माँ नायर देवी धाम का इतिहास- एक समय की बात है
हीरागंज गाँव में बंजारों
की एक टोली रहती थी।
यायावर अवस्था में एक
बार बंजारे
अपना खजाना जमीन में
गाड़ कर चले गए और पहचान के लिए माँ की मूर्ति की स्थापना की और एक बरगद का पेङ रोपित कर दिया और बाद मेँ क्षेत्रीय लोगोँ ने उन्हें माँ नायर देवी के नाम पूजा पाठ शुरु किया । उस मन्दिर को बनारस निवासी हीरागंज क्रषि विभाग मेँ कार्यरत अम्बिका राय साहब जी ने सभी जी
र्ण शीर्ण मन्दिरोँ का रंगरोपन एवं सफाई कराई। राय साहब जी ने गणेश जी, शंकर जी, हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना करवायी। राय सहाब जी का माँ नायर देवी धाम मेँ अमूल्य योगदान है।
वर्तमान में उस स्थान
को माँ नायर देवी धाम के नाम
से जानते है ।यह प्राचीन मंदिर उत्तर
प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले
के बाबागंज विकास क्षेत्र
की प्रमुख बाजार
हीरागंज में स्थित है।
मंदिर मां नायर देवी
को समर्पित है।
मां से मांगी गयी मुरादें
पूरी होने पर
यहां दुरदुरइया का भी आयोजन
महिलाओं
द्वारा हर गुरुवार को किया जाता है।
हर गुरुवार यहाँ विशाल
मेला लगता है । मां नायर
देवी धाम पर नवरात्र के
नवमीं पर एक विशाल
भंडारे का आयोजन
किया जाता है । जहां पर
हजारोँ कुंआरी कन्याओं को
भंडारे का प्रसाद ग्रहण
कराया जाता है। माँ के मन्दिर को क्षेत्रीय भक्त सेठ रामसुख जायसवाल ने सन् 1970 मेँ बनवाया है माँ के धाम की सबसे बङी खूबी मैया बिना छत्र के रहती हैँ। एक विशाल बरगद का पेङ धाम के प्रांगण मेँ है जिस पर लोग मुराद पूरी होने पर झंडा(निशान) चढाते हैँ माँ के मन्दिर के बगल एक विशाल सरोवर है और माता रानी के धाम मेँ बजरंग बली,भोलेनाथ,माँ दुर्गा,काल भैरव का भी मन्दिर प्रांगण मेँ है