Sarna Dharam Soto: Samiti / सरना धर्म सोतोः समिति

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Sarna Dharam Soto: Samiti / सरना धर्म सोतोः समिति सरना धर्म सोतोः समिति एक धार्मिक एवं सामाजिक संगठन है. सरना धर्म सोतोः समिति एक धार्मिक तथा सामाजिक संगठन है.

सिङबोंगा की स्तुति से बढ़ता है भक्ति, श्रद्धा, प्रेम व भाईचारा: धर्मगुरु सोमा कंडीर अड़की के बिरबंकी में रविवार को सरना ...
04/12/2022

सिङबोंगा की स्तुति से बढ़ता है भक्ति, श्रद्धा, प्रेम व भाईचारा: धर्मगुरु सोमा कंडीर

अड़की के बिरबंकी में रविवार को सरना धर्म सोतो: समिति का शाखा स्थापना दिवस सह सरना धर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई. धीरजु मुंडा, बुधराम मुंडा, सोमा मुंडा, जावरा मुंडा व प्रदीप समद की अगुवाई में अनुयायियों के साथ सरना स्थल में भगवान सिङबोंगा की पूजा-पाठ कर सुख, शांति और खुशहाली की कामना की.

इस अवसर पर धर्मगुरु सोमा कंडीर ने अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहा कि सिङबोंगा की स्तुति से हमारी आत्मा में भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है तथा समाज में प्रेम व भाईचारा की भावना पनपती है. इससे लोभ, लालच व अहंकार जैसे बुराईयां दूर होती है और जीवन में सुख, शांति और खुशहाली आती है.

उन्होंने आगे कहा कि भगवान के सामने सब बराबर हैं जिससे सबको समान कृपा मिलती है. हमें इसके लिए सदा धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए और समाज में प्रेम व भाईचारा के साथ रहना चाहिए. सिङबोंगा की स्तुति के साथ-साथ मनुष्य, जीव-जंतु व सारी सृष्टि का सम्मान करना ही सरना धर्म का मूल सिद्धांत है.

इस अवसर पर राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के महासचिव रवि तिग्गा ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा ने अपने मूल धर्म को संगठित कर जिस समृद्ध समाज की कल्पना की, वह आज भी अधूरी है. उन्होंने न केवल धर्म-संस्कृति को बचाने के लिए संघर्ष किया बल्कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा आजीवन करते रहे. आज हम उसी धर्म-संस्कृति व जल-जंगल-जमीन की संरक्षण के लिए ही सरना धर्म कोड की मांग कर रहे हैं. अतः सरना कोड के लिए भगवान बिरसा मुंडा से संकल्प लेकर डटकर संघर्ष करना चाहिए.

इस कार्यक्रम में धर्मगुरु बगरय मुंडा, डाॅ सीताराम मुंडा, महादेव मुंडा, मथुरा कंडीर, धीत मुंडा, बाजीराम मुंडा, लुकिन मुंडा, रणसी पहान, बिरसा तोपनो आदि ने विचार व्यक्त किए. इसमें अड़की, तमाड़, बुंडू, खूंटी, मुरहू, बंदगांव इत्यादि जगहों के सरना धर्मावलंबी शामिल हुए.

स्थापना दिवस सह सरना धर्म प्रार्थना सभा -2022 दिनांक: 04/12/2022, दिन:- रविवार स्थान: सरना स्थल, बिरबांकी, अड़की, खूंटी,...
03/12/2022

स्थापना दिवस सह सरना धर्म प्रार्थना सभा -2022
दिनांक: 04/12/2022, दिन:- रविवार
स्थान: सरना स्थल, बिरबांकी, अड़की, खूंटी, झारखंड

अड़की के बिरबांकी में दिनांक 04.12.2022 दिन – रविवार को सरना धर्म सोतोः समिति के तत्वधान में शाखा स्थापना दिवस सह सरना धर्म प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही है जिसमें धर्मगुरु बंधन तिग्गा, डॉ करमा उरांव, धर्मगुरु सोमा कंडीर, धर्मगुरु बगरय मुंडा, धर्मगुरु भैयाराम ओड़ेया, धरती आबा बिरसा मुंडा के परपोता सुखराम मुंडा, मथुरा कंडीर, महादेव मुंडा, सुखराम पुर्ती, रवि तिग्गा, नारयण उरांव इत्यादि गणमाण्य सामाजिक अगुवाओं के साथ अड़की, खूंटी, मुरहू, बंदगांव, बुंडू, दलभंगा आदि जगहों के लोग शामिल होंगें.

