Radha Madhav Sankirtan Mandal, Bareilly

Radha Madhav Sankirtan Mandal, Bareilly Sankirtan Mandal
(1)

Radhe Radhe!!!
21/08/2026

Radhe Radhe!!!

21/08/2026

Jai Ho!

21/08/2026

विगत कल फर्रुखाबाद में दिव्य हिंडोला संकीर्तन उत्सव के दृश्य!

🚩🕉️*राष्ट्रीय गीत "ॐ वन्दे मातरम्" के सभी छह पदों का संस्कृत मूल एवं उनका क्रमशः हिन्दी अनुवाद नीचे प्रस्तुत है:*💥*ॐ वंद...
21/08/2026

🚩🕉️*राष्ट्रीय गीत "ॐ वन्दे मातरम्" के सभी छह पदों का संस्कृत मूल एवं उनका क्रमशः हिन्दी अनुवाद नीचे प्रस्तुत है:*💥

*ॐ वंदे मातरम्*

*​प्रथम पद ​मूल (संस्कृत):*
वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्यश्यामलां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
*​हिन्दी अनुवाद:*
माँ, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ!
तुम स्वच्छ और शीतल जल से परिपूर्ण हो,
सुस्वादु फलों से भरी हुई हो,
दक्षिण की मलय पर्वत की सुगंधित हवाओं से शीतल हो,
और लहलहाती हरी-भरी फसलों से सुशोभित हो।
हे माँ! मैं तुम्हें नमन करता हूँ।

*​द्वितीय पद ​मूल (संस्कृत):*
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीम्
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम्
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम्॥
वन्दे मातरम्॥
*​हिन्दी अनुवाद:*
तुम्हारी रातें उज्ज्वल और मनमोहक चाँदनी से खिली रहती हैं,
तुम खिले हुए फूलों और घने वृक्षों से सजी हुई हो,
सदैव मधुर मुस्कान वाली और मीठी वाणी बोलने वाली हो,
सुख प्रदान करने वाली और वरदान देने वाली हे माँ!
मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।

*​तृतीय पद ​मूल (संस्कृत):*
कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले
कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले,
अबला केन मा एत बले।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्
रिपुदलवारिणीं मातरम्॥
वन्दे मातरम्॥
*​हिन्दी अनुवाद:*
करोड़ों कंठों की भीषण जय-ध्वनि जिसके साथ गूंजती हो,
करोड़ों भुजाओं में जिसने चमचमाती तीखी तलवारें थाम रखी हों,
इतनी शक्ति होते हुए भी, हे माँ, तुम्हें कोई अबला (कमज़ोर) कैसे कह सकता है?
अपार शक्तियों को धारण करने वाली, संकटों से उबारने वाली (तारिणी),
और शत्रुओं की सेना का संहार करने वाली हे माँ!
मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।

*​चतुर्थ पद ​मूल (संस्कृत):*
तुमि विद्या, तुमि धर्म,
तुमि हृदि, तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणाः शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदयाते तुमि मा भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे॥
वन्दे मातरम्॥
*​हिन्दी अनुवाद:*
तुम ही हमारा ज्ञान हो, तुम ही हमारा धर्म हो,
तुम ही हमारा हृदय हो और तुम ही हमारी अंतरात्मा हो,
हमारे शरीर में प्रवाहित होने वाले प्राण भी तुम ही हो।
हमारी भुजाओं की शक्ति तुम हो,
हमारे हृदय की भक्ति तुम हो,
हर मंदिर-देवालय में स्थापित होने वाली प्रतिमा केवल तुम्हारी ही है।
हे माँ! मैं तुम्हें नमन करता हूँ।

*​पंचम पद ​मूल (संस्कृत):*
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्,
नमामि कमलां अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलां मातरम्॥
वन्दे मातरम्॥
*​हिन्दी अनुवाद:*
दस भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाली देवी दुर्गा तुम ही हो,
कमल के फूलों पर विराजने वाली माँ लक्ष्मी (कमला) तुम ही हो,
विद्या और ज्ञान देने वाली माँ सरस्वती (वाणी) भी तुम ही हो।
मैं तुम्हें नमन करता हूँ,
उस निष्कलंक, अनुपम, पावन,
तथा उत्तम जल और फलों से परिपूर्ण माँ को मेरा प्रणाम।

*​षष्ठम पद ​मूल (संस्कृत):*
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्
धरणीं भरणीं मातरम्॥
वन्दे मातरम्॥
*​हिन्दी अनुवाद:*
सांवली छटा वाली, सरल, सदा मुस्कुराने वाली और सुंदर आभूषणों से सजी,
हम सबका पालन-पोषण करने वाली और धारण करने वाली हे धरती माँ!
मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
वन्दे मातरम्!

*🚩ॐ वंदे मातरम्*🚩

19/08/2026

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