Jai Haru Saim Baba

Jai Haru Saim Baba ऊँ शिव गोरक्ष
जय बाला गोरिया
जय हरू सैम
ऊँ हरि हर नमः

जय माँ शेर सवारी
जय महाकाली

14/03/2023

हरि + हर = हरज्यू

हरज्यू हरि भी हैं और हर भी हैं
सूर्य नारायण भगवान की किरण माता कालीनारा पर पडी तब माता गर्भवती हुई

हरज्यू को सूरज वंशी भी कहा जाता है

माता कालीनारा के बॉए हाथ से हरज्यू का जन्म हरिद्वार मैं हुआ

हरज्यू का मूल थान हर की पैडी मैं है

हरज्यू को अलग अलग नामो से जाना जाता है
जैसे= बाला बरू, राजा हरीश चन्द्र, बाहुबली हरू, हठिलो हरू, नजरबन्दी हरू, हरू नाथ , सूर्य वंशी हरू

हरिद्वार मै जन्म के कारण हरज्यू को हरि नारायण का अवतार माना जाता है
हरज्यू ने चार धाम की यात्रा की है

गुरू गोरखनाथ के शिष्य होने के कारण हरज्यू को हर यानी शिव रूपी माना जाता है

Jai ho saim raja
22/03/2022

Jai ho saim raja

09/03/2022

Rudra Dhari Chandan Dhari Dooda Dhari Haru Saim Devay🙏🙏

14/12/2021

सैम देवता की जागर में गाई जाने वाली कहानी


कहते हैं कि सैम ज्यूँ छिपुलाकोट की रानी पर मोहित हो गए थे।या कुछ इस प्रकार बताते हैं कि सैम देवता बहुत सुंदर थे, उनकी तेजस्वी कांति को देख छिपलकोट की रानियां उन पर मोहित हो गईं। और छिपुलाकोट के राजा ने उन्हें बंदी बना कर कारागार में डाल दिया। इधर हरू अपनी मौसी के वहाँ रह रहे थे, वो अपने भाई को छुड़ाने के लिए प्रयासरत थे। सैमज्यूँ को कैद में रहते रहते 12 वर्ष हो गए, इधर हरू परेशान थे , और वो अपनी मौसी के पशुओं के ग्वाले जाते वहाँ अपनी पसंदीदा मुरली नरबाड़ी को बजाते थे।

एक दिन स्वर्ग लोक की इन्द्राणी ने उस मुरली की धुन को सुना,वो मोहित हो गई,उसने इंद्र देव से कहा, हे प्रभु इस मानव का कलेजा चाहिए मुझे। तब इंद्रदेव ने अपने सेवको को आज्ञा का पालन करने का हुक्म दिया । तब हरज्यूँ की माता जी कालानीरा भी उस समय स्वर्ग में होती है, और जब वो वहाँ मुरली की धुन सुनती है,तो समझ जाती है, ये हो न हो मेरा हरू ही है।

माँ कालानीरा को जब यह पता चलता है,कि इंद्राणी उसके पुत्र का कलेजा मांग रही है,तो वह इंद्र और इंद्राणी के पास गई,उनसे क्षमा याचना की,और स्वंय अपने पुत्र को स्वप्न में दर्शन देकर पूछा,की तुम क्यों परेशान हो ? तब हरू ने बताया कि मेरा भाई सैम 12 वर्ष से छिपालकोट में बंदी है, और मैं उसे मुक्त नहीं करा पा रहा हूँ। मै अपने भाई सैम को मुक्त कराकर ही, हंसुलीगड़ में अपनी मौसी और भाभियों के पास जाऊंगा। ( सैम देवता की जागर )


हरज्यू का अडिग प्रण देख कर , मा कालानीरा डर गई,उन्होंने दुश्मन देश के सारे संकट और व्याधियां बताई, लेकिन हरू नही माने । तब थक हार कर माँ ने कहा, तुझे जाना ही है तो जा, लेकिन अकेले मत जाना, अपने भांजे गोरिया को साथ लेकर जाना। धौली धुमाकोट में हमारी हँसुली घोड़ी है, और भंडार की चाबी है,वहा से हँसुली घोड़ी और सोना चांदी ले जाना, तुम्हारे काम आएगी।