प्रकृति पूजा पद्धति की ओर पुन: लौटने की जरूरत: धर्म गुरु बगरय ओड़ेया सरना धर्म सोतो: समिति शाखा खजूरदाग मनमानी का नौवां ...
30/05/2022

प्रकृति पूजा पद्धति की ओर पुन: लौटने की जरूरत: धर्म गुरु बगरय ओड़ेया

सरना धर्म सोतो: समिति शाखा खजूरदाग मनमानी का नौवां स्थापना दिवस सह सरना धर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई. जयपाल पहान, टेपइ कच्छप, लेदोवा पहान व मार्टिन हेम्बरोम की अगुवाई में सरना स्थल में सिङबोंगा की पूजा-पाठ कर सुख, शांति व समृद्धि की कामना की.

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धर्मगुरु बगरय मुंडा ने कहा कि सरना प्रकृति पर आधारित विश्व का सबसे पुराना धर्म है. प्रकृति पूजा विधि-विधान से ही पृथ्वी में संतुलन व खुशहाली है. हम जानते हैं कि जैसे-जैसे प्रकृति पूजा पद्धति घटी, वैसे-वैसे दुनिया में अशांति व दुख:-विपत्ति फैली. इस तरह अब हमें प्रकृति पूजा पद्धति को पुन: लौटने की जरूरत है. हमें किसी भ्रम व अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए और आगामी जनगणना में सरना धर्म दर्ज करें तथा अधिक से अधिक लोगों को सरना धर्म दर्ज करने की अपील करें.

प्रार्थना सभा में बिरसा तोपनो, जीतु पहान, लुतड़ु मुंडा, मथुरा कंडीर, सुभासिनी पुर्ती, सुशीला कंडुलना, बिरसा गुड़िया, सोमा मुंडा, मधु बारला, मसीह गुड़िया, चंबरु भेंगरा, कुंवर ओड़ेया, विश्राम, सुमित, जगदेव, रमन, लक्ष्मण आदि गणमान्य लोग शामिल हुए.

बिरसा मुंडा अमर रहे, सरना धर्म कोड देना होगाधरती अबा भगवान बिरसा मुंडा प्रति श्रद्धा व भक्ति देखकर मन गदगद हो जाता है. आ...
17/05/2022

बिरसा मुंडा अमर रहे, सरना धर्म कोड देना होगा

धरती अबा भगवान बिरसा मुंडा प्रति श्रद्धा व भक्ति देखकर मन गदगद हो जाता है. आज एक संयोग था कि बिरसा मुंडा के भक्त रांची रेलवे जाने के क्रम में मेरे कार्यालय के पास अचानक मुलाकात हुई. गुहीराम मुंडा, खड़िया बंदा, गुड़ाबंदा, बहरागोड़ा- 9304882549 से हैं तथा पवन सरदार उरांव व प्रकाश उरांव, चुनाखली, बसंती, सुंदरवन, साउद 24 परगना, पश्चिम बंगाल : 8637885761 से आए हैं. उन्होंने कहा कि वे एक सप्ताह से उलिहातु तथा बिरसा मुंडा से संबंधित जगहों पर घुम-घुम कर बिरसा मुंडा तथा सरना धर्म के बारे जानकारी लेकर वापस जा रहे हैं.

उन्होंने यह भी बताया कि बंगाल में खूब जोर-शोर से सरना धर्म का प्रचार प्रसार हो रहा है. सभी प्रकार का पूजा-पाठ अब सरना विधि-विधान से स्वयं पहानों के द्वारा संपन्न किया जा रहा है. अब पंडितों को हरगिज नहीं लाना है.

सरना धर्म प्रार्थना सभा, डौगड़ा - 2022सिङबोंगा की स्तुति से बढ़ता है भक्ति, श्रद्धा, प्रेम व भाईचारा: धर्मगुरु बंधन तिग्...
10/05/2022

सरना धर्म प्रार्थना सभा, डौगड़ा - 2022

सिङबोंगा की स्तुति से बढ़ता है भक्ति, श्रद्धा, प्रेम व भाईचारा: धर्मगुरु बंधन तिग्गा

सरना धर्म सोतो: समिति, केंद्र डौगड़ा की बारहवीं स्थापना दिवस के अवसर पर स्थापना दिवस सह सरना धर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई. इस अवसर पर धर्मगुरु सोमा कंडीर, धर्मगुरु बगरय मुंडा व धर्म गुरु भैयाराम ओड़ेया की अगुवाई में अनुयायियों के साथ सरना स्थल में भगवान सिङबोंगा की पूजा-पाठ कर सुख, शांति और खुशहाली की कामना की.

