जय माँ चाल काली Jai Maa Chal Kali Chaal Kotkhai

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जय माँ चाल काली Jai Maa Chal Kali Chaal Kotkhai जय माँ चाल काली !
आपकी असीम कृपा बनी रहे!

जय माँ चाल काली !
तेरी असीम कृपा बनी रहे!
जय चाल माता-सारे रे रोक्षा कोरे और आपनी कृपा-द्रिष्टी छाड़े !
चाल, खनेटी, गोविंदपुर, चौंरी-बघाल, क्यारवी

जय माँ चाल काली
17/05/2026

जय माँ चाल काली

जय माँ चाल काली ।
05/04/2026

जय माँ चाल काली ।

30/09/2025

जय माँ चाल काली - जय माँ सिद्धिदात्री
नवरात्रि के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ये माँ दुर्गा का अंतिम स्वरूप हैं और सभी सिद्धियों (अलौकिक शक्तियों) की दात्री मानी जाती हैं।
नाम का अर्थ:
सिद्धि = आध्यात्मिक शक्ति
दात्री = देने वाली
इसलिए माँ सिद्धिदात्री को सिद्धियों की प्रदाता कहा जाता है।

स्वरूप:
माँ कमल पर विराजमान रहती हैं या सिंह पर सवार होती हैं।
इनके चार हाथ होते हैं: गदा, चक्र, शंख, और कमल धारण करती हैं। इनके चारों ओर सिद्ध, संत, देवता और असुर भी इनकी आराधना करते हैं।

महत्व:
माँ सिद्धिदात्री की पूजा से ज्ञान, भक्ति, मोक्ष और आठों सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। ये अज्ञान का नाश करती हैं और जीवन में पूर्णता व सफलता प्रदान करती हैं। देवी भागवत के अनुसार, भगवान शिव ने इन्हीं की कृपा से अर्धनारीश्वर रूप धारण किया।

माँ सिद्धिदात्री का मुख्य मंत्र
"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः॥"
अर्थ:
"हे माँ सिद्धिदात्री! आप सभी सिद्धियों की दात्री हैं। कृपया हमें ज्ञान, शक्ति और मोक्ष प्रदान करें।"

दिन का रंग और भोग
रंग: बैंगनी– महत्वाकांक्षा, गरिमा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक।
भोग: नारियल, फल और कमल के फूल अर्पित किए जाते हैं।
विशेष पूजा: कन्या पूजन (कंजक पूजन) इस दिन का मुख्य अनुष्ठान है। 🙏 🚩🚩 🙏 ❤️❤️

29/09/2025

जय माँ चाल काली - जय माँ महागौरी
नवरात्रि के आठवें दिन (महाअष्टमी) माँ महागौरी की पूजा की जाती है। ये माँ दुर्गा का आठवाँ स्वरूप हैं और पवित्रता, शांति और ज्ञान की प्रतीक मानी जाती हैं। माना जाता है कि इनकी आराधना से जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मन को शांति व सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
कथा:
कहा जाता है कि माँ पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इस तपस्या के कारण उनका शरीर काला पड़ गया। तपस्या पूर्ण होने पर भगवान शिव ने गंगा जल से स्नान कराया, जिससे उनका वर्ण अत्यंत गौर और उज्ज्वल हो गया। तभी से इन्हें महागौरी कहा जाता है।
स्वरूप:

वस्त्र: श्वेत (सफेद)
वाहन: बैल
हाथों में: त्रिशूल और डमरू
प्रतीक: शांति, पवित्रता और करुणा

माँ महागौरी का मुख्य मंत्र
"ॐ देवी महागौर्यै नमः॥"

अर्थ:
"हे देवी महागौरी! आपको नमस्कार है। आप पवित्रता और शांति की प्रतीक हैं, कृपया हमें सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।"

दिन का रंग और भोग
रंग: गुलाबी या सफेद – पवित्रता और शांति का प्रतीक।
भोग: नारियल, सफेद मिठाई और दूध से बने व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।
विशेष पूजा: कन्या पूजन (कंजक पूजन) इस दिन का मुख्य अनुष्ठान है।
🙏

