14/12/2025
वन्दना के क्रम में गुरु महाराज के बाद ब्राह्मणों और सन्तों की वन्दना गोस्वामी तुलसीदास ने की है। वह लिखते हैं-
बन्दउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।
सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।
पहले पृथ्वी के देवता (ब्राह्मण) की वन्दना करता हूँ जो मोह से उपजे सभी संशय को हरने वाले हैं। उसके बाद सुजन (सन्त) समाज को प्रेम सहित सुन्दर वाणी से प्रणाम करता हूँ जो सभी गुणों की खान हैं।
साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू।
जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बन्दनीय जेहिं जग जस पावा।।
साधु का चरित्र कपास के चरित्र के समान शुभ है जिसका फल नीरस, विशद (स्वच्छ/उज्ज्वल) और गुणमय है। जो दुःखों को सहकर दूसरों के छिद्रों (दोषों) को ढकता है जिसके कारण उसने जगत में वन्दनीय यश पाया।
मुद मङ्गलमय सन्त समाजू। जो जग जङ्गम तीरथराजू।।
राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा।।
सन्तों का समाज आनन्द और कल्याणमय है, जो जगत में जङ्गम (चलता-फिरता) तीर्थराज हैं। ऐसे चलते-फिरते तीर्थराज में रामभक्ति ही गङ्गा की धारा है और उनका ब्रह्म का प्रचार करना ही सरस्वती हैं जो अदृश्य है।
बिधि निषेधमय कलिमल हरनी। करम कथा रबिनन्दनि बरनी।
हरि हर कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल मुद मङ्गल देनी।।
साधु द्वारा बताए गए विधि और निषेध (क्या करना है, क्या नहीं) रूपी कर्मों की कथा कलियुग के पापों को हरने वाली रविनन्दिनी (यमुनाजी) हैं। इनके साथ भगवान विष्णु और भगवान शिव की कथाएँ त्रिवेणी बनकर सुशोभित हैं। साधुओं से जब ये कथाएँ सुनते हैं तो सब आनन्द और कल्याणों को देने वाली हैं।
बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा।।
सबहि सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत सादर समन कलेसा।।
उन सन्तों का धर्म में अटल विश्वास ही अक्षयवट है और शुभकर्म ही तीर्थराज का समाज है। सन्तजन सब देश, सब समय सहज ही सुलभ हैं और उनकी सेवा-सत्कार करने से सभी क्लेशों का शमन हो जाता है।
अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देह सद्य फल प्रगट प्रभाऊ।।
वह तीर्थराज (सन्तजन) अकथनीय और अलौकिक है। तत्काल प्रकट प्रभाव में फल देने वाला है।
सुनि समुझहिं जन मुदित मन, मज्जहिं अति अनुराग।
लहहिं चारि फल अछत तनु, साधु समाज प्रयाग।।
जो जन सन्तसमाजरूपी तीर्थराज प्रयाग के बारे में प्रसन्न मन से सुनते, समझते और इसमें अनुराग के साथ गोते लगाते हैं उनको शरीर के रहते ही चारों फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) मिल जाते हैं।
क्रमश...
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