इस अवसर पर धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहा कि सिङबोंगा की स्तुति से हमारी आत्मा में भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है तथा समाज में प्रेम व भाईचारा की भावना पनपती है. इससे लोभ, लालच व अहंकार जैसे बुराईयां दूर होती है और जीवन में सुख, शांति और खुशहाली आती है.

उन्होंने आगे कहा कि भगवान के सामने सब बराबर हैं जिससे सबको समान कृपा मिलती है. हमें इसके लिए सदा धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए और समाज में प्रेम व भाईचारा के साथ रहना चाहिए. सिङबोंगा की स्तुति के साथ-साथ मनुष्य, जीव-जंतु व सारी सृष्टि का सम्मान करना चाहिए जो सरना धर्म का मूल सिद्धांत है.

इस अवसर पर डाॅ करमा उरांव ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा ने अपने मूल धर्म को संगठित कर जिस समृद्ध समाज की कल्पना की, वह आज भी अधूरी है. उन्होंने न केवल धर्म-संस्कृति को बचाने के लिए संघर्ष किया बल्कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा आजीवन करते रहे. आज हम उसी धर्म-संस्कृति व जल-जंगल-जमीन की संरक्षण के लिए ही सरना धर्म कोड की मांग कर रहे हैं. अतः सरना कोड के लिए भगवान बिरसा मुंडा से संकल्प लेकर डटकर संघर्ष करना चाहिए.

इस कार्यक्रम में धर्म गुरु दुर्गावती ओड़ेया, सोमा मुंडा, सुभासिनी पुर्ती, बुधराम मुंडा, विश्राम डोडरय, बिरसा कंडीर, मोहनसिंह नाग, महादेव मुंडा, मंगल मुंडा, मधु बारला, रवि तिग्गा, नारायण उरांव, बिरसा तोपनो, सुखराम मुंडा, सलीम मुंडा, लुथुड़ु मुंडा, जीतु पहान, जेठा पाहन शामिल हुए.

आप सभी का सरना धर्म प्रार्थना सभा - 2022 में सादर आमंत्रित हैं.
28/04/2022

आप सभी का सरना धर्म प्रार्थना सभा - 2022 में सादर आमंत्रित हैं.

बा/बाहा/सरहुल शोभायात्रा, खूंटी, झारखण्ड (4 अफ्रैल 2022)
02/04/2022

बा/बाहा/सरहुल शोभायात्रा, खूंटी, झारखण्ड (4 अफ्रैल 2022)

सरना धर्म प्रार्थना सभा सह सम्मेलन आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान के तत्वाधान में स्थानीय करम अखड़...
29/11/2021

सरना धर्म प्रार्थना सभा सह सम्मेलन आयोजित

राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान के तत्वाधान में स्थानीय करम अखड़ा, खूंटी में दिनांक 28/11/2021 को सरना धर्म प्रार्थना सभा सह सम्मेलन आयोजित की गई. धर्म गुरू दुर्गावती ओड़ेया, धर्म गुरु सोमा कंडीर, धर्म गुरु बगरय ओड़ेया व धर्म गुरु की अगुवाई में सरना स्थल में सिङबोंगा की पूजा-पाठ कर सुख, शांति व समृद्धि की कामना की. बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को जनजातीय गौरव दिवस घोषित करने पर भगवान बिरसा मुंडा के परपोता सुखराम मुंडा को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया.

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डाॅ करमा उरांव ने कहा कि सरना प्रकृति पर आधारित विश्व का सबसे पुराना धर्म है. प्रकृति पूजा विधि-विधान से ही पृथ्वी में संतुलन व खुशहाली है. हम जानते हैं कि जैसे-जैसे प्रकृति पूजा पद्धति घटी, वैसे-वैसे दुनिया में अशांति व दुख:-विपत्ति फैली. इस तरह अब लोगों को प्रकृति पूजा पद्धति को पुन: लौटने की जरूरत है. हमें किसी भ्रम व अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए और आगामी जनगणना में सरना धर्म दर्ज करें तथा अधिक से अधिक लोगों को सरना धर्म दर्ज करने की अपील करें.

