Aacharya Santosh Tiwari

25/07/2025
Jay bholenath
25/07/2025

Jay bholenath

ऊं नमः शिवाय हरि: ओम्,पहले तो भाण्ड प्रमाण मांगते रहते थे कि "कहां शिवलिंग पर दूध चढाने को कहा है", तब तो हम विशेष ध्यान...
24/07/2023

ऊं नमः शिवाय
हरि: ओम्,

पहले तो भाण्ड प्रमाण मांगते रहते थे कि "कहां शिवलिंग पर दूध चढाने को कहा है", तब तो हम विशेष ध्यान नहीं देते ​थे क्योंकि "जोर से बोलो जय माता दी" व हनुमान चालीसा से अधिक ज्ञान इनको कुछ होता नहीं है। तो शास्त्रीय वचन इन्हें प्रदान करना बन्दर को हीरकमणि देने के समान ही निर्थक है। किन्तु अब देखने में आता है कि भागवत करने वाले, एवं तथाकथित सिद्धियों स्वामीयों को भी इसमें सन्देह होने लगा है। वैसे इन महोदय के शास्त्रज्ञान को देखते हुए इन्हें भी किसी प्रकार के प्रमाण देने का महत्व नहीं दिखता किन्तु सामान्यजनों में कोई सन्देह उत्पन्न न हो इस हेतु एक शास्त्रीय प्रमाण यहां प्रदान करते हैं।

जलेन वृष्टिमाप्नोति व्याधिशांत्यै कुशोदकै।
दध्ना च पशुकामाय श्रिया इक्षुरसेन वै।।
मध्वाज्येन धनार्थी स्यान्मुमुक्षुस्तीर्थवारिणा।
पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात।।
बन्ध्या वा काकबंध्या वा मृतवत्सा यांगना।
जवरप्रकोपशांत्यर्थम् जलधारा शिवप्रिया।।
घृतधारा शिवे कार्या यावन्मन्त्रसहस्त्रकम्।
तदा वंशस्यविस्तारो जायते नात्र संशय:।।
प्रमेह रोग शांत्यर्थम् प्राप्नुयात मान्सेप्सितम।
केवलं दुग्धधारा च वदा कार्या विशेषत:।।
शर्करा मिश्रिता तत्र यदा बुद्धिर्जडा भवेत्।
श्रेष्ठा बुद्धिर्भवेत्तस्य कृपया शङ्करस्य च!!
सार्षपेनैव तैलेन शत्रुनाशो भवेदिह!
पापक्षयार्थी मधुना निर्व्याधि: सर्पिषा तथा।।
जीवनार्थी तू पयसा श्रीकामीक्षुरसेन वै।
पुत्रार्थी शर्करायास्तु रसेनार्चेतिछवं तथा।।
महलिंगाभिषेकेन सुप्रीत: शंकरो मुदा।
कुर्याद्विधानं रुद्राणां यजुर्वेद्विनिर्मितम्।

यजुर्वेद के रुद्रपाठ से महालिंग के अभिषेक में किन किन द्रव्यों का प्रयोग होने से क्या क्या लाभ होते हैं यहां कहा गया है। यहां स्पष्ट ही है कि

जीवनार्थी तू पयसा श्रीकामीक्षुरसेन वै।

एवं

पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात्।।

इसके अतिरिक्त भी कहा गया है कि

पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात् ।।
बन्ध्या वा काकबंध्या वा मृतवत्सा यांगना ।
सद्य पुत्रमवाप्नोति पयसा चाभिषेचनात् ।।

दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने से पुत्र की कामना वाले को पुत्र की प्राप्ति होती है। वन्ध्या, काकवन्ध्या या मृत्वत्सा को भी दुग्ध अभिषेक से सद्य पुत्रप्रा​प्ति होती है।

रुद्री से महादेव के अभिषेक से श्रेष्ठ कोई पूजा पाठ होता ही नहीं। रुद्री के पाठ से चारों वेदों के पारायण का फल प्राप्त हो जाता है।

स्वस्ति प्रजाभ्य: परिपालयन्तां न्याय्येन मार्गेण महीं महीशा:।
गोब्राह्मणेभ्य: शुभमस्तु नित्यं लाेकाः समस्ताः सुखिनाे भवन्तु।।

