Maharshimehi Satsang Ashram

Maharshimehi Satsang Ashram “इस पेज के माध्यम से सभी संत-महात्माओं तथा सद्ग्रंथों के अमूल्य उपदेश साझा किए जाते हैं, जिससे आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार हो।”

त्रिवेणीसंगमो यत्रा तीर्थराजः स उच्यते।तत्रा स्नानं प्रकुर्वीत सर्व्वपापैः प्रमुच्यते ॥अर्थ— देह में जहाँ उल्लिखित तीनों...
04/02/2026

त्रिवेणीसंगमो यत्रा तीर्थराजः स उच्यते।
तत्रा स्नानं प्रकुर्वीत सर्व्वपापैः प्रमुच्यते ॥
अर्थ— देह में जहाँ उल्लिखित तीनों नाड़ियों का संगम है, उस स्थान को गंगा, यमुना
और सरस्वती का संगम—त्रिवेणी कहते हैं। यह त्रिवेणी सर्वप्रधन तीर्थ कहकर गिनी जाती
है। इस तीर्थ में स्नान करने से सब पापों से मुक्ति मिलती है।
(ज्ञानसंकलिनी तंत्राद्ध)





“परमाराध्य संत सतगुरुमहार्षि मेंहीं परमहंस जी महाराजको कोटि-कोटि नमन 🙏”
30/01/2026

“परमाराध्य संत सतगुरु
महार्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज
को कोटि-कोटि नमन 🙏”



पूज्यपाद संतसेवी जी महाराज, गुरुमहाराज को प्रेमपूर्वक भोजन कराते हुए।”
30/01/2026

पूज्यपाद संतसेवी जी महाराज, गुरुमहाराज को प्रेमपूर्वक भोजन कराते हुए।”




🙏🙏संत सद्गुरु महर्षि मेही परमहंस जी महाराज🙏🙏
28/01/2026

🙏🙏संत सद्गुरु महर्षि मेही परमहंस जी महाराज🙏🙏






🇮🇳 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳आओ मिलकर अपने संविधान और देश के गौरव पर गर्व करें।जय हिंद! 🇮🇳✨
26/01/2026

🇮🇳 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳
आओ मिलकर अपने संविधान और देश के गौरव पर गर्व करें।
जय हिंद! 🇮🇳✨





आप सभी को बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ।माँ सरस्वती आप सभी के जीवन में ज्ञान, बुद्धि और सफलता का प्रका...
23/01/2026

आप सभी को बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ।
माँ सरस्वती आप सभी के जीवन में ज्ञान, बुद्धि और सफलता का प्रकाश फैलाएँ। 🙏✨




🌼 गुरु-वाणी | सत्संग का संदेश 🌼सत्संग नित अरु ध्यान नित,रहिये करत संलग्न हो ।व्यभिचार, चोरी, नशा, हिंसा,झूठ तजना चाहिये ...
22/01/2026

🌼 गुरु-वाणी | सत्संग का संदेश 🌼
सत्संग नित अरु ध्यान नित,
रहिये करत संलग्न हो ।
व्यभिचार, चोरी, नशा, हिंसा,
झूठ तजना चाहिये ॥
✨ सत्संग से विवेक जाग्रत होता है
✨ ध्यान से अंतःकरण शुद्ध होता है
✨ सदाचार से जीवन दिव्य बनता है
🙏 गुरु कृपा से ही जीवन का कल्याण संभव है 🙏




नमो गुरु सतगुरु नमो, नमो नमो गुरुदेव।नमो विघ्न हरता गुरु, निर्मल जाको भेव॥🙏✨
21/01/2026

नमो गुरु सतगुरु नमो, नमो नमो गुरुदेव।
नमो विघ्न हरता गुरु, निर्मल जाको भेव॥
🙏✨






विराट् रूप भी अनन्त नहींअगर कोई तर्क करता है कि ईश्वर नहीं है, तो मैं प्रश्न करता हूँ कि एक अनादि अनंत तत्त्व को मानते ह...
20/01/2026

