10/06/2026
*10 जून 2013 - हुज़ूर ताजुश्शरिया का काबा शरीफ़ के अंदर ग़ुस्ल-ए-काबा और इबादत का तारीख़ी वाक़िया* 🌹
*ताजदार-ए-अहले सुन्नत, क़ाज़ी-उल-क़ुज़्ज़ात फ़िल हिन्द, हुज़ूर ताजुश्शरिया मुफ़्ती मुहम्मद अख़्तर रज़ा ख़ान क़ादरी अज़हरी अलैहिर्रहमा* को 10 जून 2013 को वो सआदत नसीब हुई जो सदियों में किसी- किसी को मिलती है।
# # # *1. पस-ए-मंज़र: दावत कैसे मिली?*
1. *शाही दावतनामा*: सऊदी हुकूमत के *"सदन-ए-काबा"* शैख़ सालेह अल-शैबी की तरफ़ से ख़ुसूसी दावत आई। ये ख़ानदान-ए-बनी शैबा 1400 साल से काबे की चाबी के मुहाफ़िज़ हैं।
2. *वजह*: हुज़ूर ताजुश्शरिया अपने वक्त के हुज़ूर मुफ्ती आज़म हिंद के बाद ता हयात सबसे बड़े मुफ्ती आज़म हिंद व आलम रहे आप सबसे बड़े सुन्नी मुफ़्ती* थे। दुनिया भर में 16 करोड़ से ज़्यादा मुरीद। सऊदी हुकूमत भी आपकी इल्मी शख़्सियत की मोतरीफ़ थी।
3. *तारीख़*: 10 जून 2013, मुताबिक़ *1 शाबान 1434 हिजरी*, पीर का दिन।
# # # *2. काबा शरीफ़ के अंदर हाज़िरी का मंज़र*
*वक़्त*: बाद नमाज़-ए-फ़ज्र, तक़रीबन *6:30 AM*
*शामिल लोग*: हुज़ूर के साथ सिर्फ़ 3 लोग अंदर गए -
1. *साहबज़ादे असजद रज़ा ख़ान क़ादरी* मद्दज़िल्लहु
2. *मुफ़्ती अज़ीज़ अहसन साहब* - ख़ादिम
3. *एक सऊदी सरकारी गवाह*
*दरवाज़ा खुलना*: सदन-ए-काबा ने चाँदी की चाबी से बाब-ए-काबा खोला। 1400 साल पुरानी रिवायत है कि काबे के अंदर जाने से पहले दरवाज़े पर *"बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर"* कहा जाता है।
# # # *3. ग़ुस्ल-ए-काबा की तरतीब*
काबे को साल में 2 बार ग़ुस्ल दिया जाता है - 1 शाबान और 1 मुहर्रम। हुज़ूर को 1 शाबान की सआदत मिली।
1. *पानी की तैयारी*: आब-ए-ज़मज़म में *उर्द, गुलाब, इत्र-ए-काबा* मिलाया गया।
2. *हुज़ूर का अमल*: हुज़ूर ताजुश्शरिया ने ख़ुद अपने दस्त-ए-मुबारक से काबे की अंदरूनी दीवारों पर पानी डाला।
3. *पोंछना*: ख़ास सफ़ेद कपड़े से दीवारें, फ़र्श, छत को ख़ुश्क किया।
4. *ख़ुशबू*: इसके बाद *इत्र-ए-ऊद, मुश्क, अंबर* से काबे को मुअत्तर किया गया।
हुज़ूर फ़रमाते थे: *"मेरे हाथ काबे की दीवार को छू रहे थे, दिल अर्श-ए-मुअल्ला से लगा था।"*
# # # *4. काबे के अंदर नमाज़ और इबादत*
ग़ुस्ल के बाद काबे का दरवाज़ा बंद करके हुज़ूर ताजुश्शरिया ने इबादत की - ये सबसे ख़ास लम्हा था।
1. *2 रकात नफ़्ल*: हुज़ूर ताजुश्शरिया ने *रुक्न-ए-यमानी और हतीम* के दरमियान 2 रकात नमाज़ अदा की। यही वो जगह है जहाँ हुज़ूर ﷺ ने नमाज़ पढ़ी थी। _📚 बुख़ारी शरीफ़_
