Dhirendra Joshi

Dhirendra Joshi कन्धों से ऊंची छाती नहीं होती और धर्म से बड़ी कोई जाति नहीं होती केवल हिन्दू ही जुड़े जय श्री राम 🚩📿❣️🕉️🔱🙏💯

30/03/2026

Jai shree Ram 🚩🙏📿.......

With Taranisen Barik – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
26/08/2024

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एक ऐसा मंदिर जहां स्थापित है 5000 हजार साल पुराना शिवलिंगसावन का महिना भगवान शिव का महिना माना जाता है। इस महीने के सभी ...
12/08/2024

एक ऐसा मंदिर जहां स्थापित है 5000 हजार साल पुराना शिवलिंग

सावन का महिना भगवान शिव का महिना माना जाता है। इस महीने के सभी सोमवार भक्तों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। इसी महीने में भक्त दूर दूर से भगवान शिव के मंदिरों के दर्शन करने के लिए आते हैं। वहीं सभी अपने अपने पसंदीदा नाम से भगवान शिव के नाम का जयकारा लगाते हुए उनके दर्शन के लिए जाते हैं। वहीं आज आपको हम भगवान शिव के 5000 हजार साल पुराने शिवलिंग के दर्शन कराएंगे। इस शिवलिंग को लेकर बहुत सारी कहानियां हैं, वहीं इसके इतने पुराने इतिहास के कारण इसे भगवान महादेव का एक धार्मिक स्थल माना जाता है। जहां की यह मान्यता है की कोई भी सचे मन से अगर कुछ मांगे तो भगवान शिव उसकी झोली भर देते हैं।
भगवान शिव का यह सबसे पुराना शिवलिंग गुजरात के मोसाद के पास एक मंदिर में है। बतादें की यह अनोखा शिवलिंग सन 1940 में एक खुदाई के दौरान मिला था। वहीं जब इसकी जांच की गयी तब यह बात सामने आई की यह शिवलिंग हजारों साल पुराना है। वहीँ इस शिवलिंग के साथ साथ इस खुदाई में और भी बहुत सी चीजे मिली थी। बतादें की भगवान शिव के इस मंदिर को जलेश्वर महादेव का मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर पूर्वा नदी के तट पर है, जहां भगवान के दर्शन के लिए लोग दूर दूर से आते हैं।

Har Har Mahadev 🙏🕉️🚩❣️.......

बांग्लादेश से लेकर भारत, अमेरिका और स्वीडन तक....हिंसा के खिलाफ हिंदू आने लगे साथBangladesh Violence on Minority : बांग्...
11/08/2024

बांग्लादेश से लेकर भारत, अमेरिका और स्वीडन तक....हिंसा के खिलाफ हिंदू आने लगे साथ

Bangladesh Violence on Minority : बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा को लेकर दुनिया भर में गुस्सा बढ़ता जा रहा है. शनिवार को हिंदुओं ने दुनिया को इस हिंसा के खिलाफ खड़े होने का संदेश दिया...

Bangladesh violence against Hindu : बांग्लादेश में तख्तापलट के साथ फैली हिंसा, अराजकता और अशांति के बीच शनिवार को हिंदुओं ने बांग्लादेश से लेकर भारत, अमेरिका, स्वीडेन तक विरोध प्रदर्शन किए. वहीं अमेरिका के दो हिंदू सांसदों ने तो मामले की जांच तक की मांग कर दी है. शनिवार को बांग्लादेश के मध्य में चिट्टागोंग में हिंदू एकत्र हुए और उन्होंने हमले व हिंसा के खिलाफ एक विशाल विरोध रैली निकाली और सुरक्षा और समान अधिकारों की मांग की

सात लाख से अधिक पहुंचे
चिट्टागोंग के ऐतिहासिक चेरगी पहाड़ चौराहे पर आयोजित विशाल विरोध रैली को लेकर अनुमान लगाया जा रहा है कि इसमें सात लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया और इसमें लोगों ने हिंदुओं के खिलाफ चल रही हिंसा का विरोध किया. माना जाता है कि पिछले कुछ दिनों में कट्टरपंथियों ने हिंदुओं के घरों, व्यवसायों और यहां तक कि मंदिरों पर हमला किया है, जिसमें सैकड़ों हिंदू घायल हो गए हैं

लगातार जारी है हिंसा
लगातार जारी हिंसा देश में अंतरिम सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है, यहां मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गुरुवार को अंतरिम सरकार का शपथ भी हो गया है, लेकिन हालात अभी भी बद-से-बदतर बने हुए हैं. शुक्रवार को, बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई ओइक्या परिषद ने यूनुस को एक 'खुला पत्र' भेजा, जिसमें अल्पसंख्यकों के खिलाफ एक विशेष समूह के द्वारा की जा रही " हिंसा" पर "गहरा दुख और चिंता" व्यक्त की

