19/08/2026
छतरी पलेच…
यह जो दृश्य आप देख रहें है ये पलेच के पूर्व का है जब मगरू महादेव जी के गूर श्री हनुमान एवं समस्त देवी-देवता को प्रणाम कर अपनी साधना समाप्त करते हैं। साधना से अभिप्राय यह है कि जिस दिन पलेच होती है उसस दिन मगरू महादेव जी के गूर सुबह से हूँ मंदिर के शीर्ष गुंबद पर बैठ जाते है और शाम तक जब तक पलेच की स्थापना ना होती तब तक बिना किसी से बात किए व बिना खाये पिए मंदिर के गर्भगृह के ऊपर विराजमान रहते है। यह भी एक तपस्या ही है जो गूर को प्रतिवर्ष निभानी होती है।
पलेच का पर्व एक इतना शक्तिशाली पर्व है जब मंदिर में सभी शक्तियां जागृत होकर स्थापित होती है। जय हो सभी शक्तियों की..
॥जय मगरू महादेव जी॥