काले वर्षतु पर्जन्य:पृथिवी शस्यशालिनी।
देशोऽयं क्षोभरहितो ब्राह्मणा: सन्तु निर्भया:।।

ॐ असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मामृतं गमय ॥
ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः ॥

धर्म की जय हो
अधर्म का नाश हर
आचार्य सन्तोष तिवारी
7355269500
9451424340

जय महाकाल
20/01/2023

जय महाकाल

*दक्षिणा का महत्व*ब्राह्मणों की दक्षिणा हवन की पूर्णाहुति करके एक मुहूर्त ( 24 ) मिनट के अन्दर दे देनी चाहिये , अन्यथा म...
07/10/2022

*दक्षिणा का महत्व*

ब्राह्मणों की दक्षिणा हवन की पूर्णाहुति करके एक मुहूर्त ( 24 ) मिनट के अन्दर दे देनी चाहिये , अन्यथा मुहूर्त बीतने पर 100 गुना बढ जाती है , और तीन रात बीतने पर एक हजार , सप्ताह बाद दो हजार ,महीने बाद एक लाख , और संवत्सर बीतने पर तीन करोड गुना यजमान को देनी होती है । यदि नहीं दे तो उसके बाद उस यजमान का कर्म निष्फल हो जाता है , और उसे ब्रह्महत्या लग जाती है , उसके हाथ से किये जाने वाला हव्य - कव्य देवता और पितर कभी प्राप्त नहीं करते हैं । इसलिए ब्राह्मणों की दक्षिणा जितनी जल्दी हो देनी चाहिये ।

👆यह जो कुछ भी कहा है सबका शास्त्रोॆ में प्रमाण है ।👇

मुहूर्ते समतीते तु , भवेच्छतगुणा च सा ।

त्रिरात्रे तद्दशगुणा , सप्ताहे द्विगुणा मता ।।

मासे लक्षगुणा प्रोक्ता ,ब्राह्मणानां च वर्धते ।

संवत्सर व्यतीते तु , त्रिकोटिगुणा भवेत् ।।

कर्म्मं तद्यजमानानां , सर्वञ्च निष्फलं भवेत् ।

सब्रह्मस्वापहारी च , न कर्मार्होशुचिर्नर: ।।

🚩इसलिए चाणक्य ने कहा """नास्ति यज्ञसमो रिपु: """ मतलब यज्ञादि कर्म विधि से सम्पन्न हो तब लाभ अन्यथा सबसे बडे शत्रु की तरह है ।

🚩गीता में स्वयं भगवान ने कहा 👇

विधिहीनमसृष्टान्नं , मन्त्रहीनमदक्षिणम् ।

श्रद्धाविरहितं यज्ञं , तामसं परिचक्षते ।।

🚩बिना सही विधि से बनाया भोजन जैसे परिणाम में नुकसान करता है , वैसे ही ब्राह्मण के बोले गये मन्त्र दक्षिणा न देने पर नुकसान करते हैं ।

🚩शास्त्र कहते हैं लोहे के चने या टुकडे भी व्यक्ति पचा सकता है परन्तु ब्राह्मणों के धन को नहीं पचा सकता है ।किसी भी उपाय से ब्राह्मणों का धन लेने वाला हमेशा दु:ख ही पाता है । इस पर एक कहानी सुनाता हूँ शास्त्रों में वर्णित 👇

🚩 महाभारत का युद्ध चल रहा था , युद्ध के मैदान में सियार , आदि हिंसक जीव योद्धाओं के गरम -२ खून को पी रहे थे , इतने में ही धृष्टद्युम्न ने तलवार से पुत्रशोक से दु:खी निशस्त्र द्रोणाचार्य की गर्दन काट दी । तब द्रोणाचार्य के गरम -२ खून को पीने के लिए सियारिन दौडती है , तो सियार अपनी सियारिन से कहता है 👇

🚩प्रिये """ विप्ररक्तोSयं गलद्दगलद्दहति """

👆यह ब्राह्मण का खून है इसे मत पीना , यह शरीर को गला- गला कर नष्ट कर देगा । तब उस सियारिन ने भी ब्राह्मण द्रोणाचार्य का रक्तपान नहीं किया ।

🚩ऋषि - मुनियों का कर के रुप में खून लेने पर ही रावण के कुल का संहार हो गया ।इसलिए जीवन में कभी भी ब्राह्मणों के द्रव्य का अपहरण किसी भी रुप में नहीं करना चाहिये ।

