26/03/2026
मारुति हनुमान जी कैसे बने
और
हनुमान जी का अर्थ क्या है
प्रिय हनुमान भक्तों क्या आपको पता है हनुमान जी का पहला नाम क्या था शायद ही कुछ लॉग जानते हो पर आज मै सबको बताता हुँ, भक्तों हनुमान जी का पहला नाम था मारुति, मारुती नंदन मतलब वायु पुत्र या पवन पुत्र अब बात आती है कि फिर हनुमान नाम कैसे पड़ा, वैसे तो एक कथा है जिसमे कहा जाता है कि एक बार सूर्य ग्रहण का समय था राहु सूर्य को ग्रहण लगाने जय रहा था कि उसी समय हनुमान जी पृथ्वी लॉक से लाल सूर्य को देख कर उसे कोई फल समझ कर खाने के लिए सूर्य लोक पहुंच जाते है और सूर्य को राहु के ग्रहण लगाने से पहले निगल लेते है। अब राहु घबरा जाता है और दौड़ कर इंद्र के पास जाता है इंद्र राहु को देख कर बोलते है कि राहु तुम इस समय यहाँ तुमको तो इस समय सूर्य ग्रहण करना था, राहु घबरा कर बोलता है कि है देवराज एक वानर पृथ्वी लोक से आया और मेरे सूर्य को ग्रहण करने से पहले ही सूर्य को निगल गया
सुनकर इंद्र को बड़ा आश्चर्य हुआ बोले ऐसा कैसे हो सकता है चलो अभी मेरे साथ और देखते हैं मारुती वापस पृथ्वी लोक जा रहै है, तो इंद्र ने रोक कर कहा अरे वानर बालक तुम कौन हो जिसने राहु के सूर्य ग्रहण से पहले सूर्य को निगल लिया, मारुति बोले मै मारुति नंदन हुँ, मुझे भूख लगी थी इसलिए सूर्य को निगल लिया तब इंद्र बोले सूर्य को छोड़ दो जिससे राहु उसको ग्रहण कर सूर्य ग्रहण कि प्रक्रिया पूरी कर सकें
मारुति नंदन ने मना कर दिया इंद्र के बार बार कहने पर भी पवन पुत्र ने उनकी नहीं सुनी जिससे इंद्र को क्रोध आ गया और उन्होंने वज्र से मारुति पर प्रहार कर दिया वो वज्र मारुति कि ठुड्डी पर लगा जिससे मारुति का जबड़ा थोड़ा सा मुड़ गया और वो मूर्छीत बेहोश गए।
ज़ब ये बात वायु देव को पता चली कि इंद्र ने मारुति पर वज्र प्रहार कर घायल और मूर्छेत कर दिया है तो वो क्रोधित हो गए और अपना प्रवाहन बंद कर दिया जिससे जिससे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में हाहाकार मच गया लोगों को सांस लेना मुश्किल हो गया, सब परेशान हो गए देवता भयभीत हो गए, सभी ने वायुदेव के पास जाकर प्रार्थना की कि वो अपना प्रवाहन फिर से शुरू करें वो नहीं माने तब ब्रह्मा जी ने पवन देव से कहा कि हम सब देवता आपके पुत्र को अलग अलग वरदान देंगे जिससे वो और भी शक्तिशाली हो जायँगे फिर सभी देवताओं ने मारुती को वरदान दिए
इस वज्र प्रहार के कारण उनकी ठुड्डी थोड़ी सी मुड़ गईं और ठुड्डी को संस्कृत में हनु कहते है जिससे उसी दिन से मारुति का नाम हनुमान पड़ गया
,, इसका अध्यात्मिक अर्थ है _ जो अपने मान का हनन करे करे मतलब जिसमे मय ना हो अहंकार ना हो पूरी रामयाण या राम चरित मानस में हनुमान जी ने अपना परिचय कहीं हनुमान हूँ कर नहीं दिया ज़ब भी कहीं परिचय दिया तो या पवन पुत्र ज्यादातर राम भक्त या राम सेवक ही बताया और अहंकार तो छू भी नहीं गयाकितना भी बड़ा काम किया हो पर कभी नहीं कहा कि ये काम मैंने किया हमेसा कहा कि ये काम प्रभु राम कि कृपा से हुआ इसमें मेरा कोई भी श्रेय नहीं है
हनुमान जी को देवताओं ने क्या क्या आशीर्वाद प्रदान किये
1. सूर्य देव का वरदान
हनुमान जी ने सूर्य देव को गुरु बनाकर शिक्षा प्राप्त की।
सूर्य देव ने उन्हें असीम ज्ञान, बुद्धि और विद्या का वरदान दिया।
2. इन्द्र देव का वरदान
बचपन में इन्द्र ने वज्र से प्रहार किया था, जिससे उनकी ठोड़ी (हनु) घायल हुई।
बाद में प्रसन्न होकर इन्द्र ने वरदान दिया कि अब वज्र भी उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा पाएगा।
इसी कारण उनका नाम “हनुमान” पड़ा।
3. अग्नि देव का वरदान
अग्नि देव ने वर दिया कि अग्नि (आग) उन्हें कभी जला नहीं सकती।
यही कारण है कि लंका दहन में उन्हें कोई हानि नहीं हुई।
4. वायु देव का वरदान
वायु देव उनके पिता माने जाते हैं।
उन्होंने हनुमान जी को अतुलित बल, गति और उड़ने की शक्ति दी।
5. वरुण देव का वरदान
वरुण देव ने वर दिया कि जल उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता।
6. ब्रह्मा का वरदान
ब्रह्मा जी ने उन्हें दीर्घायु (लगभग अमरता) और किसी भी अस्त्र-शस्त्र से न मरने का वरदान दिया।
साथ ही रूप बदलने (रूपांतरण) की शक्ति भी दी।
7. यमराज का वरदान
यमराज ने वर दिया कि उन पर मृत्यु का प्रभाव नहीं होगा।
8. चंद्र देव का वरदान
चंद्र देव ने उन्हें शांत मन और तेजस्विता का आशीर्वाद दिया।
9. भगवान शिव का आशीर्वाद
हनुमान जी को शिव का अंश माना जाता है।
शिव जी से उन्हें अद्भुत शक्ति, साहस और भक्ति प्राप्त हुई।
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