28/09/2025

जय माँ चाल काली- जय माँ कालरात्रि ।
नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। ये माँ दुर्गा का सबसे भयंकर और शक्तिशाली स्वरूप हैं। इन्हें अंधकार और भय का नाश करने वाली देवी माना जाता है। उनका स्वरूप गहरे काले रंग का है, बाल बिखरे हुए, गले में विद्युत माला, और वाहन गधा है। इनके चार हाथ होते हैं—एक में वज्र, दूसरे में तलवार, तीसरा हाथ अभय मुद्रा में और चौथा वर मुद्रा में।
महत्व:
माँ कालरात्रि की उपासना से सभी प्रकार के भय, नकारात्मक ऊर्जा और शत्रुओं का नाश होता है। राहु ग्रह के दोष दूर होते हैं और आत्मबल, साहस तथा निर्णय शक्ति मिलती है। यह पूजा साधक के सहस्रार चक्र को जागृत करती है और आत्मज्ञान प्रदान करती है
माँ कालरात्रि का मुख्य मंत्र
"ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥"
अर्थ:
"हे देवी कालरात्रि! आपको नमस्कार है। आप अंधकार और भय का नाश करने वाली हैं, कृपया हमें निर्भयता और कल्याण प्रदान करें।"
विशेष मंत्र
"या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
अर्थ:
"जो देवी समस्त प्राणियों में कालरात्रि रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बार-बार प्रणाम है।"
दिन का रंग और भोग
रंग: नीला या गहरा काला – शक्ति और रहस्य का प्रतीक। भोग: गुड़ और धान्य (अन्न) अर्पित किए जाते हैं। 🙏 🚩🚩 🙏

27/09/2025

जय माँ चाल काली माँ कात्यायनी
नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। ये माँ दुर्गा का छठा स्वरूप हैं और इन्हें शक्ति, साहस और विजय की देवी माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर का वध करने के लिए माँ ने सिंह पर सवार होकर उसका संहार किया। इनके चार हाथ होते हैं—दो में खड्ग (तलवार) और कमल, तथा अन्य दो में अभय मुद्रा और वर मुद्रा।
महत्व:
माँ कात्यायनी की उपासना से साहस, शक्ति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
विवाह में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है।
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा और जीवन में सकारात्मकता आती है।

माँ कात्यायनी का मुख्य मंत्र
"ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥"
अर्थ:
"हे देवी कात्यायनी! आपको नमस्कार है। आप शक्ति और साहस की प्रतीक हैं, कृपया हमें बल, साहस और कल्याण प्रदान करें।"

विशेष मंत्र (विवाह हेतु)
"कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥"
अर्थ:
"हे माँ कात्यायनी! आप महाशक्ति और योग की अधीश्वरी हैं। कृपया मुझे नंदगोप के पुत्र (भगवान कृष्ण) जैसे पति का वरदान दें।"
दिन का रंग और भोग

रंग: लाल – शक्ति और साहस का प्रतीक।
भोग: शहद और पीले फूल अर्पित किए जाते हैं।
🙏

26/09/2025

जय माँ चाल काली - जय माँ स्कंदमाता ।
नवरात्रि के पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है। ये देवी दुर्गा का पाँचवाँ स्वरूप हैं और भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। इन्हें कमलासन पर विराजमान दिखाया जाता है, गोद में बाल रूप में स्कंद को धारण करते हुए, और वाहन सिंह है। इनके चार हाथ होते हैं—दो में कमल पुष्प, एक में भगवान स्कंद और एक से आशीर्वाद देती हैं। इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है।

महत्व:
माँ स्कंदमाता की पूजा से शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
माना जाता है कि इनकी उपासना से माँ दुर्गा और भगवान कार्तिकेय दोनों का आशीर्वाद मिलता है।

माँ स्कंदमाता का मंत्र
"ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥"

अर्थ:
"हे देवी स्कंदमाता! आपको नमस्कार है। आप मातृत्व, प्रेम और साहस की प्रतीक हैं, कृपया हमें शांति, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करें।"

दिन का रंग और भोग
रंग: पीला – ज्ञान और ऊर्जा का प्रतीक।
भोग: केले और पीले रंग के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं

25/09/2025

जय माँ चाल काली, जय माँ कूष्मांडा ।
नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है। इन्हें ब्रह्मांड की सृष्टिकर्त्री माना जाता है। मान्यता है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब माँ कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। ये सूर्य मंडल में निवास करती हैं और ऊर्जा, स्वास्थ्य व समृद्धि प्रदान करती हैं।

मंत्र
"ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥"
अर्थ:
"हे देवी कूष्मांडा! आपको नमस्कार है। आप ब्रह्मांड की सृष्टिकर्त्री और ऊर्जा की अधिष्ठात्री हैं।"
महत्व और लाभ
माँ कूष्मांडा की पूजा से ऊर्जा, स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
ये सूर्य मंडल की अधिष्ठात्री हैं, इसलिए इनकी कृपा से जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता आती है।

Address

Chaal Kaali Temple
Kotkhai
171204

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Monday 8am - 5:30pm
Tuesday 8am - 5:30pm
Wednesday 8am - 5:30pm
Thursday 7am - 5:30pm
Friday 8am - 5:30pm
Saturday 8am - 5:30pm
Sunday 8am - 5:30pm

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