Sisodiya

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Sisodiya The Sisodia is an Indian Rajput clan, who claim Suryavanshi lineage. A dynasty belonging to this clan ruled over the kingdom of Mewar in Rajasthan.

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19/01/2022

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11/05/2021

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मेवाड़ की  #धरती को मुगलों के  #आतंक से बचाने वाले ऐसे वीर सम्राट, शूरवीर, राष्ट्रगौरव, पराक्रमी, साहसी,  #राष्ट्रभक्त_क...
09/05/2020

मेवाड़ की #धरती को मुगलों के #आतंक से बचाने वाले ऐसे वीर सम्राट, शूरवीर, राष्ट्रगौरव, पराक्रमी, साहसी, #राष्ट्रभक्त_को_शत्-शत् नमन।💐💐🙏🏻🚩

राणा प्रताप इस भरत भूमि के, मुक्ति मंत्र का गायक है।
राणा प्रताप आजादी का, अपराजित काल विधायक है।।

वह अजर अमरता का गौरव, वह मानवता का विजय तूर्य।
आदर्शों के दुर्गम पथ को, आलोकित करता हुआ सूर्य।।

राणा प्रताप की खुद्दारी, भारत माता की पूंजी है।
ये वो धरती है जहां कभी, चेतक की टापें गूंजी है।।

पत्थर-पत्थर में जागा था, विक्रमी तेज बलिदानी का।
जय एकलिंग का ज्वार जगा, जागा था खड्ग भवानी का।।

जय श्री महाराणा जय भवानी🚩

06/07/2017

मज़हब के चश्मे से देश नहीं दिखता!

कुछ लोग मुख्यधारा के सच से हर वक्त असहमत ही दिखते हैं। मोदी के इज़राइल दौरे को लेकर जहां ज़्यादातर लोग खुश हैं वहीं 'कुछ लोगों' को मोदी का वहां जाना रास नहीं आ रहा। इनकी आपत्ति है कि मोदी हज़ारों फिलिस्तीनियों की हत्या करने वाले इज़राइल के यहां जा ही क्यूं रहे हैं। इत्तेफाक देखिए, ये वही लोग हैं जो भारत के साथ 4 युद्ध छेड़ने वाले पाकिस्तान के साथ हर हाल में दोस्ती की वकालत तो करते हैं मगर किसी दूसरे देश के हत्यारे होने पर (जिससे हमारा कोई ताल्लुक भी नहीं) उससे परहेज़ रखने की बात करते हैं।

ये वो लोग हैं जो फिलिस्तीनियों के बेघर होने पर हिंदुस्तान की सड़कों पर विरोध जताते हुए पत्थरबाज़ी कर देते हैं मगर इसी हिंदुस्तान में कश्मीरी पंडितों के अपने ही देश मे बेघर कर दिए जाने पर एक शब्द नहीं कहते। ये वो लोग हैं जो दूसरे की किसी धार्मिक संवेदना को अपने 'खाने की पसंद' से जोड़ देते हैं और खुद इतने संकुचित हैं कागज़ पर कुछ लकीरें उकेर देने पर सामने वाले से जीने का अधिकार तक छीन लेते हैं। मानो 'खाने की पसंद' 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' से कहीं बड़ी हो!

ये वही लोग हैं जो खुद इतने कट्टर हैं कि 15 साल पहले हुए कुछ वाकए के लिए एक इंसान को आज तक माफ नहीं कर पाए मगर क्रिकेट के खेल में दुश्मन देश पर तंज कस देने वालों को बड़ी चालाकी से 'उन्मादी' कहकर अपनी कुंठा ज़ाहिर कर देते हैं। इन्हें ये बात गंवारा नहीं होती की हमारे भाइयों को महज़ एक खेल के दौरान कुछ लोग भला-बुरा कहें। बीसियों वारदतों में शामिल होने के बाद आज तक आतंकवाद का धर्म निर्धारित नहीं कर मगर चंद एक सिरफिरे लोगों के व्यक्तिगत कुकुर्मों को पूरे देश की वर्तमान स्थिति बताकर अलगाववाद की हवा भड़काते हैं।

अफसोस...ये वही लोग हैं जो जब तक और जहां-जहां तादाद में कम हैं वहां मजबूरन धर्मनिरपेक्षता का राग अलापकर खुद को पीड़ित बताते हैं और जहां ये ज़रा ताकत में आए वहां ये सामने वाले का वजूद मिटा देते हैं। जैसा पाकिस्तान में हुआ, कश्मीर में हुआ, बांग्लादेश में हुआ और अब पश्चिम बंगाल और केरल में भी हो रहा है। जब आपका हर सच अपने मज़हब के ईर्दगिर्द आकर घुटने टेक देता है, तो आपका देश कभी आपके मज़हब से बड़ा नहीं हो पाता। और आप ये शिकायत ही करते रह जाते हैं कि लोग हमारी देशभक्ति पर सवाल क्यूं उठाते हैं?
बिना ये सोचे कि इसके लिए आप खुद कितने कसूरवार हैं।

Copied from : Dr. Dushyant Singh Sisodiya

10/05/2017

महाराणा प्रताप जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

04/02/2017
पहले भी भरोसा दिया की जोधा अकबर में कुछ गलत नहीं दिखायेंगे पर सब काल्पनिक कहानी दिखाई गई और फिल्म बनाने के बाद कोई भी नह...
29/01/2017

