रताप से श्रीरामचरित्र रूपी मणि-माणिक्य सूझने लगते हैं। वे जहां, जिस भी खान में हैं, सब प्रगट हो जाते हैं।
इससे स्पष्ट होता है कि श्रीरामचरित्र, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य सबकुछ हमारे भीतर है। बस हम संसार के पचड़ों में पड़े रहते हैं। गुरु महाराज की कृपा नहीं पाते जिससे ये सारे मणि-माणिक्य गुप्त रूप में ही रहे आते हैं।

जथा सुअञ्जन अञ्जि दृग, साधक सिद्ध सुजान।
कौतुक देखत सैल बन भूतल भूरि निधान।।
गुरु पद रज मृदु मञ्जुल अञ्जन।
नयन अमिय दृग दोष बिभञ्जन।।
तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन।
बरनउँ राम चरित भव मोचन।।
जिस तरह से सिद्धजन सुअञ्जन (सिद्ध अञ्जन यानी सिद्ध काजल) आँखों में लगाकर पहाड़, वन और पृथ्वी के अन्दर की खानों को कौतुक से देखते हैं, ठीक उसी तरह से गुरु महाराज के चरणों की धूल भी कोमल और सुन्दर अमृत है जो नेत्रों (विवेक) के दोषों का नाश करने वाला है। उसी अञ्जन से अपने विवेकरूपी नेत्रों को निर्मल करके मैं भवबन्धन से छुड़ाने वाले श्रीराम चरित्र का वर्णन करता हूँ।

#रामजी की कृपा से कल इसके आगे का गुणगान करेंगे। क्रमशः...
#राम #राम #सीताराम
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गोस्वामी तुलसीदास महाराज महत्वपूर्ण महाग्रन्थ का शुभारम्भ 'वर्णानामर्थ' शब्द से करते हैं। इसमें अक्षर 'व' निर्विकार है, ...
12/12/2025

गोस्वामी तुलसीदास महाराज महत्वपूर्ण महाग्रन्थ का शुभारम्भ 'वर्णानामर्थ' शब्द से करते हैं। इसमें अक्षर 'व' निर्विकार है, यानी विकाररहित। इसके बाद रेफ (उड़ता र) आता है जो उत्कर्ष का सूचक कहा जा सकता है। इस तरह से संतजन सन्देश देते हैं कि अगर आप निर्विकार रहेंगे तो आपका उत्कर्ष ही होगा।

अब श्रीरामचरितमानस के मङ्गलाचरण का प्रथम श्लोक पढ़िए और माँ सरस्वती और भगवान विनायक का स्मरण कीजिए...
वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ।।
अक्षरों, अर्थ समूहों, रसों, छन्दों और मंगलों को करने वाली सरस्वतीजी और गणेशजी की मैं वन्दना करता हूँ।

इसी क्रम में आज ही मङ्गलाचरण पूर्ण कर लेते हैं। आइए... दूसरा श्लोक
भवानीशंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।
याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्।।
श्रद्धा और विश्वास के स्वरूप भवानी पार्वती और भगवान शंकर की मैं वन्दना करता हूँ जिनके बिना सिद्धजन अपने अन्तःकरण में स्थित ईश्वर को देख नहीं सकते।

तीसरे श्लोक में गोस्वामी तुलसीदास महाराज ने भगवान शंकर को गुरु माना है-
वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकररूपिणम्।
यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते।।
गोस्वामी बाबा कहते हैं- ज्ञानमय, नित्य, शंकररूपी गुरु की मैं वन्दना करता हूँ जिनके आश्रित होने से टेढ़ा चन्द्रमा भी सर्वत्र वन्दित होता है। यानी मैं टेढ़ा मानव भी वन्दित हो सकूँगा।

विशुद्ध ज्ञान को विज्ञान कहा जाता है। यहां गोस्वामी बाबा ने विज्ञान में विशुद्धता बताई है। चतुर्थ श्लोक में महर्षि वाल्मीकि और भगवान महावीर हनुमान को समकक्ष करते हुए विशुद्ध विज्ञान के स्वामी कहा है। पढ़िए...
सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ।
वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ।।
श्रीसीतारामजी के गुणसमूहरूपी पवित्र वन में विहार करने वाले, विशुद्ध विज्ञान सम्पन्न कवीश्वर (महर्षि वाल्मीकि) और कपीश्वर (हनुमान बाबा) की मैं वन्दना करता हूँ।

पञ्चम् श्लोक में माँ सीता को सर्वश्रेयस्करी कहा है, उन्हें जगद्माता कहा है-
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्।।
उद्भव (उत्पत्ति), स्थिति (पालन) और संहार करने वाली, क्लेशों को हरने वाली तथा हर जगह सबका श्रेयस्कर को करने वाली भगवान राम की वल्लभा माता सीता को मैं नमस्कार करता हूँ।

