माँ त्रिकुटा धाम कोटा Maa Trikuta Dham Kota

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माँ त्रिकुटा धाम कोटा Maa Trikuta Dham Kota #माँ_त्रिकुटा_धाम_कोटा

हिन्दू धार्मिक आस्था का स्थान माँ त्रिकुटा धाम कोटा Maa Trikuta Dham Kota वयस्क स्त्री पुरुष सांस्कृतिक व धार्मिक परिधान पहनकर यहां पर आए। वयस्क स्त्री पुरुष आधे अधूरे कपड़े पहन कर यहां पर ना आए।
#माँ_त्रिकुटा_धाम_कोटा

07/10/2025
*🙏  ll ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ll  🙏*        *🙏 माँ वैष्णो जी  🙏* *आज प्रातः 2 दिसंबर सोमवार माँ भगवती वैष्णो...
02/12/2024

*🙏 ll ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ll 🙏*

*🙏 माँ वैष्णो जी 🙏*

*आज प्रातः 2 दिसंबर सोमवार माँ भगवती वैष्णोदेवी जी की पवित्र गुफा से पिंडी रूप माँ महाकाली ( दाएँ ) माँ महालक्ष्मी वैष्णवी ( मध्य ) और माँ महासरस्वती ( बाएँ ) दर्शन कर सभी भक्त माँ के श्री चरणों का ध्यान करें !!*

*जयकारा शेरावाली दा, बोल सच्चे दरबार की जय..🙌*

*🙏 जय माता दी 🙏*

कामाख्या मंदिर का यह गुप्त रहस्य जानकार होश उड़ जायेंगे आपके, दुनिया से छुपा था अब तक...अंत तक जरुर पढ़े🧵51 शक्तिपीठों म...
10/10/2024

कामाख्या मंदिर का यह गुप्त रहस्य जानकार होश उड़ जायेंगे आपके, दुनिया से छुपा था अब तक...अंत तक जरुर पढ़े🧵51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या शक्तिपीठ बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है। कामाख्या देवी का मंदिर अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह शक्तिपीठ नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर है। कामाख्या मंदिर सभी शक्तिपीठों का महापीठ माना जाता है।इस मंदिर में देवी दुर्गा या मां अम्बे की कोई मूर्ति या चित्र आपको दिखाई नहीं देगा। वल्कि मंदिर में एक कुंड बना है जो की हमेशा फूलों से ढ़का रहता है। इस कुंड से हमेशा ही जल निकलता रहतै है। चमत्कारों से भरे इस मंदिर में देवी की योनि की पूजा की जाती है और योनी भाग के यहां होने से माता यहां रजस्वला भी होती हैं। मंदिर से कई अन्य रौचक बातें जुड़ी है, आइए जनते हैं ...मंदिर धर्म पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस शक्तिपीठ का नाम कामाख्या इसलिए पड़ा क्योंकि इस जगह भगवान शिव का मां सती के प्रति मोह भंग करने के लिए विष्णु भगवान ने अपने चक्र से माता सती के 51 भाग किए थे जहां पर यह भाग गिरे वहां पर माता का एक शक्तिपीठ बन गया और इस जगह माता की योनी गिरी थी, जोकी आज बहुत ही शक्तिशाली पीठ है। यहां वैसे तो सालभर ही भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन दुर्गा पूजा, पोहान बिया, दुर्गादेऊल, वसंती पूजा, मदानदेऊल, अम्बुवासी और मनासा पूजा पर इस मंदिर का अलग ही महत्व है जिसके कारण इन दिनों में लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुचतें है।कामाख्या मंदिर में देवी की पूजा तंत्र-मंत्र और गुप्त रहस्यों से जुड़ी है, जहां शक्तिशाली शक्ति और रजस्वला पूजा का अद्वितीय संगम है। यह स्थान सच्चे श्रद्धालुओं के लिए दिव्य आशीर्वाद का केंद्र है।