दुर्गावती ओड़ेया ने कहा कि जैसे-जैसे सरना धर्म व संस्कृति से दूर हुए हैं. हमारी एकता व पारंपरित शासन व्यवस्था कमजोर हुई है जिसके कारण जल-जंगल-जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है. सरना, मसना, जतरा स्थल व पूजा स्थलों पर कब्जा किया जा रहा है. ऐसे में पारंपरित रीति-रिवाज व धरोहरों को बचाने के लिए पुन: एकजुट होने की जरूरत हैं.

मथुरा कंडीर ने कहा कि भारत सरकार के समक्ष अगामी जनगणना परिपत्र में सरना धर्मकोड की सुमार हेतु भारत सरकार के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, आदिवासी मामले के मंत्री, रजिस्टार जेनरल सेन्सस और भारत के राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुति हेतु स्मारपत्र दिया जाएगा और उनसे प्रतिनिधिमंडल भेंटवार्ता कर सरना धर्म कोड हेतु पहल करेंगे. इसके लिए दिल्ली में आगामी 6 एवं 7 दिसंबर 2021 को क्रमशः गांधी पीस सभागार, नई दिल्ली में अंतर राज्यीय प्रतिनिधि सभा एवं जंतर मंतर में सत्याग्रह सह धरना का आयोजन हो रहा है जिसमे विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगें.

सभा में महादेव मुंडा, जितुआ मुंडा, राम सिंह मुंडा, मोहन सिंह नाग, सुखराम मुंडा, राम मुंडा, रवि तिग्गा, नारायण उरांव, बलकु उरांव, बिरसा कंडीर, मसीह गुड़िया, सोमा मुंडा, विश्राम, जगदेव, रमन, लक्ष्मण आदि गणमान्य लोग शामिल हुए. इस कार्यक्रम में खूंटी के अलावा गुमला, रांची, पश्चिम सिंहभूम, सिमडेगा व पूर्वी सिंहभूम के लोग शामिल हुए.

प्रतिभा सह प्रोत्साहन समारोह - 2021 संपन्नसरना धर्म सोतो: समिति केंद्र डौगड़ा में रविवार को प्रतिभा सह प्रोत्साहन समारोह...
11/10/2021

प्रतिभा सह प्रोत्साहन समारोह - 2021 संपन्न

सरना धर्म सोतो: समिति केंद्र डौगड़ा में रविवार को प्रतिभा सह प्रोत्साहन समारोह धर्मगुरू सोमा कंडीर, धर्मगुरु बगरय ओड़ेया और धर्मगुरु भैयाराम ओड़ेया की अगुवाई में आयोजित की गई. उन्होंन भगवान सिङबोंगा की पूजा-पाठ कर छात्र-छात्राओं को आशीर्वाद दिया तथा उनकी सफलता की कामना की. इस अवसर पर 61 मैट्रिक, 17 इंटर, 8 ग्रेजुएशन, 5 पीजी, 3 बीएड,1टीचर ट्रेनिंग, 1 नर्सिंग, 2 बी.टेक एवं 1 नौकरी की परीक्षा उत्तीर्ण छात्रों को प्रशस्ति पत्र, मेडल और डिक्शनरी देकर सम्मानित किया गया.

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि खूंटी के उप विकास आयुक्त अरूण कुमार सिंह और विशिष्ट अतिथि श्रीमति उषा मुंडू, कार्यपालक दंडाधिकारी खूंटी शामिल हुए. अरूण कुमार सिंह ने छात्रो को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा समाज का सर्वांगीण विकास होता है. सामाजिक, सांस्कृतिक व आर्थिक विकास के लिए शिक्षा पर जोर देना चाहिए. अशिक्षा के कारण समाज में गरीबी, अंधविश्वास और कुप्रथाएं आज भी व्याप्त है. समाज में शांति तथा खुशहाली लाने के लिए युवाओं संकल्प लेकर आगे बढ़ना चाहिए.