पहले भी भरोसा दिया की जोधा अकबर में कुछ गलत नहीं दिखायेंगे पर सब काल्पनिक कहानी दिखाई गई और फिल्म बनाने के बाद कोई भी नहीं रोक पाया।
बाजीराव जैसे अजेय अदितीय महान योद्धा शख्स को एक आशिक दिखाया गया।
और अब फिर से पूज्यनीय रानी पद्मिनी जिन्होंने जौहर किया ताकि अलाउद्दीन खिलजी पाना तो दूर उन्हें देख भी ना पाए।
माना जो तरीका राजपूत करणी सैना का था वह गलत था पर अगर यह नहीं करते तो यह फिल्म भी बनती और रीलीज भी होती।
बहुत सह लिया अपमान, और बहुत बन लिए हिन्दू महान।
पहले मुगलों नें हमारे इतिहास से छेड़छाड़ की फिर देश की सरकारों नें और अब बॉलिवुड... पर अब सहन नहीं होगा।
अभी तो सिर्फ चांटे पडे हैं अगर फिर से यही गलती हुई तो सीधे जूते ही पडेगें।
और न्यूज चैनल इसे राजपूतों का मुद्दा बनाकर पेश कर रहे हैं।
जबकि यह पूरे हिंदू धर्म, हिंदुस्तान की सभ्यता, संस्कृति और इतिहास का सवाल है।

21/11/2016

क्या यही है लोकतंत्र?

तुष्टिकरण के मुंह पर करारा तमाचा करती Dheeraj Singh जी की यह पोस्ट,साथ में दोगलेपन को भी उजागर करती।

●मुस्लिम साथ दे, तो हम BJP को हरा देगें
मायावती (यह कथन लोकतंत्र है)

●मुसलमान और यादव को एकजुट होकर अपनी ताकत दिखानी चाहिए!
लालू प्रसाद यादव(यह कथन भी लोकतंत्र है)

●मुस्लिम और दलितो को एक हो जाना चाहिए !
केजरीवाल(यह भी लोकतंत्र है)

●मुसलमान और यादव हमारी ताकत है!
मुलायम सिंह(यह भी लोकतंत्र है)

●मुसलमान मेरे दिल मे है!मुसलमान मेरा भाई है!इसलाम मेरी रूह है!
ओबैसी(यह भी लोकतंत्र है)

● मुसलमान और दलित इस देश की आत्मा मे बसे है!
राहुल गांधी(यह भी लोकतंत्र है)

● सिख और मुस्लिम उनको जवाब दे!
संजय सिंह(यह भी लोकतंत्र है)

● ईसाईयो को यह जान लेना चाहिए कि अब तक उनके साथ सिर्फ धोखा हुआ है!
केजरीवाल(गोवा मे-यह भी लोकतंत्र है)

●मुसलमानो ने मिलकर इनकी (हिदुओकी) औकात दिखा देनी चाहिए!
छोटा ओबैसी (यह भी लोकतंत्र है)

●मुसलमान हमारी पार्टी की नीव है,हम इसे कैसे अलग कर सकते है! मुसलमान ही तो हमारी ताकत है!
आजम खान(यह भी लोकतंत्र है)

इस देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों का हैं- मनमोहन सिंह

भारत मे अगर कोई हिंदुत्व की बात कर दे तो वो सांप्रदायिक है!वह देश की जनता को भडका रहा है, देश मे अशांति फैलाने का प्रयास कर रहा है!गंगा जमुनी संस्कृति मे दरार पैदा कर रहा है! ....वर्तमान परिस्थिति मे हमारे देश मे हिंदुत्व की बात करना सांप्रदायिकता कहलाता है! सांप्रदायिकता व देश मे तनाव फैलाने की कोशिश माना जाता है! बाकी कोई कुछ भी कह ले सब लोकतंत्र है!

जय हिंद
नोट :- मैने इस पोस्ट के दवारा सिर्फ राजनैतिक दोगलेपन को उजागर करने का प्रयास किया है! क्योंकि मै मानता हू कि... सभी का खुन शामिल है इस मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोडे ही है!

06/11/2016

भोपाल में बाहर निकाल कर मारे तो बाहर निकलने का
तरीका समझाओ
पीओके में अंदर घुस कर मारे तो अंदर घुसने का
तरीका समझाओ
अफजल को बता कर फाँसी पर लटकाने लगे तो अदालत
घेर लो
कसाब को बिना बताए फाँसी लटका दी तो जेल
घेर लो
फिर पहाड़गंज में बम फट जाए तो पुलिस को नाकारा कहो
होटल ताज पर हमला हो जाए तो सरकार को नपुंसक कहो
पठानकोट पर हमला हो तो प्रधानमंत्री की
गिरेबान पकड़ लो
उड़ी में वीर सपूत छले जाएँ तो सेना को
अधिकार देने की ज़िद करो..पुराना फोड़ा है, पस भर गई है, इसको छोड़ोगे तो भी
दुखेगा और छुओगे तो भी। चीरा लगाए बिना
इलाज नामुमकिन है। डॉक्टर का काम इलाज करना है,
बीमार की चीख सुनना
नहीं....
आज सुबह ही देश के मुख्य न्यायाधीश
ने प्रधानमंत्री से कहा था की अदालतों पर
मुकदमें निबटने का बोझ ज्यादा है और थोड़ी देर बाद
ही 8 फाइलें कम हो गयीं ।
😀
सुबह के भागे आतंकी अगर दोपहर तक ठोंक दिए
जाएँ....तो इसे सिर्फ encounter नहीं कहते...
इसे बदलाव कहते हैं!
बदलाव Attitude में .. बदलाव tolrance में...
zero tolerance for terrorism.

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