इतने में हरू की नींद खुल गई, उन्होंने सपने में माँ के बताए अनुसार सबसे पहले अपने भांजे बाला गोरिया को बुलाया । गोरिया को सारी स्थिति से अवगत करा कर ,दोनो मामा भांजे ,जोगिया वस्त्र डाल कर छिपालकोट को निकल गए। तल्ला जोशीमठ पहुँच कर हरज्यूँ ने गोरिया से कहाँ ,कि तुम भिक्षाटन करके लाओ। मामू की आज्ञा पा कर गोरिया, तल्ला जोशीमठ भिक्षा मांगने पहुच गए। लेकिन वहाँ उन्हें किसी ने भी भिक्षा नही दी, वहाँ के लोगो ने बहाने बना कर खाली लौटा दिया।

गोरिया खाली हाथ मामू के पास वापस आ गए, तब गोरिया महाराज ने हरज्यूँ को सारी बात बता दी। इस बात को सुनकर हरू को क्रोध आ गया, उन्होंने बभूत की फूंक मार कर,तल्ला जोशीमठ में हड़कम्प मचा दिया। जब तक वो उन जोगियों को ढूढ़ते,तब तक हरू और बाला गोरिया ,मल्ला जोशीमठ के ओर चले गए। वहाँ के लोगो ने उनका स्वागत किया, और उनको आदर पूर्वक खाना खिलाया। उस गाँव के बाहर एक बुढ़िया अकेली कुटिया में रहती थी। हरू और गोरिया उस बुढ़िया के पास गए,छिपुलाकोट का रास्ता पूछने के लिए, तब बुढ़िया ने बताया कि, छिपुलाकोट जाने वाले रास्ते मे एक बड़ा खेत मिलेगा ,जिसका नाम सासू बुवारी खेत है। उस खेत से आगे को दो रास्ते होंगे,उसमे से एक रास्ता तालाब की ओर जाता है,एक छिपुलाकोट । उन दो रास्तों के शुरवात में नोमना मसाण की बहिन हसुला रहती है, वह लोगो को गलत रास्ता बता कर तालाब की तरफ भेज देती है, वहाँ उसका भाई नौमणा मसाण ,सब इंसान जानवरों को पूरा निगल जाता है।अब हरू और गोरिया देव पहुच गए सासु बुवारी खेत मे,उनको हसुला तो नही मिली, मगर हरू ने गोरिया को कहा कि घोड़ी को पानी पिला दे, गोरिया घोड़ी को पानी पिलाने तालाब पर गए। तब वहाँ नौमणा मसाण उनकी घोड़ी को निगल गया।

वापस आ कर बाला गोरिया ने मामू को सब बताया , हरज्यूँ को आता है गुस्सा, और उन्होंने 22 मन का लोहे का गज धारी लटुवा को याद किया, ( 22 मन लगभग 880 किलो या हजार किलो की लोहे की छड़ी या भाला, जिसे धारण करते थे हरू देवता के भाई लटुवा ) और 22 देवियों को , 16 एड़ियो को और 52 वीरो और 64 जोगियों को याद किया ,और अपने सेवक भनारी, उजेइया को भी बुलाया,वो सभी हरू देवता की पुकार सुन तत्काल आ गए। फिर वे सब लोग दल बल के साथ, छिपुलाकोट को चले गए, वहाँ उन्होंने जोगी के वेश बना कर, राज्य के बाहर 1 दाना चावल तथा आधा दाना दाल का डाल कर खिचड़ी बनाने लगे।


उस राज्य की औरतें वहा पानी भरने आई,तो उन्होंने तेजस्वी जोगियो को देख कर चमत्कृत हो गई। उन स्त्रियों ने राज्य के पहरे को बता दिया सब। प्रहरियों ने उनको ललकारा, तब हरू देव ने कहा कि पहले आप खिचड़ी खा लो। तब परहरेदारो ने उनकी खिंचड़ी का मजाक बनाया, कि डेढ़ दाने की खिचड़ी से क्या होगा। मगर जोगियो के आग्रह करने पर, वो खाने बैठ गए। डेढ़ दाने खिंचड़ी से सबको तृप्ति हो गई। ये चमत्कार देख कर प्रहरी हैरान हो गए। वो हरू देवता के चरणों मे गिर के अपने साथ रखने आग्रह करने आगे, बोले आप के साथ रहेंगे ,आप के साथ कम से कम भोजन जी भर तो मिलेगा।

