Astrologer Guru ji

Astrologer Guru ji Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Astrologer Guru ji, Religious organisation, KOLKATA.

19/03/2022
*जन्मपत्री --पति की प्रेमिका 🌹क्या कहती है आप की कुंडली  ....?*          स्त्री जन्मपत्री का " एकादश भाव " पति की प्रेमि...
30/08/2020

*जन्मपत्री --पति की प्रेमिका 🌹क्या कहती है आप की कुंडली ....?*

स्त्री जन्मपत्री का " एकादश भाव " पति की प्रेमिकाओ का होता है। वही अंक ज्योतिष विद्या भी इस ka वर्णन करती है। जन्मांक में सप्तम अंक की युति बता ही देती है।सप्तम भाव का लाभ भाव से राशि परिवर्तन अथवा परस्पर दृस्टिया हो तो महिला के पति की प्रेमिकाए अवश्य होंगी।
प्रेमिका भाव का कारक ग्रह या करक भाव कितना बलवान है उतनी ही बलशाली प्रेमिका होती है।यदि वह सौम्य ग्रह विद्धमान होने पर प्रेमिकाए बहुत सूंदर होगी ! राहु ग्रह केतु ग्रह का अधिपत्य " एकादश भाव " पर होने का परिणाम आपके पति की प्रेमिकाए सांवली और अति साहसी बिना परिणाम के चिंता किये प्रेम करने जीवन दांव पर लगा प्रेम , लकिन "लाभेश भाव " में शुक्र ग्रह या पूर्ण बलवान चन्द्र ग्रह हो उनपर कोई पाप ग्रहो की युति न हो साथ ही ेउच्च नवमांश मे हो तो पति की प्रेमिका - अतिधनवान अतिरुपवान ही होगी
उम्र के किस पड़ाव में स्त्री को अपने पति की प्रेमिकाओ से मुक्ति मिलेगी यह ग्रह विशेष की अवस्था और सम्पूर्ण जन्मपत्री का अवलोकन कर के ही एक योग्य एस्ट्रोलॉजर समाधान कर सकता है।
वर्तमान समय में इस से मुक्ति के बहुत सारे उपाय संभव
है। वैदिक ज्योतिष अनुसार लाल - किताब समाधान , काली -किताब उपाय , यन्त्र मंत्र तंत्र , मैली विद्या , शमशान विद्या

" आप सुखी रहे धनधान्य आरोग्य पाये मेरी कामना “
⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️
" पराविज्ञान " श्रद्धा का विषय है.
ज्योतिष शास्त्र हमारा गौरव है।
मनोरंजन नहीं ...?
🌹 *हम भाग्य के ज्ञाता है*
*भाग्य विधाता नही*🌹
☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️
*ऑनलाइन और अपॉइंटमेंट के लिए कॉल करे*
+91-9314733395
☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️
✍🏻...🙏
ज्योतिषाचार्य

पितृ पक्ष में भूलकर भी न करें ये काम हिन्दू पंचांग के मुताबिक इस साल का पितृ पक्ष 01 सितम्बर से शुरू होकर 17 सितम्बर 202...
30/08/2020

पितृ पक्ष में भूलकर भी न करें ये काम

हिन्दू पंचांग के मुताबिक इस साल का पितृ पक्ष 01 सितम्बर से शुरू होकर 17 सितम्बर 2020 तक चलेगा. यानी कि इस साल पितृ पक्ष की कुल अवधि 17 दिनों की होगी. हिन्दू पंचांग के मुताबिक यह पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है जिसमें पितृ तर्पण किया जाता है. हिन्दू धर्म के मुताबिक जो भी व्यक्ति पितृ पक्ष के इन दिनों में अपने पूर्वजों का तर्पण करता है. उस व्यक्ति को उसके पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जिसके फलस्वरूप व्यक्ति के जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं.

अंत्येष्टि संस्कार को व्यक्ति के जीवन चक्र का अंतिम संस्कार माना जाता है. लेकिन अंत्येष्टि के पश्चात भी कुछ ऐसे कर्म होते हैं जिन्हें मृतक के संबंधी मिलकर निभाते हैं जिसमें पुत्र या संतान की प्रमुख भूमिका होती है. अंत्येष्टि के पश्चात आता है श्राद्ध. ये संस्कार संतान का मुख्य कर्त्तव्य माना जाता है और कहा जाता है कि श्राद्ध संस्कार को बखूबी निभाने से पितर अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं क्योंकि इससे उनके मुक्ति का द्वार खुल जाता है.