गोस्वामी बाबा ने षष्ठम् श्लोक में श्रीमद्भगवद्गीता का सार परोस दिया है। इस संसार को मिथ्या बताने के लिए अचूक उदाहरण दिया है-
यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा
यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः।
यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां
वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्।।
जिनकी माया के वशीभूत सम्पूर्ण विश्व, ब्रह्मादि देवता और असुर हैं, जिनकी सत्ता से रस्सी में सर्प के भ्रम की भाँति यह सारा दृश्य जगत सत्य ही प्रतीत होता है। जिनके केवल चरण ही भवसागर से तरने की इच्छा रखने वालों के लिए एकमात्र नौका हैं, उन समस्त कारणों से परे (सब कारणों के कारण और सबसे श्रेष्ठ) राम कहलाने वाले भगवान हरि की मैं वन्दना करता हूँ।

सप्तम् श्लोक में बताया है कि श्रीरामचरितमानस में इनपुट कहाँ से लिये हैं-
नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्
रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा
भाषानिबन्धमतिमंजुलमातनोति।।
नाना (अनेक) पुराण, वेद और शास्त्र से सम्मत था जो रामायण में वर्णित है और कुछ अन्यत्र से भी उपलब्ध रघुनाथ की गाथा (कथा) को तुलसीदास अपने अन्तःकरण के सुख के लिए मति के अनुसार भाषा में निबन्धित करता है।

साथियो, इस तरह से हमने श्रीरामचरितमानस के पारायण का शुभारम्भ कर दिया। आज हमने सात काण्डों वाले महाग्रन्थ के पहले काण्ड बालकाण्ड के मङ्गलाचरण का अर्थ जानने का प्रयास किया। ध्यान देने योग्य बात यह है कि सात काण्ड के महाग्रन्थ के पहले काण्ड के मङ्गलाचरण में सात ही श्लोक हैं। इन सात श्लोकों में भवानी सरस्वती, अग्रपूज्य भगवान विनायक, माँ पार्वती, भगवान शिव, महर्षि वाल्मीकि, भगवान महावीर हनुमान, माता सीता की वन्दना की गई। किसलिये वन्दना की यह भी बताया। इनपुट के लिए क्रेडिट भी दिया। गोस्वामी तुलसीदास महाराज से यह निपुणता, विनम्रता, कृतज्ञता अनुकरण करने योग्य है। क्रमशः...
#सीताराम #राम #राम
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साथियो, आज से श्रीरामचरितमानस का पारायण शुरू किया जा रहा है। आपको प्रतिदिन कुछ चौपाइयों के रसपूर्ण अर्थ इसी पेज पर लिखे ...
11/12/2025

साथियो, आज से श्रीरामचरितमानस का पारायण शुरू किया जा रहा है। आपको प्रतिदिन कुछ चौपाइयों के रसपूर्ण अर्थ इसी पेज पर लिखे जाएँगे। हमसे जुड़े रहिए और नियमित भगवान के नाम, गुण आदि का स्मरण कीजिए। अगली पोस्ट में श्रीरामचरितमानस का बालकाण्ड के मंगलाचरण से शुभारम्भ...

राम के साथ लक्ष्मण का नाम जुड़ा रहता है जबकि राम ने जब भी उदाहरण दिया तो भरत जैसे भाई का दिया। ऐसा क्यों?इसका जवाब पता ह...
20/09/2025

राम के साथ लक्ष्मण का नाम जुड़ा रहता है जबकि राम ने जब भी उदाहरण दिया तो भरत जैसे भाई का दिया। ऐसा क्यों?
इसका जवाब पता है तो कॉमेंट कीजिए। नहीं पता तो लिखिए कि इस पर वीडियो बनाया जाए।

साथियो, नया वीडियो 10 दिन के अंदर आ रहा है। वीडियो का टाइटल होगा- राम कौन हैं (Part-2)। अगर आपने राम कौन हैं (Part-1) नह...
16/05/2023

साथियो, नया वीडियो 10 दिन के अंदर आ रहा है। वीडियो का टाइटल होगा- राम कौन हैं (Part-2)। अगर आपने राम कौन हैं (Part-1) नहीं देखा है तो ये रहा वीडियो का लिंक- https://youtu.be/TGHyrYqBKZg।

चैनल पर और भी तमाम वीडियो हैं। आप बने रहें हमारे साथ। चैनल का लिंक-
https://youtube.com/

'श्रीरामचरितमानस से' सीरीज में हम आपके लिए लाए हैं- राम कौन हैं। इसी प्रश्न के साथ हम राम नाम के सागर में जाने वाले है...

19/09/2022

मोटिवेशन क्या है?

हमारे चैनल पर नया विडियो आ गया है। अभी देखिए 'राम कौन हैं।'दशरथ के पुत्र राम या भगवान राम?https://youtu.be/TGHyrYqBKZg
11/04/2022

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16/06/2021

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27/05/2021

अति गहगहे बाजने बाजे। सबहिं मनोहर मंगल साजे।।
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'मंगल' पर आधारित (RAMAYAN EP-3) यूट्यूब पर नया विडियो आ चुका है। वहाँ देखिए पूरा विडियो। सर्च करने के लिए टाइप करिए- Healing with Geeta

23/05/2021

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