2. *दुआ*: 20 मिनट तक सजदे में रो-रो कर उम्मत-ए-मुस्लिमा के लिए दुआ की। ख़ासकर हिंदुस्तान के सुन्नियों के लिए।
3. *साहबज़ादे का बयान*: असजद मियाँ फ़रमाते हैं - "अब्बा हुज़ूर सजदे में *'या रब्ब-ए-काबा, मेरी क़ौम की हिफ़ाज़त फ़रमा'* पढ़ रहे थे और ज़ार-ओ-क़तार रो रहे थे।"
4. *मुद्दत*: तक़रीबन *45 मिनट* हुज़ूर ताजुश्शरिया काबे के अंदर रहे। बाहर हज़ारों लोग बाब-ए-काबा के दीदार के लिए जमा थे।
# # # *5. काबे के अंदर की 3 निशानियाँ जो हुज़ूर ताजुश्शरिया ने देखीं*
1. *3 लकड़ी के सुतून*: हुज़ूर ﷺ के ज़माने के सुतून, जिन पर काबे की छत टिकी है।
2. *संग-ए-मरमर का फ़र्श*: सफ़ेद संग-ए-मरमर, जिसके नीचे हुज़ूर आदम अलैहिस्सलाम की क़ब्र की निस्बत बताई जाती है।
3. *सुनहरी लालटेन*: छत से लटकी पुरानी लालटेन, जो नूर बरसा रही थी।
# # # *6. बाहर आने के बाद हुज़ूर के अल्फ़ाज़*
जब काबे से बाहर तशरीफ़ लाए तो आँखें अश्कबार थीं। फ़रमाया:
*"आज मेरे नाना ताजदार-ए-अहले सुन्नत आला हज़रत हुज़ूर मुफ्ती आज़म हिंद का फ़ैज़ ज़ाहिर हो गया। मैं ने काबे के अंदर अपने नाना का साया महसूस किया। ये मक़ाम-ए-मुस्तफ़ा रज़ा है।"*
और फ़रमाया: *"काबे के अंदर जो सुकून मिला, वो जन्नत की हवा थी। काश सारी उम्मत को ये नसीब हो।"*
# # # *7. ये सआदत क्यों मिली? - 3 वजह*
1. *निस्बत-ए-आला हज़रत*: आप इमाम अहमद रज़ा के पर नवासे और जानशीन थे।
2. *दिफ़ा-ए-हरमैन*: ज़िंदगी भर गुस्ताख़-ए-रसूल का रद्द किया।
3. *: आपने 50 बार से ज़्यादा रोजा रसूल की हाज़री कि। ख़ादिम-ए-हुज्जाज कहलाते थे।
*ख़ुलासा*: 10 जून 2013 बरेली शरीफ़ की तारीख़ का सबसे रौशन दिन है। जिस घराने ने पूरी ज़िंदगी *"ल ब्बैक या रसूलल्लाह"* का नारा लगाया, काबे के मालिक ने उन्हें अपने घर के अंदर बुलाकर इज़्ज़त बख़्शी।
*_"काबे ने दर खोला, ताजुश्शरिया आए
अर्श ने सलामी दी, अख़्तर रज़ा आए"_*
*-SAGE GAUSULWARA MUHAMMAD AAZAM RAZA KHALIDI AZHARI*-
ये वाक़िया *रज़ा ख़ानदान की मक़बूलियत* की दलील है। अल्लाह हमें भी काबे की हाज़िरी नसीब फ़रमाए। आमीन 🤲
Follow Paigam E Tajushshariah Bareilly Shareef imran khan's WhatsApp Channel. Tajushshariah ke Ashiqo ke liye..
*Paigam E Tajushshariah ko Aam karenge*
*Har Batil Ka Jeena Haraam karenge*
*Judh jao Isse Ae Sunni Musalmano*
*Mil ke Ham Tum Deen ka Kam karenge*. Join 54K followers for the latest updates.