🚩वित्तशाट्ठ्यं न कुर्वीत, सति द्रव्ये फलप्रदम ।

अनुष्ठान , पाठ - पूजन जब भी करवायें ब्राह्मणों को उचित दक्षिणा देनी चाहिये , और दक्षिणा के अतिरिक्त उनके आने - जाने का किराया आदि -२ पूछकर अलग से देना चाहिये ।

🚩उसके बाद विनम्रता से ब्राह्मणों की वचनों द्वारा भी सन्तुष्टि करते हुए आशीर्वाद देना चाहिये , ऐसा करने पर ब्राह्मण मुँह से नहीं बल्कि हृदय से आशीर्वाद देता है , और तब यजमान का कल्याण होता है ।

🚩यत्र भुंड्क्ते द्विजस्तस्मात् , तत्र भुंड्क्ते हरि: स्वयम् ।।

*_👆 जिस घर में इस तरह श्रद्धा से ब्राह्मण भोजन करवाया जाता है , वहाँ ब्राह्मण के रुप में स्वयं भगवान ही भोजन करते हैं । इत्यलम् - बहुत बडा हो जायेगा । धन्यवाद , पढें और आचरण भी करे ।*आचार्य पं सन्तोष तिवारी मोबाइल नंबर 7355269500 जय राधे राधे
हर हर महादेव ,🙏

बिल्ववृक्ष--1. बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते l2. अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मो...
30/07/2022

बिल्ववृक्ष--
1. बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते l
2. अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है l
3. वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है l
4. चार, पांच, छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्र पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है l
5. बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है एवं बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
6. सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता है।
7. बेल वृक्ष को सींचने से पित्र तृप्त होते है।
8. बेल वृक्ष और सफ़ेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
9. बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे ।
10. जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी शिव लिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी जीव सभी पापों से मुक्त हो जाते है l
11. बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है।
कृपया बिल्व पत्र का पेड़ जरूर लगाये । बिल्व पत्र के लिए पेड़ को क्षति न पहुचाएं l

शिवजी की पूजा में ध्यान रखने योग्य बात l

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को कौन सी चीज़ चढाने से मिलता है क्या फल -
किसी भी देवी-देवता का पूजन करते समय उनको अनेक चीज़ें अर्पित की जाती है। प्रायः भगवान को अर्पित की जाने वाली हर चीज़ का फल अलग होता है। शिव पुराण में इस बात का वर्णन मिलता है की भगवान शिव को अर्पित करने वाली अलग-अलग चीज़ों का क्या फल होता है। शिवपुराण के अनुसार जानिए कौन सा अनाज भगवान शिव को चढ़ाने से क्या फल मिलता है:
1. भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
2. तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
3. जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।
4. गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद गरीबों में वितरीत कर देना चाहिए।

शिव पुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से उसका क्या फल मिलता है -
1. ज्वर (बुखार) होने पर भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जलधारा द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।
2. नपुंसक व्यक्ति अगर शुद्ध घी से भगवान शिव का अभिषेक करे, ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा सोमवार का व्रत करे तो उसकी समस्या का निदान संभव है।
3. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिश्रित दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।
4. सुगंधित तेल से भगवान शिव का अभिषेक करने पर समृद्धि में वृद्धि होती है।
5. शिवलिंग पर ईख (गन्ना) का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।
6. शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
7. मधु (शहद) से भगवान शिव का अभिषेक करने से राजयक्ष्मा (टीबी) रोग में आराम मिलता है।

शिव पुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन का फूल चढ़ाया जाए तो उसका क्या फल मिलता है -
1. लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर भोग व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
3. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने से मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।
4. शमी पत्रों (पत्तों) से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।
6. जूही के फूल से शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
7. कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।
8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर
सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
10. लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है।
11. दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है।💐💐

🌄सुप्रभातम🌄🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓🌻सोमवार, २० जून २०२२🌻सूर्योदय: 🌄 ०५:१९सूर्यास्त: 🌅 १९:०३चन्द्रोदय: 🌝 २४:२४चन्द्रास्त: 🌜११:२५अ...
20/06/2022

🌄सुप्रभातम🌄
🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓
🌻सोमवार, २० जून २०२२🌻

