Mata Vaishno Devi

Mata Vaishno Devi माता वैष्णो देवी आप सभी के जीवन मे सुख, Prem se bolo jai mata di

अंजनी मां
19/07/2020

अंजनी मां

Mata Harsiddhi ji ko Dekhte Hi Lyk & Share karoBigde Kaam Ban Jaayenge...
21/06/2020

Mata Harsiddhi ji ko Dekhte Hi Lyk & Share karo
Bigde Kaam Ban Jaayenge...

जय श्री महाकालश्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जी का भस्म श्रंगार आरती दर्शन!। ुक्रवार
19/06/2020

जय श्री महाकाल
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जी का भस्म श्रंगार आरती दर्शन!। ुक्रवार

॥ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चैः॥🌹🌿🌺🌼🌷🌹🌿🌺🌼🌷🌹🌿🌺🌼🌷*🍁आज 18/जून/2020**"त्रिकुटा पर्वत" से अद्भुत प्राकृतिक पावन दिव्य पि...
18/06/2020

॥ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चैः॥
🌹🌿🌺🌼🌷🌹🌿🌺🌼🌷🌹🌿🌺🌼🌷
*🍁आज 18/जून/2020*
*"त्रिकुटा पर्वत" से अद्भुत प्राकृतिक पावन दिव्य पिंडी स्वरूप
💢माँ वैष्णों जी💢के सुंदर आलौकिक सांयकालीन "श्रृंगार दर्शन"
🌹🌿🌺🌼🌷🌹🌿🌺🌼🌷
जयकारा शेरांवाली दा*
*बोलो सच्चे दरबार की जय
*😊💧...जय माता दी.

 ाता_दीमेरी हर अर्जी को माँ तूने मंजूर किया है--बिन मांगे ही तूने मुझे भरपूर दिया है---इसी तरह जीवन मेरा खुशहाल बनाये रख...
17/06/2020

ाता_दी
मेरी हर अर्जी को माँ तूने मंजूर किया है--
बिन मांगे ही तूने मुझे भरपूर दिया है---
इसी तरह जीवन मेरा खुशहाल बनाये रखना---
लेता रहूँगा तेरा नाम बस कृपा बनाये रखना

16/06/2020
Jai Mata Di
15/06/2020

Jai Mata Di

कहते हैं हर स्त्री में देवी का वास है,इसलिये तो हर स्त्री बहुत खास है,किसी स्त्री को अबला और बेबस समझने की भूल कभी न करन...
14/06/2020

कहते हैं हर स्त्री में देवी का वास है,
इसलिये तो हर स्त्री बहुत खास है,
किसी स्त्री को अबला और बेबस
समझने की भूल कभी न करना,
अपने कुकर्मों का परिणाम सोच
कर ज़रूर डरना।

कोई भी स्त्री लाचार नहीं,
उसकी अवहेलना का दुस्साहस
कभी करना नहीं,
हर स्त्री है माँ दुर्गा का अवतार,
वो पूजनीय है उनका सम्मान
करना ही तुम्हारा परम धर्म है
कर लो ये स्वीकार।

भवरागिनी भवतारिणीमिथ्यपथ का सत्य तुमशिवसंगिनी गिरिनंदिनीसब नश्वरों में नित्य तुमतुम सृजन, सौंदर्य तुमतुम प्रलय भूचाल भीग...
11/06/2020

भवरागिनी भवतारिणी
मिथ्यपथ का सत्य तुम
शिवसंगिनी गिरिनंदिनी
सब नश्वरों में नित्य तुम

तुम सृजन, सौंदर्य तुम
तुम प्रलय भूचाल भी
गंगा हो तुम मंदाकिनी
तुम अनल उदगार भी

तुष्टि तुम्हीं तृप्ति तुम्हीं
तुम क्षुधा सन्सार की
वार की, प्रतिकार की
तुम गर्जना संहार की

सत्य सनातन देवि तुम
माया का उत्पात तुम्हीं
वरप्रदायिनी शक्ति तुम
दण्ड का आघात तुम्हीं

तुम्हीं आदि इति तुम्हीं
तुम्हीं वृद्धि क्षति तुम्हीं
ध्यान का चिरमौन तुम
मन्त्र की आहुति तुम्हीं

तुम निशा का अंधकार
तुम दिवाकर तेज भी
तुम शिथिलता योग की
तुम पवन का वेग भी

सिंहवाहिनी उद्धारिणी
आओ अब आह्वान है
आओ विपदसंहारिणी
कोटि नमन साष्टांग है!

कोटि नमन साष्टांग है!

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