26/01/2016
प्रभु की भक्ति के अलावा कोई वस्तु वांछनीय नहीं, सब निन्दनीय है इसलिये मनुष्य मात्र को चाहिए प्रभु की भक्ति निरंतर करें, जैसे गोरस बिना भोजन नीरस होते हैं, वैसे ही भक्ति के बिना मनुष्य का जीवन का व्यर्थ है । जब तुम उस शिव् के प्यारे बनोगे, प्रभु की भक्ति करोगे तब वह दयामय भगवान तुम्हारे लिए मोक्ष का द्वार खोल देगा, जिसके द्वारा तुम उसे देख सकते हो। मोहन वंशी वाले तुमको लांखो प्रणाम। कहते जाओ, शिव का प्यारा बनते जाओ, तत्त्व को जानना मामूली बात नहीं, गफलत का समय नहीं, यह भक्ति के बिना सुलभ नहीं, सत - चित् - आनन्दमाय भगवान की पहचान से ही जीवन का कल्याण हैं, वही पुरुषार्थ है, "तमसो माँ जोतिर्गमय" तमो रूपी अंधकार से ज्योतिरूपि प्रकाश में आइये, भगवान् आपका कल्याण ही है, सत्य कहो, ब्र्ह्माचर्या में रहो, भगवान् के बल पर अभिमान त्यागो और अभिमानी का संग भी अवश्य त्यागना, निष्काम सेवा करो और संतो की सेवा करो, उनके वचन के अनुसार चलो, आपके कल्याण का रास्ता वही सरल बनाएंगे। विस्वास रखो प्रभु सब में है, इसलिये जीव के प्यारे बनो, बड़ों का आदर करो, सम्मान देने लायक पुरुषों को अवश्य सम्मान देना। गुणों को देखकर स्वयं गुणी बनो, मानसिक दुःख दूर करो, प्रार्थना करो, दिल को शांत रखो तेरा स्वरूप शांत है, क्रूर नहीं, कृदित नहीं होना। सबमे प्रेम रखो, प्रेम में सचाई होनी चाहिए, मतलब क लिए नही। हे शिव सबका भला हो।