24/08/2026
24.8.2026
प्रत्येक व्यक्ति का सोचने का ढंग अलग होता है। और अपने ढंग से ही वह हर वस्तु या मनुष्य के संबंध में अपना निर्णय लेता है। जैसा वह सोचता और जैसा निर्णय लेता है, वैसा ही वह बोलता रहता है। "परंतु यह आवश्यक नहीं है, कि वह जो भी सोचता, निर्णय लेता और जो कुछ बोलता है, वह सत्य ही हो। प्रमाणों से सिद्ध ही हो।"
"आपके विषय में भी यदि कोई व्यक्ति कुछ सोचता है या बोलता है, तो आप उसकी बात एक बार तो ध्यान से सुनें। फिर उस पर निष्पक्ष भाव से विचार करें। यदि उसकी बात प्रमाणों से सिद्ध है, सत्य है, तब तो उस पर ध्यान देना चाहिए। यदि उसकी बात प्रमाणों से सिद्ध नहीं है, सत्य नहीं है, व्यर्थ झूठी बात है। तो ऐसी झूठी बात पर ध्यान न दें। ऐसी बेकार की झूठी बातों पर ध्यान देने से आपकी मानसिक और बौद्धिक स्थिति बिगड़ सकती है।"
"संसार के लोग प्रायः प्रमाणों से विचार करके बात नहीं कहते। जो भी इधर-उधर से सुनने को मिले अथवा जो भी मन में आये, सो ही बोल देते हैं।" "यदि आप ऐसी व्यर्थ की झूठी बातों पर ज्यादा ध्यान देंगे, और चिंता करेंगे, तो आपको हानि होगी। और हो सकता है, धीरे-धीरे आप डिप्रेशन में भी चले जाएं।"
"इसलिए बुद्धिमत्ता से काम लेना चाहिए। बहुत सोच समझ कर ही दूसरों की बात पर ध्यान देवें। तभी आप जीवन में प्रसन्न रह सकते हैं, अन्यथा नहीं।"
---- "स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."