इस अवसर पर धर्म गुरू दुर्गावती ओड़ेया, महादेव मुंडा, बेला मुंडरी, जीतुवा मुंडा, सुखराम पुर्ती, मथुरा कंडीर, जमुना मुंडू, वसुदेव पुर्ती, मंगा ओड़ेया, बिरसा कंडीर, रवि तिग्गा, नारायण उरांव, सोमा मुंडा, बलराम, सुगना पहान, टुटी ओड़ेया, नरनसिंह तोपनो, विजय मुंडरी आदि गणमान्य लोग शामिल हुए तथा इसके सफल आयोजन में महेश्वर मुंडरी (आंध्र प्रदेश), डा गोमती बोदरा (दिल्ली), योगेन्द्र मुंडरी, राकेश मुंडा, बरूण मुंडा (असम), किरण बारला, मनसा मुंडा (मुम्बई), जयश्री मुंडू, विनीत कुमार मुंडा, महादेव नागवार, लखीसराम मुंडा, सामु डोढरय आदि ने आर्थिक व बौद्धिक सहयोग किया.

सरना धर्म सोतो: समिति - केंद्र डौगड़ा में टीकाकरण का पहला अभियान चलासरना धर्म सोतो: समिति केंद्र डौगड़ा के मार्गदर्शन मे...
15/06/2021

सरना धर्म सोतो: समिति - केंद्र डौगड़ा में टीकाकरण का पहला अभियान चला

सरना धर्म सोतो: समिति केंद्र डौगड़ा के मार्गदर्शन में मंगलवार को कोरोना टीकाकरण का पहला अभियान चलाया गया। इसमें लोगों ने बढ़चढ़कर भाग लिया जिसमें 18 प्लस के 25 और 45 प्लस के 11 लोगों ने कोरोना टीका लिया. इस अवसर पर मुरहू बिडीओ प्रदीप भगत लोगों को प्रेरित करने पहुंचे. उन्होने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इसी तरह धार्मिक व सामाजिक संगठन तथा समाज के बुद्धिजीवियों को कोरोना टीकाकरण के लिए आगे आना चाहिए. चूंकि महामारी से बचाव के लिए कोरोना टीका के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है. इसीलिए सरकार और प्रशासन टीकाकरण पर जोर दे रही है. अत: केरोना टीका लेने के लिए स्वेच्छा से आगे आना चाहिए.

धर्मगुरु बगरय मुंडा ने कहा कि भय, भ्रम और अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए जबकि कोरोना महामारी की गंभीरता को देखते हुए गांव-परिवार में कोरोना टीकाकरण के लिए जागरूकता बढ़ानी चाहिए. इसीलिए धर्म सोतो: समिति के द्वारा टीकाकरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। फिलहाल मुरूद, गरय, सिटीःडीह, बुड़जू, डोल्डा:, ओएबुर:, डौगड़ा, पतड़ाडीह, कुलीपिड़ी, केवरा इत्यादि गांवों अभियान चलाया जा रहा है.

इस अभियान में मथुरा कंडीर, बिरसा कंडीर, जमुना मुंडू, धर्मगुरू सोमा कंडीर, धर्मगुरु भैयाराम ओड़ेया, टूटी ओड़ेया, मधियाना धान, बुदराम मुंडू, मधिराय मुंडू, विशुन चंद्र कंडीर, सुनील ओड़ेया, बिरसिंह ओड़ेया आदि लोग शामिल हैं।

सरना धर्म सोतोः समिति केन्द्र डौगड़ा में सामूहिक विवाह समारोह आयोजित,  17 जोड़े विवाह के बंधन में बंधे,  खूंटी के उप विक...
08/03/2021

सरना धर्म सोतोः समिति केन्द्र डौगड़ा में सामूहिक विवाह समारोह आयोजित, 17 जोड़े विवाह के बंधन में बंधे, खूंटी के उप विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह स्वयं साक्षी बनकर आशीर्वाद दिए.

विवाह न केवल जोड़ों का बंधन है बल्कि आजीवन जीने का एक रस्म है.

