जय माता तारा पटन्ती - पड़ेई

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जय माता तारा पटन्ती - पड़ेई Fiends, please come with pure heart and have Blessings of Godess Mother. Please use polite words .

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25/12/2025

तलाड़ी (धारा) चामुण्डा माँ के मंदिर की प्रतिष्ठा 25/12/2025 को सम्पन्न हुई 🚩

समस्त भक्त जनों को बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें ❤️🙏🚩

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जय माँ तारा (तारा देवी -शिमला)तू ही शिव है, तू ही माँ भवानी।तुझसे मेरा क्या नाता, बस तू ही जानी।।।जय माँ भवानी, जय माँ भ...
23/11/2025

जय माँ तारा (तारा देवी -शिमला)
तू ही शिव है, तू ही माँ भवानी।
तुझसे मेरा क्या नाता, बस तू ही जानी।।।
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी ❤️🙏🚩


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आज की माता तारा पटन्ती की  रात्री भियाली ठेलरू पर इस वर्ष की अंतिम रात्री होगी, कल सांय माता समस्त भक्त जनों के साथ वापि...
18/09/2025

आज की माता तारा पटन्ती की रात्री भियाली ठेलरू पर इस वर्ष की अंतिम रात्री होगी, कल सांय माता समस्त भक्त जनों के साथ वापिस पड़ेई प्रस्थान करेंगे ❤️🚩

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समस्त भक्त जनों को शौईरी साज़े की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें 🚩🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷कालिदास बोले :- माते पानी पिला दीजिए बड़ा पुण...
16/09/2025

समस्त भक्त जनों को शौईरी साज़े की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें 🚩
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

कालिदास बोले :- माते पानी पिला दीजिए बड़ा पुण्य होगा.🙏
स्त्री बोली :- बेटा मैं तुम्हें जानती नहीं. अपना परिचय दो।
मैं अवश्य पानी पिला दूंगी।
कालिदास ने कहा :- मैं पथिक हूँ, कृपया पानी पिला दें।
स्त्री बोली :- तुम पथिक कैसे हो सकते हो, पथिक तो केवल दो ही हैं सूर्य व चन्द्रमा, जो कभी रुकते नहीं हमेशा चलते रहते। तुम इनमें से कौन हो सत्य बताओ।

कालिदास ने कहा :- मैं मेहमान हूँ, कृपया पानी पिला दें।
स्त्री बोली :- तुम मेहमान कैसे हो सकते हो ? संसार में दो ही मेहमान हैं।
पहला धन और दूसरा यौवन। इन्हें जाने में समय नहीं लगता। सत्य बताओ कौन हो तुम ?

(अब तक के सारे तर्क से पराजित हताश तो हो ही चुके थे)

कालिदास बोले :- मैं सहनशील हूं। अब आप पानी पिला दें।
स्त्री ने कहा :- नहीं, सहनशील तो दो ही हैं। पहली, धरती जो पापी-पुण्यात्मा सबका बोझ सहती है। उसकी छाती चीरकर बीज बो देने से भी अनाज के भंडार देती है, दूसरे पेड़ जिनको पत्थर मारो फिर भी मीठे फल देते हैं। तुम सहनशील नहीं। सच बताओ तुम कौन हो ?
(कालिदास लगभग मूर्च्छा की स्थिति में आ गए और तर्क-वितर्क से झल्लाकर बोले)

कालिदास बोले :- मैं हठी हूँ ।

स्त्री बोली :- फिर असत्य. हठी तो दो ही हैं- पहला नख और दूसरे केश, कितना भी काटो बार-बार निकल आते हैं। सत्य कहें ब्राह्मण कौन हैं आप ?
(पूरी तरह अपमानित और पराजित हो चुके थे)

कालिदास ने कहा :- फिर तो मैं मूर्ख ही हूँ ।

स्त्री ने कहा :- नहीं तुम मूर्ख कैसे हो सकते हो।
मूर्ख दो ही हैं। पहला राजा जो बिना योग्यता के भी सब पर शासन करता है, और दूसरा दरबारी पंडित जो राजा को प्रसन्न करने के लिए ग़लत बात पर भी तर्क करके उसको सही सिद्ध करने की चेष्टा करता है।
(कुछ बोल न सकने की स्थिति में कालिदास वृद्धा के पैर पर गिर पड़े और पानी की याचना में गिड़गिड़ाने लगे)

वृद्धा ने कहा :- उठो वत्स ! (आवाज़ सुनकर कालिदास ने ऊपर देखा तो साक्षात माता सरस्वती वहां खड़ी थी, कालिदास पुनः नतमस्तक हो गए)
माता ने कहा :- शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार । तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया और अहंकार कर बैठे इसलिए मुझे तुम्हारे चक्षु खोलने के लिए ये स्वांग करना पड़ा।

कालिदास को अपनी गलती समझ में आ गई और भरपेट पानी पीकर वे आगे चल पड़े।

शिक्षा :-
विद्वत्ता पर कभी घमण्ड न करें, यही घमण्ड विद्वत्ता को नष्ट कर देता है।
दो चीजों को कभी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए.....
अन्न के कण को
"और"
आनंद के क्षण को...

साभार फेसबुक🙏
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Credits: Chet Bharti

जुंगरू देवता का नव निर्वित मंदिर , हेसीरा शौरन (जल्लूग्राँ) 11-08-2025
12/08/2025

जुंगरू देवता का नव निर्वित मंदिर , हेसीरा शौरन (जल्लूग्राँ) 11-08-2025

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