कब होता है श्राद्ध कर्म
वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को श्राद्ध कर्म किया जा सकता है. लेकिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक के पूरे समय में विधि पूर्वक श्राद्ध कर्म करने का विधान है. इस पूरे पक्ष को पितृ पक्ष भी कहा जाता है. आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या 15 दिन का समय पितृ पक्ष के नाम से विख्यात है. इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों या पूर्वजों को जल तर्पण करते हैं और उनकी मृत्यु की तिथि के अनुसार उनका श्राद्ध करते हैं.
क्या है पितृ श्राद्ध.

माता, पिता या किसी अन्य परिवारीजन की मृत्योपरांत उनकी तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले कर्म को पितृ श्राद्ध कहते हैं. मान्यता यह है कि पितृ पक्ष के 15 दिनों में पितर जो इस दुनिया में मौजूद नहीं हैं वो जन कल्याण के लिए धरती में विराजमान होते हैं और हम उन्हें अर्पित भोजन और जल का भोग लगाते हैं. ऐसे में पितरों को प्रसन्न करना जरूरी होता है क्योंकि उन्हीं के आशीर्वाद से उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है. लेकिन कई बार जाने-अनजाने में हमसे कुछ ऐसी गलतियां भी हो जाती हैं जिनसे पितर नाराज हो जाते हैं. यदि आप भी पितरों को प्रसन्न करना चाहते हैं तो आपको भूलकर भी ये गलतियां नहीं करनी चाहिए.

पितृ पक्ष में न करें ये गलतियां
अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए और पितृ पक्ष के इन 15 दिनों में भूल कर भी ये गलतियां नहीं करनी चाहिए.

नया सामान न खरीदें
पितृ पक्ष में कोई भी नया सामान नहीं खरीदना चाहिए. ऐसा माना जाता है ये समय अपने पूर्वजों को याद करने का होता है इसलिए ये समय उनकी यादों में शोक दिखाने के लिए होता है. ऐसे में नई वस्तुओं की खरीदारी पितरों को नाराज कर सकती है.

बाल न कटवाएं
जो लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण करते हों उन्हें पितृ पक्ष में 15 दिन तक अपने बाल नहीं कटवाने चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से पूर्वज नाराज हो सकते हैं.

भिखारी को भिक्षा देने से इनकार
आमतौर पर मान्यता है कि अतिथि देव स्वरूप होता है लेकिन मुख्य रूप से पितृ पक्ष में किसी भी भिखारी को भीख देने से इनकार नहीं करना चाहिए. क्योंकि हो सकता है कि भिखारी के रूप में आपके पूर्वज हों और भिक्षा देने से इनकार करना उनका अपमान करना हो सकता है. इन दिनों किया गया दान पूर्वजों को तृप्ति देता है.

लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल है वर्जित
पितृ पक्ष के दौरान पीतल, फूल या तांबे के बर्तनों में ही पितरों को जल दिया जाता है. इसलिए हमेशा तर्पण के लिए इन्हीं बर्तनों का इस्तेमाल करें. पितरों की पूजा के लिए लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल पूरी तरह से वर्जित माना जाता है. ऐसा करने से पितर रुष्ट हो जाते हैं.

किसी दूसरे के घर में भोजन से बचें
मान्यतानुसार जो लोग पितरों को तर्पण करते हैं उन्हें पितृ पक्ष के 15 दिनों तक किसी और के घर में भोजन नहीं करना चाहिए. किसी और का अन्न ग्रहण करने से भी पितर नाराज हो सकते हैं. पितरों को प्रसन्न करने के लिए सबसे अच्छा समय पितृ पक्ष ही होता है इसलिए उपर्युक्त बातों का ध्यान रखकर पितरों का पूजन करना सभी के लिए लाभप्रद हो सकता है.

सभी को नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं
25/07/2020

सभी को नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं

19/05/2020

जय श्री राम कमेंट में
लाइक कीजिए

Address

Kolkata

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Astrologer Guru ji posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share