सूर्योदय: 🌄 ०५:१९
सूर्यास्त: 🌅 १९:०३
चन्द्रोदय: 🌝 २४:२४
चन्द्रास्त: 🌜११:२५
अयन 🌕 उत्तरायने (उत्तरगोलीय
ऋतु: 🌞 ग्रीष्म
शक सम्वत: 👉 १९४४ (शुभकृत)
विक्रम सम्वत: 👉 २०७९ (राक्षस)
मास 👉 आषाढ
पक्ष 👉 कृष्ण
तिथि 👉 सप्तमी (२१:०१ अष्टमी)
नक्षत्र 👉 पूर्वाभाद्रपद (२८:३५ से उत्तर भाद्रपद)
योग 👉 प्रीति (०८:२८ से आयुष्मान्)
प्रथम करण 👉 विष्टि (०९:३४ तक)
द्वितीय करण 👉 बव (२१:०१ तक)
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॥ गोचर ग्रहा: ॥
🌖🌗🌖🌗
सूर्य 🌟 मिथुन
चंद्र 🌟 मीन (२२:३५ से)
मंगल 🌟 मीन (उदित, पश्चिम, मार्गी)
बुध 🌟 वृष (उदित, पूर्व, मार्गी)
गुरु 🌟 मीन (उदित, पूर्व, मार्गी)
शुक्र 🌟 वृष (उदित, पूर्व, वक्री)
शनि 🌟 कुम्भ (उदित, पूर्व, वक्री)
राहु 🌟 मेष
केतु 🌟 तुला
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शुभाशुभ मुहूर्त विचार
⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳
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अभिजित मुहूर्त 👉 ११:५० से १२:४७
अमृत काल 👉 २०:४१ से २२:१६
विजय मुहूर्त 👉 १४:३९ से १५:३६
गोधूलि मुहूर्त 👉 १९:०७ से १९:३१
सायाह्न सन्ध्या 👉 १९:२१ से २०:२१
निशिता मुहूर्त 👉 २३:५९ से २४:३८
राहुकाल 👉 ०७:०१ से ०८:४७
राहुवास 👉 उत्तर-पश्चिम
यमगण्ड 👉 १०:३३ से १२:१८
होमाहुति 👉 गुरु (२८:३५ तक)
दिशाशूल 👉 पूर्व
नक्षत्र शूल 👉 दक्षिण (२८:३५ तक)
अग्निवास 👉 आकाश
भद्रावास 👉 मृत्युलोक (०९:३४ तक)
चन्द्रवास 👉 पश्चिम (उत्तर २२:३५ से)
शिववास 👉 श्मशान में (२१:०१ गौरी के साथ)
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☄चौघड़िया विचार☄
॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ - अमृत २ - काल
३ - शुभ ४ - रोग
५ - उद्वेग ६ - चर
७ - लाभ ८ - अमृत
॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ - चर २ - रोग
३ - काल ४ - लाभ
५ - उद्वेग ६ - शुभ
७ - अमृत ८ - चर
नोट-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
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शुभ यात्रा दिशा
🚌🚈🚗⛵🛫
उत्तर-पश्चिम (दर्पण देखकर अथवा खीर का सेवन कर यात्रा करें)
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तिथि विशेष
🗓📆🗓📆
विवाहादि मुहूर्त कुम्भ लग्न रात्रि १०:४५ से १२:१५, मेष-वृष लग्न अंतरात्रि ०२:०५ से प्रातः ०५:१६ तक, नींवखुदाई एवं गृहारम्भ मुहूर्त प्रातः ०९:०२ से १०:४५ तक, आदि।
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आज जन्मे शिशुओं का नामकरण
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आज २८:३५ तक जन्मे शिशुओ का नाम
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमश (से, सो, द, दी) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशु का नाम उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण अनुसार क्रमशः (दू) नामाक्षर से रखना शास्त्रसम्मत है।
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उदय-लग्न मुहूर्त
मिथुन - २९:०० से ०७:१५
कर्क - ०७:१५ से ०९:३७
सिंह - ०९:३७ से ११:५५
कन्या - ११:५५ से १४:१३
तुला - १४:१३ से १६:३४
वृश्चिक - १६:३४ से १८:५४
धनु - १८:५४ से २०:५७
मकर - २०:५७ से २२:३८
कुम्भ - २२:३८ से २४:०४
