20/05/2025
विश्व में एकमात्र भगवान श्री ब्रह्मा सिद्धपीठ कुरुक्षेत्र।
माँ ब्रह्माणी और माँ गायत्री के साथ भगवान श्री ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर संत महर्षि दुर्वासा स्वरूप स्वामी श्री शक्तिदेव ओंकार जी महाराज द्वारा धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की धरा पर स्थापित किया गया है। इस मंदिर की आधारशिला गुरुदेव श्री जी द्वारा 1 अक्टूबर सन 2000 में दिन रविवार को चतुर्थ नवरात्रे संवत 2057 को रखी गयी थी।
पृथ्वी पर भगवान ब्रह्मा जी का सपरिवार मंदिर किसी और स्थान पर स्थापित क्यूँ नहीं हो पाया :-
सृष्टि रचना के बाद पुष्क क्षेत्र में भगवान श्री ब्रह्मा जी ने यज्ञ किया और पूर्णाहुति के लिए माँ ब्रह्माणी जी को बुलाने के लिए नारद जी को भेजा। माता के आने में विलम्ब होने के कारण सभी ऋषियों के कहने पर भगवान ब्रह्मा जी ने भगवती गायत्री जी के साथ पाणीग्रहण संस्कार कर पूर्णाहुति देकर यज्ञ सम्पूर्ण किया। ब्रह्माणी माँ इस दृश्य को देख कर सन्न रह गयी और अप्रसन्न होकर जगत माता ने भगवान ब्रह्मा जी को सम्पूर्ण लोक में अपूज्य होने और पृथ्वी पर कोई मंदिर नहीं बना सकेगा ऐसा श्राप दे डाला। और स्वयं दूर रत्नगिरी पर्वत पर जाकर तपस्यारत हो गयी। इसी श्राप के कारण पुष्कर में ब्रह्मा जी पुजित नहीं है।
पृथ्वी पर श्री गुरुदेव जी द्वारा भगवान ब्रह्मा जी का मंदिर कुरुक्षेत्र में कैसे और क्यूँ स्थापित हुआ :-
देवों की सर्वोच्च अधिष्ठात्री ओंकार शक्ति स्वयंभू महामाया माँ आदिशक्ति के बिना कोई भी शक्ति शाप को मुक्त नहीं कर सकती। श्री गुरुदेव जी के हृदय में उस ओंकार शक्ति का प्रकाश होने पर श्री गुरुदेव जी द्वारा भगवान श्री ब्रह्मा जी को सपरिवार स्थापित किया गया और गुरुदेव जी द्वारा ओंकार वाणी हुई की इस पृथ्वी पर इस मंदिर के बाद कई कल्पों तक कोई भी भगवान ब्रह्मा जी को स्थान नहीं दे पायेगा। और भगवान ब्रह्मा जी कलियुग में अपने भक्तों का उद्दार करेँगे।
भगवान श्री ब्रह्मा रथयात्रा का आयोजन :
कार्तिक की पूर्णिमा को निकाली जाती है भगवान श्री ब्रह्मा रथयात्रा। और उस दिन रथ को सभी भक्तगण अपने हाथों से खिंचकर पैदल ही पुरे कुरुक्षेत्र की परिक्रमा करते हैँ।