14/12/2021
सैम देवता की जागर में गाई जाने वाली कहानी
कहते हैं कि सैम ज्यूँ छिपुलाकोट की रानी पर मोहित हो गए थे।या कुछ इस प्रकार बताते हैं कि सैम देवता बहुत सुंदर थे, उनकी तेजस्वी कांति को देख छिपलकोट की रानियां उन पर मोहित हो गईं। और छिपुलाकोट के राजा ने उन्हें बंदी बना कर कारागार में डाल दिया। इधर हरू अपनी मौसी के वहाँ रह रहे थे, वो अपने भाई को छुड़ाने के लिए प्रयासरत थे। सैमज्यूँ को कैद में रहते रहते 12 वर्ष हो गए, इधर हरू परेशान थे , और वो अपनी मौसी के पशुओं के ग्वाले जाते वहाँ अपनी पसंदीदा मुरली नरबाड़ी को बजाते थे।
एक दिन स्वर्ग लोक की इन्द्राणी ने उस मुरली की धुन को सुना,वो मोहित हो गई,उसने इंद्र देव से कहा, हे प्रभु इस मानव का कलेजा चाहिए मुझे। तब इंद्रदेव ने अपने सेवको को आज्ञा का पालन करने का हुक्म दिया । तब हरज्यूँ की माता जी कालानीरा भी उस समय स्वर्ग में होती है, और जब वो वहाँ मुरली की धुन सुनती है,तो समझ जाती है, ये हो न हो मेरा हरू ही है।
माँ कालानीरा को जब यह पता चलता है,कि इंद्राणी उसके पुत्र का कलेजा मांग रही है,तो वह इंद्र और इंद्राणी के पास गई,उनसे क्षमा याचना की,और स्वंय अपने पुत्र को स्वप्न में दर्शन देकर पूछा,की तुम क्यों परेशान हो ? तब हरू ने बताया कि मेरा भाई सैम 12 वर्ष से छिपालकोट में बंदी है, और मैं उसे मुक्त नहीं करा पा रहा हूँ। मै अपने भाई सैम को मुक्त कराकर ही, हंसुलीगड़ में अपनी मौसी और भाभियों के पास जाऊंगा। ( सैम देवता की जागर )
हरज्यू का अडिग प्रण देख कर , मा कालानीरा डर गई,उन्होंने दुश्मन देश के सारे संकट और व्याधियां बताई, लेकिन हरू नही माने । तब थक हार कर माँ ने कहा, तुझे जाना ही है तो जा, लेकिन अकेले मत जाना, अपने भांजे गोरिया को साथ लेकर जाना। धौली धुमाकोट में हमारी हँसुली घोड़ी है, और भंडार की चाबी है,वहा से हँसुली घोड़ी और सोना चांदी ले जाना, तुम्हारे काम आएगी।
इतने में हरू की नींद खुल गई, उन्होंने सपने में माँ के बताए अनुसार सबसे पहले अपने भांजे बाला गोरिया को बुलाया । गोरिया को सारी स्थिति से अवगत करा कर ,दोनो मामा भांजे ,जोगिया वस्त्र डाल कर छिपालकोट को निकल गए। तल्ला जोशीमठ पहुँच कर हरज्यूँ ने गोरिया से कहाँ ,कि तुम भिक्षाटन करके लाओ। मामू की आज्ञा पा कर गोरिया, तल्ला जोशीमठ भिक्षा मांगने पहुच गए। लेकिन वहाँ उन्हें किसी ने भी भिक्षा नही दी, वहाँ के लोगो ने बहाने बना कर खाली लौटा दिया।