विंध्याचल पर्वत पर विराजमान माँ विंध्यवासिनी देवी के आज दिनाक 04 अक्टूबर 2024 शुक्रवार (शारदीय नवरात्रि द्वितीय दिवस) की...
04/10/2024

विंध्याचल पर्वत पर विराजमान माँ विंध्यवासिनी देवी के आज दिनाक 04 अक्टूबर 2024 शुक्रवार (शारदीय नवरात्रि द्वितीय दिवस) की प्रातःकाल के दिव्य श्रृंगार दर्शन
🙏🏻🌺🚩जय माँ विंध्यवासिनी🚩🌺🙏🏻
#विंध्याचल

29/09/2024

Mahalaxmi kolhapur maharashtra आई श्री अंबाबाई देवीची आजची अलंकार दर्शन पुजा महालक्ष्मी कोल्हापुर महाराष्ट्र आई श्री अंबाबाई देवीची आजची अलंकार दर्शन पुजा
नामाचा अभ्यास एका दृष्टीने सोपा खरा, पण दुसऱ्या दृष्टीने सोपा नाही. केवळ अखंड नामस्मरणाने माणूस अखेरपर्यंत पोचू शकतो. असे अखंड नाम घेण्यास सर्व सोडून त्यासच वाहून घ्यावे लागते. ते ज्याला शक्य नसते त्यानें नामास [एक] योगाची [दोन] ज्ञानाची [तीन] प्रेमाची किंवा [चार] शरणागतीची जोड द्यावी. मला शरणागतीची जोड अधिक उपयोगी पडली. शरणागतीची भावना जागृत ठेऊन जर नामाच्या नादी लागले तर जाता येता, उठता बसता, खाता पिता नाम धारण करण्यास अडचण पडत नाही. ती भावना सहज जागी रहात नाही किंवा जागी राहिली तरी तिची तीव्रता सारखी रहात नाही. *यासाठी सतत प्रार्थनेची वृत्ती बाळगावी लागते.* ती वृत्ती माझी टिकत नाही. ती टिकावी म्हणून मी पुन: पुन: प्रार्थनाच करतो. आपण धडपडणारे जीव [स्ट्रगलिंग सोल] आहोत. धडपडणे हे मीपणाचे लक्षण आहे. शरणागतीने तो मीपणा नाहीसा होऊन जे नाम चालते, ते खरे नाम होय. *तसे नाम चालण्यास त्याच्या कृपेचा ओघ आपल्याकडे वळवण्यात मधें येणारी मीपणाची धोंड उचलून टाकण्याचा अहोरात्र प्रयत्न करायला हवा.* दोष माझ्याकडेच आहे, श्रीमहाराजांकडे नाही. जेथे जेथे मीपणाला खतपाणी मिळते तेथून आपण संपूर्ण निवृत्त होणे आवश्यक असते. त्याची खटपट मी करतो. पूर्ण यश येणे कठीण आहे.

---------- *केशव वि. बेलसरे*

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संदर्भ: *ता. १४मे,१९८१ रोजी प्रा के वि बेलसरे यांनी गोंदवल्याहून श्री. तात्यासाहेब केळकर, सांगली [गो.सी.गोखल्यांचे सासरे] यांना लिहिलेल्या पत्रातून.*
संकलन: श्रीप्रसाद वामन महाजन

27/04/2024

#श्री_बिजासन_महारानी जी #इंद्रगढ़ वाली के आज के शुभ दर्शन जय #माता_रानी जी की 🙏🙏🚩🚩

17/04/2024

_*🙏🏻🙏🏻🌸आज के प्रातः कालीन श्रृंगार दर्शन शक्तिपीठ चिंतपूर्णी माता जी के देवभूमि हिमांचल प्रदेश से🌸🙏🏻🙏🏻*_

Address

6R7C+JG8 Naya Khera
Kota
324008

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Monday 7am - 8:30pm
Tuesday 7am - 8:30pm
Wednesday 7am - 8:30pm
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