जागो हिन्दुओं जागो और एकता दिखाओ जय श्री राम 🚩🙏😔😒

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06/08/2024

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चेतक को 'ग्रुलो' रंग का स्टालियन (नीला रंग, काठियावाड़ी नस्लों में पाया जाने वाला एक आदिम रंग) या ग्रे रंग (स्थानीय भाषा...
04/08/2024

चेतक को 'ग्रुलो' रंग का स्टालियन (नीला रंग, काठियावाड़ी नस्लों में पाया जाने वाला एक आदिम रंग) या ग्रे रंग (स्थानीय भाषा में 'रोजो') का माना जाता है, इसलिए "हो नीला घोड़ा रा अस्वार" अथवा "ओ नीले घोड़े के सवार" से ऐतिहासिक साहित्य में प्रताप को संबोधित किया गया है।

हल्दी घाटी-(१५७६) के युद्ध में चेतक ने अपनी अद्वितीय स्वामिभक्ति, बुद्धिमत्ता एवं वीरता का परिचय दिया था। युद्ध में चेतक को हाथी का मुखौटा लगाया जाता था ताकि शत्रुसेना के हाथियों को भयभीत किया जा सके। युद्ध में चेतक ने मुगलों के सेनापति मानसिंह के हाथी पर पैर रख दिए और महाराणा प्रताप ने मानसिंह पर सीधा भाले से वार किया हालांकि चेतक का एक पैर मानसिंह के हाथी की सूंड में बंधी तलवार से कट गया। तीन पैर और खून से लतपथ होने के बावजूद भी चेतक महाराणा प्रताप को सुरक्षित रणभूमि से निकाल लाने में सफल रहा। उस क्रम में चेतक ने 25 फिट नाले को छलांग लगाकर पार किया, लेकिन बुरी तरह घायल हो जाने के कारण अन्ततः वीरगति को प्राप्त हुआ। आज भी राजसमंद के हल्दी घाटी गांव में चेतक की समाधि बनी हुई है, जहाँ स्वयं प्रताप और उनके भाई शक्तिसिंह ने अपने हाथों से इस अश्व का दाह-संस्कार किया था।इस बात से स्पष्ट होता है की महाराणा प्रताप के घोड़े की कहानी किसी वीर योद्धा से कम नहीं था। चेतक की स्वामिभक्ति पर बने कुछ लोकगीत मेवाड़ में आज भी गाये जाते हैं।[4] हिंदी कवि श्याम नारायण पाण्डेय द्वारा रचित प्रसिद्ध महाकाव्य हल्दी घाटी में चेतक के पराक्रम एवं उसकी स्वामिभक्ति की मार्मिक कथा वर्णित हुई है।

Haldighati ke Veer pratapi Maharana Pratap Singh Ji ko शत-शत Naman Har Har Mahadev 🙏🚩📿🔱🕉️💯.............

शुरुआत में पृथ्वीराज ने कई पड़ोसी हिन्दू राज्यों के खिलाफ़ सैन्य सफलता हासिल की। विशेष रूप से वह चन्देल राजा परमर्दिदेव ...
03/08/2024

शुरुआत में पृथ्वीराज ने कई पड़ोसी हिन्दू राज्यों के खिलाफ़ सैन्य सफलता हासिल की। विशेष रूप से वह चन्देल राजा परमर्दिदेव के ख़िलाफ़ सफल रहे थे। उन्होंने ग़ौरी राजवंश के शासक मोहम्मद ग़ौरी के प्रारम्भिक आक्रमण को भी रोका। हालाँकि, 1192 में तराइन की दूसरी लड़ाई में ग़ौरी ने पृथ्वीराज को हराया और कुछ ही समय बाद उन्हें मार डाला। तराइन में उनकी हार को भारत की इस्लामी विजय में एक ऐतिहासिक घटना के रूप में देखा जाता है और कई अर्ध-पौराणिक लेखनों में इसका वर्णन किया गया है। इनमें सबसे लोकप्रिय पृथ्वीराज रासो है, जो उन्हें "राजपूत" राजा के रूप में प्रस्तुत करता है।[2]

Jai shree bhavani 🙏📿🚩🔱🕉️💯.......

