"Jamaat-E-Mustafa Raza" Is A Non-Political Organisation And Movement. This Movement Founded By A True Lover Of Prophet MUHAMMAD MUSTAFA Sallallahu Alaihi Wasallam, Mujadid Imam Ahmed Raza Khan Qadri Fajile Bareilvi Radi Allahu Anhu, On 7th Rabi' al-Akhir In 1339 Hijri (17th December 1920 A D)
"Jamaat-E-Raza Mustafa- Branch Central Avenue,Kolkata",Is One of The Branch of "Jamat Raza-E-Mustafa, Bar
eilly Sharif". The Branch Is Situated In The Kolkata City. "जमात रजा-ए-मुस्तफा- शाखा सेंट्रल एवेन्यू" ”जमात रजा-ए-मुस्तफा” का एक शाखा है जो शहर कोलकाता में है
”जमात रजा-ए-मुस्तफा” एक गैर सियासी आलमी तन्जिम व तहरीक है, इस तंन्जिमको मुज्जदीदे जमाना, एक सच्चे आशीके रसूल इमाम अहमद रज़ा खान फाज़ीले बरेलवी रदी अल्लाहो अन्हु ने 7 रब्बीउल आखीर 1339 हीजरी, मुताबीक-17 डिसंबर सन-1920, मे कायम किया है, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान फाज़ीले बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह की वह दुरबीनी थी जो आजसे ठीक 93 साल पहले इसे कायम फरमाकर हमे शरीयत के दायरेमे रहकर खुश अकीदा मुसलमानोकी रहनुमायी के लिए दुनीयाकी एक बेहतरीन तंन्जीमसे हमे नवाज़ा है, इस तंन्जीम ने मस्जिद व मदरसे के बाहर के मामलात को लोगोके बिच जाकर ऐसे-ऐसे अनगीनत तारीख साज दीनी व दुनीयावी कारनामोको अंजाम दिया है के जिसे तारीख कभी-भी फरामोश नही कर सकती ।”जमात रजा-ए-मुस्तफा” सफ-ए-अव्वल एक ऐसी वाहीद गैर सियासी तंन्जीम है जिसने शुरुसे लेकर अबतक वही काम किया है जिसे दीन व शरीयत ने इज़ाजत दी है, आला हजरत व मुफ़्ति-ए-आज़म हिंद के सरपरस्ती मे वक्त के बडे-बडे ओल्मा-ए-अहेलेसुन्नतने तंज़ीम के जरीये तबलीग-ए-दीन की इशाअत ब फला बहबुदी के लिए काम किया जिनमे खुसुसी सफे फेहरीस्त हुजुर सदरुश्शरीया हज़रत अमजद अली साहब, शेर बेशा-ए-अहेले सुन्नत हश्मत अली साहब, हुजुर मुहद्दीसे आज़म, मौलाना हिदायत यार खान रज़वी, सय्यद ज़मीरुल हसन् अल जिलानी, बुरहाने मिल्लत मुफ़्ति बुरहानुल हक्क जबलपुरी, मौलाना अबुल वफा फसीही, मौलाना मुहम्मद मदनी मिया किछौछवी, मुफ़्ति रफाकत हुसेन साहब साहब, सय्यद हिमायत रसुल रज़वी शामील रहे, इन 93 सालोमे तंजीम ने कई चढाव व उतार देखे, कभी इसके काम करनेकी रफ़्तार बहोत जियादा तेज रही तो कभी यह वक्ति तौर पर धीमी पड गयी मगर इसका काम करने का तरीकार कभी-भी दीन व शरीयत के खीलाफ ना रहा, मगर आज कुछ तंजीमे आला हज़रत का नाम लेकर अव्वामे अहेले सुन्नत को धोका दे रही है, यही लोग दुनीया की पैरवी करते हुए शरीयत के खीलाफ जाक र नफ्स की पैरवी करते हुए एक-एक हराम चिजोको जायज़ करार देकर आज़ाद खयाल लोगोको लिए हराम कामोकी सहुलते फराहम करनेमे लगे हुए है तो कोई सुन्नी बनकर लोगोके इमान पर डाका डाल रहा है तो बदमजहब इन जैसे लोगोके करतुत दिखा-दिखाकर सहीउल अकीदा सुन्नी लोगोके इमान पर डाका दाल रहे है, आला हज़रत ने पुरी ज़िदगी दीनकी खीदमात करते हुए बातील व बदमज़हब फिरकोका रद्द करकर सहीउल अकीदा सुन्नीयोके इमान की हिफ़ाज़त की है मगर आज नई-नई तंजीमे लोगोका इमान बचानेके बजाय उन्हे आमाल की दावते दे रहे जबकी की इमान के बगैर आमाल जाया है, जैसे-जैसे वक्त बदलता रहा उसी तरह लोगोकी जरुरते भी बदलती रही, लोग सहुलते तलाशने लगे वह लोग इस तंजीम के जरीए काम करने के बजाए मस्लके आला हज़रत का नारा लगाकर, आला हज़रत की मोहब्बत का दम भरकर, सुन्नीयत को बचानेके लिए नई-नई शख्सीयत पसंद तंजीमे खोल दी है, आला हजरत का नाम व जदीद मसाईल का सहारा लेकर इन लोगोने जब खुब धन-दौलत बनाई तो अपने मतलब के तहत तालीम्-ए-आलाहजरत को दरकीनार कर दिया जिससे सहीउल अकीदा मुसलमानोके इमान व अकीदेमे गडबडी पैदा होने लगी है इसी कमीको पुरा करनेके लिए जमात रजा-ए-मुस्तफा ने इसी तरहके मगर जायज़ जदीद मसाईल के जरीये इन तंजीमो व बदमजहबोका परदा फाहश करनेके लिए जदीद मसाईल के जरीयोको अपनाना शुरु कर दीया है इसकी इब्तेदा इस वेब साईट के जरीए अमल लाई गयी है लेहाजा आप सभी हज़रातसे अपील व गुजारीश है के आप ”जमात रजा-ए-मुस्तफा” का ताउन करकर इस तंजीम की शाख अपने इलाके मे शुरु करदे और तंजीमके के प्लॅटफार्म के जरीए अपने-अपने इलाको मे दीन की तबलीग व इशाअत का काम करे ।