विराट् रूप भी अनन्त नहीं

अगर कोई तर्क करता है कि ईश्वर नहीं है, तो मैं प्रश्न करता हूँ कि एक अनादि अनंत तत्त्व को मानते हो या नहीं? यदि नहीं मानोगे, तो सभी को सादि-सान्त कहना पड़ेगा, तो प्रश्न होगा कि उन सादि-सान्तों के परे क्या है? इसके उत्तर में जबतक अनंत नहीं कहा जाए, तबतक इस प्रश्न का ठीक-ठीक उत्तर नहीं हो सकता। सान्तों का बड़े से बड़ा मंडल बना लो, फिर भी उसका मण्डल सान्त ही होगा। सूर्य-चन्द्र, सारा ब्रह्माण्ड सान्त-ही-सान्त है। अनेक ब्रह्माण्ड भी अनंत नहीं होते। विराट् रूप भी अनंत नहीं है। सीताजी की खोज के लिए जब बड़े-बड़े वानर चले और समुद्र के किनारे पहुँचते हैं, भूख-प्यास से विकल होते हैं, उस समय एक विवर से एक पक्षी को निकलते और फिर उसमें प्रवेश करते देखा। ऐसा देखकर सभी बन्दरों ने एक दूसरे का हाथ पकड़कर उस गुहा में प्रवेश किया। वहाँ एक तपस्विनी तेजयुक्त माई को देखा। उस तपस्विनी ने उन बन्दरों को फल खाने और जल पीने का आदेश दिया, फिर आँखें बंद करने के लिए माई ने कहा। आँखें बंद करने के बाद आँखें खोलने पर फिर सब अपने को समुद्र के किनारे पाया। अब उस समुद्र को कौन पार करे? जाम्बवन्त ने कहा- 'जिस समय मैं जवान था, विराट् रूप भगवान की मैंने दो घड़ियों में सात प्रदक्षिणाएँ की थीं; लेकिन अब तो मैं बूढ़ा हो गया हूँ।' इससे जाना जाता है कि वह विराट् रूप भी अनंत नहीं था।

कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो विराट् रूप दिखाया था, वह भी अनंत नहीं था; क्योंकि उस विराट् रूप के अतिरिक्त स्थान बचा था, जिसमें कौरव-पाण्डव दल के लोग भगवान् के मुँह में प्रवेश करते थे और मर-मरकर गिरते थे। अर्जुन भी एक जगह खड़ा होकर डर रहा था। अनादि अनंत तत्त्व ही असीम होगा, सारे सांतों के पार में एक अनंत को नहीं मानने से नहीं बनता।

(महर्षि में हीं परमहंसजी महाराज)
शांति सन्देश से



🌼 श्री महार्षि मेही परमहंस जी महाराज की वाण🌼 गंगा यमुना युग धार, मध्य सरस्वती बही।पुष्ट मनुष्यत्व के भाग, गुरुगम नाहीं ल...
20/01/2026

🌼 श्री महार्षि मेही परमहंस जी महाराज की वाण🌼
गंगा यमुना युग धार, मध्य सरस्वती बही।
पुष्ट मनुष्यत्व के भाग, गुरुगम नाहीं लही ॥1॥
सतगुरु संत कबीर, नानक गुरु आदि कही।
जोई ब्रह्मांड सोई पिंड, अंतर कछु अहै नहीं ॥2॥
दाहिने गंगा सूर्य, बाएँ चंद्र यमुना बाईं।
सरस्वती सुषुम्न बीच, चेतन जलधर नाईं ॥3॥
सतगुरु को धरि ध्यान, सहज वृत्ति शुद्ध करी।
सम्मुख बिंदु निहारि, सरस्वती न्हाय चली ॥4॥
होति जगमग ज्योति, सहसदल पीली चली।
अद्भुत त्रिकुटी की ज्योति, लखत वृत्ति सुख रली ॥5॥
सुन मधुर धुन सार, सुरत मिली चलत भई।
महाशून्य गुफा भंवर, होइ सतलोक गई ॥6॥
अलख अगम अनाम, सो सत्पद सूरत रली।
पायो पद निर्वाण, संतों सब कहत अली ॥7॥
छूटे दुख का देश, गुरुगम पाय कही।
सतगुरु देवी साहब, दया “मेही” गाई दी ॥8॥
🙏 गुरु बिनु भव निधि तरै न कोई 🙏
✨ सतगुरु कृपा से ही आत्ममार्ग का प्रकाश संभव है ✨




🙏संत सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज🙏
19/01/2026

🙏संत सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज🙏






गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुःगुरुर्देवो महेश्वरः।गुरुः साक्षात् परं ब्रह्मतस्मै श्री गुरवे नमः॥गुरु ही अज्ञान के अंधकार से...
18/01/2026

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः
गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म
तस्मै श्री गुरवे नमः॥
गुरु ही अज्ञान के अंधकार से निकालकर
ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
ऐसे श्री गुरु चरणों में कोटि-कोटि नमन। 🙏

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