04/12/2025
जैविभा–लाडनूँ की नव-निर्माण यात्रा में आदरणीय धर्मचंद जी लूँकड़ केवल एक दायित्वधारी नहीं, बल्कि वह दृढ़ शक्ति हैं जिन्होंने इस संपूर्ण प्रयास को दिशा, स्थिरता और सतत गति प्रदान की।
उनकी उपस्थिति किसी शांत प्रकाश की तरह है—जो बिना शोर किए अपने कर्मों से चारों ओर उजाला फैलाती है।
वे स्वयं मेहनत करते हैं और दूसरों के लिए राह आसान बना देते हैं।
1️⃣ सेवा का स्वरूप – निस्वार्थता का सर्वोच्च स्तर धर्मचंद जी का कार्य केवल योगदान नहीं, बल्कि हृदय से उपजा हुआ धर्मभाव है।कठिन परिस्थिति हो या चुनौती का क्षण, आपने हर दायित्व को मुस्कुराते हुए स्वीकार किया और स्वयं से पहले दूसरों की सुविधा, संगठन के हित और संघ की आवश्यकताओं को स्थान दिया।
2️⃣ संगठन-निष्ठा — हर कदम पर एक ही ध्येय पहले कदम से लेकर शिखर तक पहुँचने तक, हर चरण में, हर निर्णय में
आपने यही सिद्ध किया— ‘संघ-हित ही मेरा प्रथम धर्म।’
3️⃣ गुरुभक्ति का अतुलनीय तेज — गुरु-आशीर्वाद से प्रेरित कर्मपथ आपका प्रत्येक कदम, प्रत्येक निर्णय
गुरुदेव की प्रेरणा और गुरु-आशीर्वाद की शक्ति से ही ओत-प्रोत रहा है। गुरु-निष्ठा की इस ऊष्मा ने आपके भीतर ऐसी ऊर्जा भरी कि दिन-रात, परिस्थिति या दूरी—
कुछ भी आपके संकल्प को रोक नहीं सका।
4️⃣संबंधों को गूँथने में धर्मचंद जी का कौशल अद्वितीय है।
वे लोगों में केवल क्षमताएँ नहीं देखते—उनके भीतर छिपी संभावनाओं, गुणों और उज्ज्वल भविष्य को भी पढ़ लेते हैं।
फिर उन संभावनाओं को विश्वास की ऊर्जा और मार्गदर्शन की दिशा देकर, जहाँ हर व्यक्ति स्वयं को विकसित होते हुए महसूस करता है।साधारण क्षमताएँ भी असाधारण योगदान में बदल जाती हैं,और यही गुण उन्हें संगठन विशेष बनाता है।
5️⃣ विनम्रता — जिसने सबका मन जीता उच्च दायित्व पर होते हुए भी आपमें तनिक अहं नहीं। हर व्यक्ति को अपने परिवार की तरह अपनाना,हर कठिनाई को धैर्य से सुनना
और तुरंत समाधान देना— यही आपके व्यक्तित्व की सबसे मोहक छाप है।
6️⃣ कठिन परिश्रम — दिन-रात एक कर देने वाला संकल्प
न मौसम देखा,न दूरी देखी,न स्वास्थ्य की परवाह,न समय की बाधा—आपके लिए सदैव एक ही संकल्प रहा—
“धर्मसंघ का कार्य सर्वोपरि।”
🌺 जैविभा–लाडनूँ की यात्रा में आपका अविस्मरणीय योगदान धर्मचंद जी ने केवल निर्माण-कार्य का संचालन ही नहीं किया, बल्कि आस्था का आधार, संयम का वातावरण
और संगठन के संस्कार स्थापित किए। जहाँ-जहाँ उनका स्पर्श गया,वहाँ-वहाँ कर्तव्यपरायणता की चमक दिखाई दी।
💬 लोगों की अनुभूति — जो शब्दों से अधिक विश्वास में दर्ज है जो भी धर्मचंद जी के संपर्क में आया, उसने यही कहा—
“उनकी कार्य-शक्ति से अधिक दिव्य है उनकी मानवीयता।”
“वे काम नहीं करते — प्रेरणा जगाते हैं।”
“उनके जैसा स्नेह, अनुशासन और समर्पण दुर्लभ है।”
“उनकी गुरुभक्ति ही उनकी सच्ची शक्ति है।”
🙏 सादर प्रणाम एवं मंगलभावना
आदरणीय धर्मचंद जी,
आपका योगदान केवल वर्तमान को नहीं,
भविष्य की अनेक पीढ़ियों को मार्गदर्शन देता रहेगा।
आपका स्वास्थ्य उत्तम रहे,
ऊर्जा चिरस्थायी रहे
और गुरु-आशीर्वाद की यह उज्ज्वल धारा
सदैव आपकी राह को आलोकित करती रहे।
ओम अर्हं 🙏
सादर प्रणाम एवं अनंत-अनंत मंगलकामनाएँ।