सरना धर्म सोतोः समिति केन्द्र डौगड़ा में सामूहिक विवाह समारोह आयोजित कर 17 जोड़े विवाह के बंधन में बंधे. धर्मगुरु सोमा कंडीर, धर्मगुरु बगरय ओड़ेया और धर्मगुरु भेयाराम ओड़ेया की अगुवाई में सरना स्थल में पूजा-पाठ कर सिंङबोंगा से सुख, शांति और खुशहाली की कामना की गई. इस अवसर पर हजारों लोग इसकी साक्षी बनकर नव वर-वधूओं को आशीर्वाद देकर उनके सफल जीवन की कामना की गई जिसमें खूंटी व पश्चिमी सिंहभूम से आए बराती बैनर, पाइका नाच, गाजा-बाजा, एवं पारंपरित वेश-भूषा साथ पहुंचे. विवाह गीत, मुंडारी पारंपरिक गीत और विवाह मंत्रों से पूरा इलाका गूंज उठा. इसमें नए जोड़ों को साथ-साथ जीने की शपथ दी गई और भगवान सिंङबोंगा की पूजा कर खुशहाली की मनतें ली.
इस अवसर पर धर्मगुरु सोमा कंडीर ने कहा कि विवाह न केवल दो जोड़ों का बंधन है बल्कि दो परिवार के साथ समाज को प्रगाड़ बनाने का एक रस्म है. इसमें जोड़े जन्म-जन्म साथ जीने का कसम खाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि सुख और दुख जीवन का हिसा है. अतः विपत्तियों से विचलित नहीं होना चाहिए बल्कि मिलकर ऐसे परिस्थितियों का सामना करना चाहिए. इससे जीवन में सदा सुख, शांति और खुशहाली आती है.

उप विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह ने नव वर-वधूओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सामाजिक कार्यों को संपन्न करने का दायित्व समाज को मिलकर उठाना चाहिए. इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों पर सामाजिक संस्कार पार करने में किसी प्रकार का बोझ नहीं पड़ेगा. अब विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत सामाजिक संस्कारों को संपन्न करने के लिए मदद दी जा रही है. कन्या दान योजना गरीब परिवारों के लिए एक वरदान साबित हुई है जिससे गरीबों के सामाजिक संस्कार आसानी से सम्पन्न किया जा रहा है. परन्तु दुर्भाग्य की बात है कि आज भी गाँव की अधिकांश जनता इसकी जानकारी नहीं है. अतः गांव-समाज के प्रबुद्ध लोगों को आगे आने की जरूरत है. इससे समाज तथा क्षेत्र में सामाजिक भेद-भाव के साथ गरीबी जैसे बुराईयां दूर होगी और एक सशक्त समृद्ध समाज बनेगी.

रेलवे अधिकारी महोदव मुंडा, सुखराम पुर्ती, कैप्टन मंगा ओड़ेया, कैप्टन सोमा ओड़ेया, बिरसा कंडीर, मधियाना धान, जमुना मुंडू, मथुरा कंडीर, जेठा पहान, बुधराम मुंडा, मंगलसिंह मुंडा, विशुन चंद्र कंडीर, बलराम मुंडरी आदि ने साक्षी बनकर नए जोड़ों को आशीर्वाद दिया.

सरना धर्म और आदिवासी धर्म का तुलनात्मक अध्ययनसरना धर्मावलंबियों की संख्या 50 लाख और आदिवासी धर्म मानने वालों की संख्या म...
19/02/2021

सरना धर्म और आदिवासी धर्म का तुलनात्मक अध्ययन

सरना धर्मावलंबियों की संख्या 50 लाख और आदिवासी धर्म मानने वालों की संख्या मात्र 86 हजार है. झारखंड में ही सरना धर्म और आदिवासी धर्म के बीच प्रतिस्पर्द्धा की लड़ाई है. फिर भी, सरना धर्म के मुकाबले आदिवासी धर्म कहीं नहीं टिकता है. झारखंड में जहां सरना धर्म मानने वाले 42 लाख हैं तो आदिवासी धर्म मानने वाले मात्र 41 हजार है.

सरना धर्म देश की बड़ी धर्मों में छठा स्थान रखता है. यह हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध के बाद सरना धर्म का स्थान है. यह जैन धर्मावलंबियों से कहीं 8 लाख अधिक है. फिर भी, एक साजिश के तहत सरना धर्म कोड नहीं दिया जा रहा है. आगामी 2021 की जनगणना में सरना धर्म ही लिखें और अधिक से अधिक लोगों को सरना धर्म ही लिखवाएं. निश्चय ही बौद्ध धर्मावलंबियों से अधिक संख्या हो जाएगी और सरना देश की पांचवीं बड़ी धर्म बन जाएगी.

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