29/07/2026
सहाबा-ए-किराम के इख़्तिलाफ़ात और उम्महातुल-मोमिनीन के बारे में अहले हदीस का अक़ीदा....
तहरीर: अब्दुल आदिल अंसारी
✿ ईमाम अबू उस्मान अल-साबूनी रहिमाहुल्लाह फरमाते हैं:
ويرون الكف عما شَجَرَ بين أصحاب رسول الله ، وتطهير الألسنة عن ذكر ما يتضمن عيبًا لهم ونقصا فيهم.
ويرون التَّرَحمَ على جميعهم والموالاة لكافتهم.
وكذلك يَرَوْنَ تعظيم قدر أزواجه رضي الله عنهن والدعاء لهن ومعرفة فضلهن والإقرار بأنهنَّ أمهات المؤمنين.
और अहले हदीस इस बात के क़ाइल हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ के सहाबा-ए-किराम के दरमियान जो इख़्तिलाफ़ात और मामले पेश आएं, उनके बारे में ख़ामोशी इख़्तियार की जाए, और ज़ुबानों को उन बातों से महफ़ूज़ रखा जाए जिनमें सहाबा-ए-किराम की तन्क़ीस, ऐब-जूई या उनकी शान में गुस्ताख़ी पाई जाती हो।
और वे तमाम सहाबा-ए-किराम के लिए रहमत की दुआ करते हैं तथा सबके साथ मुहब्बत और वफ़ादारी रखते हैं।
इसी तरह वे उम्महातुल-मोमिनीन, यानी रसूलुल्लाह ﷺ की अज़वाज-ए-मुतह्हरात रज़ियल्लाहु अन्हा के मर्तबे और फ़ज़ीलत को ताज़ीम की निगाह से देखते हैं, उनके लिए दुआ करते हैं, उनकी बुज़ुर्गी और फ़ज़ीलत को तस्लीम करते हैं, और इस बात का इक़रार करते हैं कि वे तमाम मोमिनों की माएँ हैं।
[अक़ीदा अस-सलफ असहाबुल हदीस लिल साबूनी, सफा नंबर : 149-150]