तब छिपुलाकोट के परहरेदारो को अपनी तरफ मिला कर हरू ने सारी गुप्त जानकारी पता कर ली, फिर उन्होंने अपने प्रिय भांजे को भेजा। बाला गोरिया बिल्ली का रूप धारण कर , सैम ज्यूँ की स्थिति की रेकी कर के आ गए ,और अपने मामू को बता दिया। सारी स्थिति स्पष्ट होने के बाद हरू ने अपने दल बल, लटुवा ,भनारी, उजेइया, अन्य दल के साथ छिपुलाकोट पर आक्रमण कर दिया।

उधर छिपुला भाइयों को भी पता चल गया,वो भी लड़ने आ गए अपने दल बल के साथ। दोनों तरफ से घमासान युद्ध छिड़ गया। राजा हरू , भांजे गोरिया और लटुवा और उनकी सेना ने अदम्य साहस और युद्ध कौशल दिखाया,और छिपुलाकोट के भाईयों और उनकी सेना को हराकर सैमज्यूँ को कारागार से मुक्त कराकर ले आये।

14/12/2021

कुमाऊ के राजा हरिश्चंद्र उर्फ हरू, जिनको वर्तमान में हरज्यूँ के नाम से गांव गांव में पूजा जाता है। बड़े साहसी ,और न्यायप्रिय ,जनता का कल्याण करने वाले राजा थे। वो सात्विक ह्रदय वाले राजा थे। उन्होंंने अपने शासन काल मे
अनेक जनकल्याण के कार्य किए। उनका मन राज पाट में कम लगता था। क्योंकि वो सात्विक ह्रदय वाले थे। कहते हैं, कि बाद में उन्होंने अपने भाई, सैमज्यूँ और अपने सेवक लटुवा , भनारी, उजेइया वीर के साथ सन्यास ले लिया, और गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली। उन्होंने सन्यासी के रूप में लोगों का कल्याण किया। वो एक देवतुल्य राजा और सन्यासी रहे। इसलिए उनकी मृत्यु के बाद उनको पूजा जाता है। उनकी जागर गाई जाती है। हरज्यूँ अपने पूरे कुनबे के साथ लोगो को दर्शन देते हैं और उनकी समस्याओं का निराकरण करते हैं। हरज्यूँ को सुख समृद्धि का देवता माना जाता है।

14/12/2021

हरू सैम की जन्म गाथा
औन हरू हरपट, जौन हरू खड़पट

कुमाऊं में प्रचलित इस लोकोक्ति का अर्थ है हरू, आये हरियाली लाये, हरू जाये सब कुछ नष्ट हो जाये.

हरू के साथ हमेशा सैम देवता के भी मंदिर होते हैं. हरू और सैम दोनों भाई हैं. हरू और सैम के जीवन की गाथा ही हरू-सैम की जागरों में गायी जाती हैं.

बहुत साल पहले निकन्दर नाम का एक राजा हुआ करता था. राजा निकन्दर की बेटी का नाम था कालानीरा. एक वर्ष जब हरिद्वार में कुंभ लगा तो कालानीरा ने अपने पिता से कुंभ में जाने की अनुमति मांगी. पिता ने लंबी यात्रा में अकेली पुत्री को भेजने से मना किया लेकिन बाद में कालानीरा की जिद्द के आगे पिता ने हार कर उसे अनुमति दे दी.

निकन्दर ने अपनी पुत्री को अनुमति एक शर्त पर दी कि वह गंगा में डुबकी नहीं लगायेगी बल्कि घुटनों तक के पानी तक ही गंगा में जायेगी. कालानीरा ने पिता की बात को मान लिया और हरिद्वार के कुंभ में चली गयी.