अभिमन्यु अर्जुन के पुत्र थे। 15 वर्ष की आयु में फाल्गुन मास में उनका विवाह उत्तरा से हुआ था । 16 वर्ष की आयु में आषाढ़ म...
01/08/2024

अभिमन्यु अर्जुन के पुत्र थे। 15 वर्ष की आयु में फाल्गुन मास में उनका विवाह उत्तरा से हुआ था । 16 वर्ष की आयु में आषाढ़ मास में जिस दिन ये महाभारत के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे उससे एक दिन पूर्व हीं अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने गर्भधारण किया था । द्वापर युग में सबसे कम उम्र में स्त्री के शारीरिक सुख और संतान जन्म की प्राप्ति करने वाले वे इकलौते थे।

अभिमन्यु महाभारत के नायक अर्जुन और सुभद्रा, जो बलराम व कृष्ण की बहन थीं, के पुत्र थे। उन्हें चंद्र देवता का पुत्र भी माना जाता है। धारणा है कि समस्त देवताओ ने अपने पुत्रों को अवतार के रूप में धरती पर भेजा था परंतु चंद्रदेव ने कहा कि वे अपने पुत्र का वियोग सहन नहीं कर सकते अतः उनके पुत्र को मानव योनि में मात्र सोलह वर्ष की आयु दी जाए।

अभिमन्यु का बाल्यकाल अपनी ननिहाल द्वारका में ही बीता। उनका विवाह महाराज विराट की पुत्री उत्तरा और बलराम की पुत्री वत्सला से हुआ। अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित, जिसका जन्म अभिमन्यु के मृत्योपरांत हुआ, कुरुवंश के एकमात्र जीवित सदस्य पुरुष थे जिन्होंने युद्ध की समाप्ति के पश्चात पांडव वंश को आगे बढ़ाया।

अभिमन्यु एक असाधारण योद्धा थे। उन्होंने कौरव पक्ष की व्यूह रचना, जिसे चक्रव्यूह कहा जाता था, के सात में से छह द्वार भेद दिए थे। कथानुसार अभिमन्यु ने अपनी माता की कोख में रहते ही अर्जुन के मुख से चक्रव्यूह भेदन का रहस्य जान लिया था। पर सुभद्रा के बीच में ही निद्रामग्न होने से वे व्यूह से बाहर आने की विधि नहीं सुन पाये थे। अभिमन्यु की मृत्यु का कारण जयद्रथ था जिसने अन्य पांडवों को व्यूह में प्रवेश करने से रोक दिया था। संभवतः इसी का लाभ उठा कर व्यूह के अंतिम चरण में कौरव पक्ष के सभी महारथी युद्ध के मानदंडों को भुलाकर उस बालक पर टूट पड़े, क्योंकि कोई भी कौरव पक्ष का योद्धा द्वंद युद्ध में अभिमन्यु को पराजित नहीं कर सके थे । भगवान बलराम जी के रौद्र धनुष के सामने कोई भी योद्धा चाहे वो कर्ण,द्रोणाचार्य,कृपाचार्य,अश्वथामा या दुर्योधन कोई भी अभिमन्यु के सामने टिक नहीं सके थे । अभिमन्यु को चक्रव्यूह के भीतर द्वंद युद्ध में पराजित करना असंभव था। जिस कारण कर्ण ने छल पूर्वक अपने विजय धनुष से पीछे से वार करके रौद्र धनुष को काट डाला । क्रोधित अभिमन्यु कुछ समझ पाते उतने में ही उनके रथ को द्रोणाचार्य ने प्रहार किया । देखते ही देखते अवसर पा कर सभी योद्धा अभिमन्यु पर टूट पड़े । दुर्योधन पुत्र लक्ष्मण को यमलोक पहुँचाकर अभिमन्यु दुर्योधन के सामने वंश विनाशक के रूप में घृणित हो चुके थे । क्योंकि दुर्योधन के बाद राजा के रूप में लक्ष्मण ही राज्य करते । ऐसी स्थिति में सभी कौरव महारथी के क्रोध, छल और अधर्म का सामना अभिमन्यु को करना पड़ा । जिस कारण उसने वीरगति प्राप्त की। परंतु फिर भी अभिमन्यु ने अंत तक धर्म का त्याग नहीं किया । मामा श्री कृष्ण का एक नाम रणछोड़ भी है परंतु अभिमन्यु की शिक्षा में उनके बड़े मामा श्री बलराम की शिक्षा अधिक दिखाई प्रतीत होती है । कर्ण ने अंतिम क्षणों में अभिमन्यु को ही सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर मान लिया था । वे बहुत अधिक लज्जित थे । अभिमन्यु की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिये अर्जुन ने जयद्रथ के वध की शपथ ली थी।

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