मीन - २४:०४ से २५:२८
मेष - २५:२८ से २७:०१
वृषभ - २७:०१ से २८:५६
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पञ्चक रहित मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - ०५:१६ से ०७:१५
रोग पञ्चक - ०७:१५ से ०९:३७
शुभ मुहूर्त - ०९:३७ से ११:५५
मृत्यु पञ्चक - ११:५५ से १४:१३
अग्नि पञ्चक - १४:१३ से १६:३४
शुभ मुहूर्त - १६:३४ से १८:५४
रज पञ्चक - १८:५४ से २०:५७
शुभ मुहूर्त - २०:५७ से २१:०१
चोर पञ्चक - २१:०१ से २२:३८
शुभ मुहूर्त - २२:३८ से २४:०४
रोग पञ्चक - २४:०४ से २५:२८
चोर पञ्चक - २५:२८ से २७:०१
शुभ मुहूर्त - २७:०१ से २८:३५
रोग पञ्चक - २८:३५ से २८:५६
शुभ मुहूर्त - २८:५६ से २९:१६
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आज का राशिफल
🐐🐂💏💮🐅👩
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
नौकरी पेशा जातको के लिए आज का दिन शांति वाला रहेगा अधिकारियों से अपनी बात आसानी से मनवा लेंगे इसके विपरीत व्यवसायी वर्ग के मन मे कुछ ना कुछ उथल पुथल लगी रहेगी। धन लाभ के लिए जुगाड़ू प्रवृति अपनाएंगे फिर भी सफलता संदिग्ध ही रहेगी। महिलाये आज लेदेकर अपना काम बना ही लेंगी घरेलू साज सज्जा पर खर्च भी करेंगी। मध्यान पश्चात का समय स्नेही जनों के साथ उत्तम भोजन लघु पर्यटन में आनंद से व्यतीत होगा। आज आपको घर के बुजुर्ग अथवा बाहरी वरिष्ठ व्यक्ति से खरी खोटी भी सुनने को मिलेगी फिर भी धैर्य बनाये रखें व्यक्तित्त्व विकास में लाभकारी ही रहेगी।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपके लिए प्रसन्नता दायक रहेगा। घर एवं बाहर का वातावरण अनुकूल रहने से मन इच्छित कार्य कर सकेंगे। दिन के आरंभ में आलस्य रहेगा लेकिन बाद में अपनी जिम्मेदारियों को समय पर पूर्ण करेंगे। पारिवारिक उत्तकरदायित्व आज ज्यादा रहने के कारण व्यवसाय के साथ तालमेल बैठाने में थोड़ी मुश्किल रहेगी फिर भी इनपर विजय पा लेंगे। आर्थिक दृष्टिकोण से भी दिन संतोषजनक रहेगा। दैनिक उपभोग की वस्तुओं के साथ ही मनोरंजन के खर्च भी आज ज्यादा ही रहेंगे परिवारक खुशी के आगे व्यर्थ नही लगेंगे। महिलाये किसी कारण से नाराज रहेंगी।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन आपमे आध्यात्मिक भावनाएं रहने से ईश्वरीय भजन पूजन में समय देंगे धार्मिक क्षेत्र की यात्रा भी हो सकती है। सेहत प्रातः काल से ही नरम-गरम रहने से कार्यो के प्रति उत्साह कम रहेगा। व्यापारी लोग अपने कार्य ठीक प्रकार से करेंगे मध्यान तक बिक्री कम रहेगी इसके बाद तेजी आने पर ही धन लाभ निश्चित हो सकेगा। पुरानी उधारी चुकता होने से राहत मिलेगी। परिवार में आज वातावरण मंगलमय रहेगा। सदस्य एक दूसरे से भावनात्मक संबंध रखेंगे आवश्यकता के समय सहयोग करेंगे। भाई-बंधुओ में थोड़ी खटपट होने की संभावना है। विवेक से काम लें।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज के दिन भी आपको विविध परेशानियों का सामना करना पड़ेगा सेहत असामान्य रहने से मानसिक उद्धेग रहेगा ऊपर से घरेलू परेशानियां भी पीछा नही छोड़ेंगी घर मे किसी ना किसी से तकरार अथवा नारजगी का सामना करना पड़ेगा। ना चाहकर भी पर्यटन करना पड़ेगा जिससे सेहत ज्यादा बिगड़ने की सम्भावना है। कार्य क्षेत्र पर भी आज अव्यवस्था रहने से ज्यादातर कार्य विलम्ब से होंगे अथवा बीच मे ही छोड़ने पड़ेंगे। आर्थिक रूप से भी दिन चिंताजनक रहेगा। लाभ की मात्रा कम परन्तु आकस्मिक खर्च अधिक रहने से बजट बिगड़ेगा। महिलाओ का स्वभाव चिड़चिड़ा रहेगा।