हरिद्वार के कुंभ में लाखों साधु-संन्यासी गंगा स्नान के लिए आये थे. कालानीरा ने एक कुटिया गंगा के तट बनायी और अगली सुबह गंगा स्न्नान के लिये गयी. पिता की आज्ञा अनुसार उसने घुटनों तक ही गंगा में अपने पैरों को डाला. इतने सारे साधु-संन्यासियों को गंगा में डुबकी लगाता देख कालानीरा का मन भी गंगा में पूरी डुबकी लगाने का हुआ.

कालानीरा ने पिता की बात न मानते हुये गंगा में डुबकी लगा दी ज्यूं ही कालानीरा ने गंगा में डुबकी लगाई सूर्य की पहली किरणें भी गंगा नदी पर पड़ गयी. जैसे ही कालानीरा डुबकी लगाकर गंगा से बाहर निकली तो उसे आभास हुआ कि वह गर्भवती हो चुकी है. लोक-लज्जा के डर से कालानीरा बहुत भयभीत हो गयी और घर न लौटकर जंगलों की और चली गयी.

जंगल में उसे गुरु गोरखनाथ तप करते हुये दिखे. गोरखनाथ जिस स्थान पर तप कर रहे थे वहां की धूनी बुझ चुकी थी पेड़-पौधे फूल सब कुछ सूख चुके थे. कालानीरा ने वहीं रहकर लकड़ियाँ एकत्र की और धूनी जला दी. जल से सींच-सींच कर फुलवारी को हरा-भरा कर दिया. जब गुरु गोरखनाथ की ने आंखें खोली तो वे अत्यंत प्रसन्न हुये और कालानीरा को वरदान मांगने को कहा. कालानीरा ने गुरुगोरखनाथ से मृत्यु का वर मांगा.

कालानीरा के इस अजीब बार जो सुनकर गुरु गोरखनाथ ने उसका दुःख सुना और उसे वरदान दिया कि तुम्हारे सभी पुत्र पराक्रमी होंगे और देवताओं की तरह पूजे जायेंगे.

कुछ दिनों बाद कालानीरा की बाईं कोहनी से एक पुत्र का जन्म हुआ जिसे गुरु गोरखनाथ ने हरू नाम दिया. कालानीरा अब गुरु गोरखनाथ के आश्रम में ही रहने लगी.

एक दिन कालानीरा स्नान के लिए नदी किनारे गयी और अपने पुत्र हरू को गुरु के आश्रम में रख दिया. हरू अपनी माता की रक्षा के लिए माता के पीछे-पीछे चला गया. नदी किनारे कालानीरा पर लटुवा मसान ने हमला कर दिया. मां पर लटुवा मसान का हमला देख हरू लटवा मसान की गर्दन पर चढ़ गया और उसे मार दिया.

दूसरी तरफ आश्रम में हरू को न देख गुरु गोरखनाथ को लगा कि शायद बालक को किसी जंगली जानवर ने खा लिया है तब गुरु ने अपने तप से घास में प्राण फूंक कर एक बच्चे को जन्म दिया. जब कालानीरा अपने पुत्र हरू के साथ आश्रम में आई तो दो-दो बालकों को देखकर चकित रह गयी .

गुरु गोरखनाथ ने कालानीरा को आशीर्वाद दिया कि इनमें जो जन्म का ज्येष्ठ है वह हरु और जो कर्म का ज्येष्ठ होगा वह सैम कहलायेगा और इस तरह सीमा के रक्षक और समृद्धि के देवता हरू सैम का जन्म हुआ.

14/12/2021

BAHU BALI--> HARU
KUSA VARTI--> SAIM
JAI HO BABA SABKA BHLA KARNA

14/12/2021

SAIM-->SAKALI....
HARU-->BHANARI....
BALA-->GORIYA.............

14/12/2021

HARIDWAR-- KA--HARJU
JHAGAR-- KA-- SAIM
CHAMPAWAT-- KA --GOLJU

Address

Vill-Naugwanath, Block-Khatima , Dist-U.S. NAGAR
Khatima
262308

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