17/08/2022
*कैथरीन कुहलमान का प्रार्थना जीवन*
जब कोई उन्हें अपने प्रार्थना जीवन के बारे में पूछते तो वे कहती
"मै सारा समय प्रार्थना करती हूं क्योंकि अगर मै पवित्र आत्मा को कुछ ही समय या दिन के कुछ घंटों के लिए सीमित रखती हूं तो मैं पवित्र आत्मा का गलत इस्तमाल करती हूं या खुद के ही उद्देश्य को पूरा करने के खतरे में पड़ जाती हूं। उद्धरणता अगर मैं एक घंटा प्रार्थना करती हूं, मैं यह अपेक्षा रखती हूं की पवित्र आत्मा मुझे उस घंटे का प्रतिफल देगा। मुझे ऐसे लगने लगेगा की इस प्रार्थना के एक घंटे के वजह से प्रार्थना सभा में *अभिषेक* मंडरा रहा है। नही! मैं पवित्र आत्मा का इस तरह से दुरुपयोग नहीं कर सकती। मुझे उनकी उपस्थिति को हर क्षण कार्य में लाना है।"
कैथरीन कुहलमान परमेश्वर के सामर्थ को जहा कहा जाती वहां वे दर्शाती थी। कितनी ही बढ़ी या छोटी इमारत क्यों नही हो, पापी और संत/धर्मी हमेशा पहचानते की कैथरीन कुहलमान कब इमारत में प्रवेश कर चुकी है क्योंकि सारा वातावरण उस समय अनोखी रीती से बदल जाता। उनका जीवन *प्रार्थनाबद्ध* जीवन था।
लगातार सफर करते हुए भी वे सतत प्रार्थना जारी रखती। सभा शुरू होने के पहले उनके कर्मचारी दर्शाते है की कैथरीन कुहलमान कभी आगे /कभी पीछे चलती, अपने सिर को ऊपर, कभी नीचे, कभी अपने बाहों/हाथों को हवा में उठाती, कभी अपने हाथों को पीछे घुमाकर पखड़ती और प्रार्थना करते हुवे रोती "
ओरल रॉबर्ट्स संक्षेप में उनके प्रार्थना की गहराई को बताते है। वे कहते है
"ऐसा महसूस होता की वे एक दूसरे से आगे पीछे बाते करते और कोई नही बता पाता की कैथरीन ने कब शुरू किया और पवित्र आत्मा की बाते कब खत्म हुई और पवित्र आत्मा कब चलें भी गए। दोनो में इतनी एकता थी/एकसंघ थे।
इसमें कोई आश्चर्यजनक की बात नही है की उनकी सेवकाई की विशेषता चिन्हचमत्कार थी ।
(By God's grace translated in Hindi as requested by many. Glory to our Lord Jesus Christ)🙏