23/05/2025
मंत्र: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्. उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
अर्थ: हम उन तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो समस्त प्राणियों के पोषणकर्ता हैं.कृपया हमें मृत्यु और संकटों से मुक्त करें, जैसे एक पका हुआ फल बेल से स्वतः गिर जाता है.
लाभ: यह मंत्र सबसे शक्तिशाली शिव मंत्रों में से एक है. इसका जाप करने से न केवल व्यक्ति दीर्घायु होता है, बल्कि उसे बीमारियों, दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु से भी सुरक्षा मिलती है. इसे शिव जी की कृपा प्राप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है.