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन आपके लिए आनंददायक रहेगा परन्तु आज आपका विनोदी स्वभाव रंग में भंग भी डाल सकता है। सामने वाले का स्वभाव अचानक बदलने से हतप्रभ रहेंगे। नौकरी वाले जातक आराम के मूड में रहेंगे परन्तु आकस्मिक कार्य आने से कर नही सकेंगे। व्यवसायी वर्ग आज कम समय मे अधिक लाभ कमा कर प्रसन्न रहेंगे। धन लाभ के साथ ही सार्वजनिक व्यवहार भी बढ़ेंगे। महिलाये भी आज परिवार की खुशी के लिए अपनी इच्छाओं का भी त्याग कर देंगी फिर भी आत्मसन्तोषी रहेंगी। घर मे मित्र रिश्तेदारों के आने से चहल पहल बनेगी। मनपसन्द भोजन वाहन सुख मिलेगा।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज के दिन आपके सुख सुविधाओं में वृद्धि होगी। घर के लिए नए सामन की खरीददारी करेंगे। आज आप आराम की जिंदगी बिताने पर ज्यादा जोर देंगे इसके लिए खर्च करने से पीछे नही हटेंगे। महिलाये भी आज घरेलू आवश्यकतओं के ऊपर खर्च करेंगी सौंदर्य प्रसाधन एव अन्य कीमती सामान पर खर्च होगा। व्यवसाय की स्थिति मध्यान तक धीमी रहेगी इसके बाद अचानक गति आने से आर्थिक आमाद होने लगेगी। आज अधीनस्थों के ऊपर ज्यादा निर्भर ना रहें हानि हो सकती है। बाहर यात्रा पर्यटन के भी योग है। बुजुर्गो से कीमती सलाह मिलेगी।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन आप अपने आप को अन्य लोगो की अपेक्षा उच्चतम आंकेंगे। वैचारिक स्थिति आज बेहतर रहने से घर बाहर प्रसंशा होगी जिससे अतिआत्मविश्वास की भावना से ग्रस्त रहेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज अधिकतर काम जल्दबाजी में पूर्ण करेंगे जिससे कुछ त्रुटि हो सकती है। आर्थिक लाभ के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ेगा फिर भी कामचलाऊ से ही संतोष करना पड़ेगा। परिवार के सदस्यों के साथ व्यवहार शून्यता नए क्लेश खड़े करेगी। महिलाये अपनी अनदेखी होने पर भीतर से जली भुनी रहेंगी छोटे काम को भी बढ़ा चढ़ा कर पेश करेंगी।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन अशांति से भरा रहेगा। प्रातः काल मे ही आसपडोसी अथवा पारिवारिक सदस्य से किसी पुरानी बात को लेकर कहासुनी होगी। अहम की भावना भी अधिक रहने से गलती करने पर भी मानेंगे नही करेंगे क्रोध में आकर जो मन मे आये बोल देंगे बाद में इसकी ग्लानि भी होगी। आज आपके संपर्क में आने वाला कोई भी व्यक्ति दिल दुखा कर ही जायेगा। व्यावसायिक स्थिति भी आपके रूखे व्यवहार के चलते उतार चढ़ाव से भरी रहेगी। धन लाभ के लिए स्वभाव में नरमी रखना आवश्यक है अन्यथा भविष्य के लाभ से भी हाथ धो बैठेंगे। महिलाये परिवार के सदस्यों को एकजुट रखने की असफल कोशिश करेंगी।