गोरिया खाली हाथ मामू के पास वापस आ गए, तब गोरिया महाराज ने हरज्यूँ को सारी बात बता दी। इस बात को सुनकर हरू को क्रोध आ गया, उन्होंने बभूत की फूंक मार कर,तल्ला जोशीमठ में हड़कम्प मचा दिया। जब तक वो उन जोगियों को ढूढ़ते,तब तक हरू और बाला गोरिया ,मल्ला जोशीमठ के ओर चले गए। वहाँ के लोगो ने उनका स्वागत किया, और उनको आदर पूर्वक खाना खिलाया। उस गाँव के बाहर एक बुढ़िया अकेली कुटिया में रहती थी। हरू और गोरिया उस बुढ़िया के पास गए,छिपुलाकोट का रास्ता पूछने के लिए, तब बुढ़िया ने बताया कि, छिपुलाकोट जाने वाले रास्ते मे एक बड़ा खेत मिलेगा ,जिसका नाम सासू बुवारी खेत है। उस खेत से आगे को दो रास्ते होंगे,उसमे से एक रास्ता तालाब की ओर जाता है,एक छिपुलाकोट । उन दो रास्तों के शुरवात में नोमना मसाण की बहिन हसुला रहती है, वह लोगो को गलत रास्ता बता कर तालाब की तरफ भेज देती है, वहाँ उसका भाई नौमणा मसाण ,सब इंसान जानवरों को पूरा निगल जाता है।अब हरू और गोरिया देव पहुच गए सासु बुवारी खेत मे,उनको हसुला तो नही मिली, मगर हरू ने गोरिया को कहा कि घोड़ी को पानी पिला दे, गोरिया घोड़ी को पानी पिलाने तालाब पर गए। तब वहाँ नौमणा मसाण उनकी घोड़ी को निगल गया।
वापस आ कर बाला गोरिया ने मामू को सब बताया , हरज्यूँ को आता है गुस्सा, और उन्होंने 22 मन का लोहे का गज धारी लटुवा को याद किया, ( 22 मन लगभग 880 किलो या हजार किलो की लोहे की छड़ी या भाला, जिसे धारण करते थे हरू देवता के भाई लटुवा ) और 22 देवियों को , 16 एड़ियो को और 52 वीरो और 64 जोगियों को याद किया ,और अपने सेवक भनारी, उजेइया को भी बुलाया,वो सभी हरू देवता की पुकार सुन तत्काल आ गए। फिर वे सब लोग दल बल के साथ, छिपुलाकोट को चले गए, वहाँ उन्होंने जोगी के वेश बना कर, राज्य के बाहर 1 दाना चावल तथा आधा दाना दाल का डाल कर खिचड़ी बनाने लगे।
उस राज्य की औरतें वहा पानी भरने आई,तो उन्होंने तेजस्वी जोगियो को देख कर चमत्कृत हो गई। उन स्त्रियों ने राज्य के पहरे को बता दिया सब। प्रहरियों ने उनको ललकारा, तब हरू देव ने कहा कि पहले आप खिचड़ी खा लो। तब परहरेदारो ने उनकी खिंचड़ी का मजाक बनाया, कि डेढ़ दाने की खिचड़ी से क्या होगा। मगर जोगियो के आग्रह करने पर, वो खाने बैठ गए। डेढ़ दाने खिंचड़ी से सबको तृप्ति हो गई। ये चमत्कार देख कर प्रहरी हैरान हो गए। वो हरू देवता के चरणों मे गिर के अपने साथ रखने आग्रह करने आगे, बोले आप के साथ रहेंगे ,आप के साथ कम से कम भोजन जी भर तो मिलेगा।
तब छिपुलाकोट के परहरेदारो को अपनी तरफ मिला कर हरू ने सारी गुप्त जानकारी पता कर ली, फिर उन्होंने अपने प्रिय भांजे को भेजा। बाला गोरिया बिल्ली का रूप धारण कर , सैम ज्यूँ की स्थिति की रेकी कर के आ गए ,और अपने मामू को बता दिया। सारी स्थिति स्पष्ट होने के बाद हरू ने अपने दल बल, लटुवा ,भनारी, उजेइया, अन्य दल के साथ छिपुलाकोट पर आक्रमण कर दिया।
उधर छिपुला भाइयों को भी पता चल गया,वो भी लड़ने आ गए अपने दल बल के साथ। दोनों तरफ से घमासान युद्ध छिड़ गया। राजा हरू , भांजे गोरिया और लटुवा और उनकी सेना ने अदम्य साहस और युद्ध कौशल दिखाया,और छिपुलाकोट के भाईयों और उनकी सेना को हराकर सैमज्यूँ को कारागार से मुक्त कराकर ले आये।