10/08/2026
यह एक अत्यंत भावपूर्ण प्रस्तुति है। एक भक्त का हृदय जब भगवती महाकाली की शरण में जाता है, तो वह अपने आराध्य में उसी दिव्य शक्ति के दर्शन करने लगता है।
इस सुंदर बंगाल के गीत का भाव है — Divine Philosophy of Jagadguruttam Shree Kripalu ji Maharaj
**"हे माँ श्यामा (महाकाली), मैं क्या करूँ? आप ही बताइए। इस संसार रूपी कारागार में मुक्ति नहीं मिलती।"**
मेरे लिए माँ महाकाली जगतजननी, आदिशक्ति हैं, और मेरे श्री महाराज जी साक्षात् भगवद्तत्त्व, युगलतत्त्व हैं। जैसे भगवान सर्वव्यापक हैं, वैसे ही महापुरुष भी सर्वव्यापक होते हैं। भक्त की दृष्टि में जहाँ भगवद्-कृपा का प्रकाश होता है, वहाँ भेद नहीं रह जाता।
बंगाल की संस्कृति, भक्ति और संगीत में भावों की एक अद्भुत गहराई है। किन्तु प्रेम, भक्ति और समर्पण के भाव को समझने के लिए किसी भाषा की आवश्यकता नहीं होती। हृदय का भाव स्वयं अपना मार्ग बना लेता है।
मेरे श्री महाराज जी में मुझे अपनी माँ महाकाली की ही करुणा, शक्ति और दिव्यता के दर्शन होते हैं। उनके चरणों में ही मेरा आश्रय, मेरा विश्वास और मेरी शांति है।
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