22/04/2026
.......यह मानसिक हालत उस क़ौम के अंदर पैदा हो जाती है, जो अपने अक़ीदे और इतिहास की बुनियाद पर अपने आप को *दूसरों से ऊँचा और बेहतर* समझने लगे,
जिसके यहाँ इ'तिक़ादी (यक़ीन के) तौर पर "ख़ैरुल-मिल्लल" *(सबसे बेहतरीन क़ौम) और अफ़ज़लुल-उम्मम (सबसे अच्छी उम्मत) का तसव्वुर (विचार)* पाया जाता हो।
इसी के साथ वह *अपनी गुज़री हुई तारीख़ (इतिहास) की बुनियाद पर बीती हुई शान-व-शौकत (past glory) की यादों में जीने वाली हो।*
जो क़ौम इस सोच (साइकोलॉजी) में गिरफ़्तार हो, उसके अंदर *फ़र्ज़ी फ़ख़्र (झूठा गर्व) का ज़ेहन* बन जाता है।
और यही फ़र्ज़ी फ़ख़्र है जिसकी वजह से............
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यह मानसिक हालत उस क़ौम के अंदर पैदा हो जाती है, जो अपने अक़ीदे और इतिहास की बुनियाद पर अपने आप को दूसरों से ऊँचा और बेहत...