28/01/2015
💲@ 〽: मत पूछिये मुसलमान का हाल..
मस्ज़िदों के लिए सर कटाने को तैयार है..
मगर मस्ज़िद में सर झुकाने को तैयार नहीं।
कहते है कुछ लोग मेरे रग-रग में है नबी नबी
लेकिन पढ़ते है नमाज हफ्ते में कभी-कभी
नबी का नाम सुनते ही झूम जाते है
नबी का हुक्म सुनते ही घूम जाते है!
〽: ना शिया और न सुन्नी की
तक़सीम से मतलब होता है !
हम लोगों के क़ातिल को
केवल मीम से मतलब होता है !!
हम कभी बरेलवी में उलझे
हम कभी वहाबी में उलझे,
हम एक नबी की उम्मत थे
ये कैसी खराबी में उलझे !!
२४ नंबर २६ नंबर के झगड़ों को
घर पर रखिये ,
ईमान की जो दस्तार है
ये इसको अपने सर पर रखिये !!
जो क़ौम के ठेकेदार हैं
मैं उनसे भी गुज़ारिश करता हूँ ,
अब आप भी अपने लब खोलें
बस इतनी सिफारिश करता हूँ !!
ना शहद से मतलब है मुझको
ना नीम से मतलब होता है,
हम लोगों के क़ातिल को
केवल मीम से मतलब होता है !!
गैरों से भी ज़यादा हम सबको
अपने भाई से नफरत है,
एक साथ नमाज़ भी पढ़ ना सकें
अल्लाह ये कैसी इबादत है !
मसलक कि लड़ाई में यारों
मज़हब का तमाशा मत करिये,
जो छोड़ के आक़ा चले गए
उस सब का तमाशा मत करिये !!
मस्जिद के मज़ारों के झगडे
गर बाज़ारों में लाओगे ,
गुजरात मुज़फ्फरनगर है क्या
हर शहर में मारे जाओगे !!
उनको तो हमारे मिटने कि
स्कीम से मतलब होता है !!
हम लोगों के क़ातिल को
केवल मीम से मतलब होता है !
आप तमाम मुस्लिम भाइयों से गुज़ारिश है ।।आप जब भी अपने हाथ दुआ के लिए उठाए मुस्लिमों के हक़ में दुआ करें।।।।
आप जितने भी मुस्लिम ग्रुप से जुड़े है उसमे भी इस गुज़ारिश को फॉरवर्ड करदें।।