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज आपके दिन का आरंभ शुभ समाचार से होगा। परिजनों से मनोकामना पूर्ति करवा सकेंगे लेकिन आज आपके लिए व्यावसायिक अथवा अन्य महत्त्वपूर्ण सरकारी कार्यो को आगे के लिए सरकाना ही बेहतर रहेगा। अन्यथा कुछ ना कुछ विघ्न आने से लंबे समय के लिए लटक सकते है। व्यावसायिक क्षेत्र से आशानुकूल धन लाभ हो जाएगा परन्तु खर्च भी आवश्यकता से अधिक करेंगे सामाजिक क्षेत्र पर दिखावे की प्रवृति के कारण अन्य लोग ईर्ष्या करेंगे। महिलाओ की किसी से कहासुनी होगी जिसमें आपका पक्ष सही होने पर विजय मिलेगी। आज छोटी मोटी शारीरिक समस्या लगी रहेगी लेकिन इसकी परवाह छोड़ मनोरंजन पर ध्यान केंद्रित रहेगा।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपके लिए शान्तिप्रद रहेगा। आज की दिनचार्य थोड़ी विलम्ब से आरम्भ होगी सुस्ती अधिक रहने से कार्य क्षेत्र पर भी विलम्ब होगा। आर्थिक विषयो को लेकर आज ज्यादा सरदर्दी नही लेंगे आवश्यकता अनुसार सरलता से हो जाएगा। संतोषी स्वभाव रहने के कारण मानसिक रूप से भी शांत ही रहेंगे परन्तु किसी आवश्यक कार्य को करने में हड़बड़ी अवश्य करेंगे उसके बाद भी कार्य लंबित रहने पर निराशा होगी। महिलाये भी आज अपने मे ही मगन रहेंगी जिससे घरेलू कार्य थोड़े अस्त-व्यस्त होंगे। सामाजिक कार्यक्रम को लेकर दिनचार्य में बदलाव करना पड़ेगा।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज आपके अंदर चंचलता अधिक रहेगी। आज जल्दी से किसी कार्य को करने का मन नही करेगा घरेलू कार्यो को भी यथा संभव टालने की कोशिश करेंगे या जिस भी कार्य को करेगे बेमन से ही करेंगे। बाहर के खान-पान में संयम ना रहने से सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। तरल एवं अन्य शीतल पेय से परहेज रखें खांसी जुखाम की शिकायत हो सकती है। कार्य क्षेत्र एवं घरेलू कार्यो में लापरवाही करने पर नुकसान के साथ ही जिस लाभ के अधिकारी थे उससे वंचित रह जाएंगे। महिलाये आज पर्यटन मनोरंजन के मूड में रहेंगी सभी घरेलू कार्य विलम्ब से होंगे।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आपके लिए हानिकर रहेगा। अस्त व्यस्त दिनचार्य रहने के कारण सभी कार्य धीमी गति से होंगे। स्वभाव में भी आज उदासीनता अधिक रहेगी। महिलाओ को आर्थिक कमी के कारण स्वयं के साथ ही पारिवारिक आवश्यकताओं में भी कटौती करनी पड़ेगी जिससे संतान एवं अन्य पारिवारिक सदस्यों के साथ संबंध असामान्य बनेंगे। मानसिक शांति के लिए आज आप आध्यात्म का सहारा लेंगे परन्तु यहां भी ध्यान भटकने से पूर्ण शांति नही मिल सकेगी। दान पुण्य धार्मिक यात्रा खर्च की चिन्ता से निरस्त भी करनी पड़ सकती है। व्यवसाय से लाभ तो होगा लेकिन खर्च पहले से तैयार रहेंगे।
〰️〰️〰️शुभमस्तु

।।ब्रह्मास्त्र महा विद्या श्रीबगला स्तोत्र।।👏ध्यानः-----मध्ये सुधाब्धि-मणि-मण्डप-रत्न-वेद्याम्,सिंहासनोपरि-गतां परिपीत-व...
16/04/2022

।।ब्रह्मास्त्र महा विद्या श्रीबगला स्तोत्र।।
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ध्यानः-----
मध्ये सुधाब्धि-मणि-मण्डप-रत्न-वेद्याम्,
सिंहासनोपरि-गतां परिपीत-वर्णाम् ।
पीताम्बराभरण-माल्य-विभूषितांगीम्,
देवीं नमामि धृत-मुद्-गर-वैरि-जिह्वाम् ।। १ ।।
🌼
अर्थात् अमृत का सागर । बीच में मणि-मण्डप की रत्न-वेदी । उस पर सिंहासन । उस पर पीले रंग की देवी ‘बगला’ आसीन हैं । उनके वस्त्र, आभूषण तथा पुष्प-माला- सब कुछ पीले रंग के ही हैं । बाँएँ हाथ में शत्रु की जीभ खींचकर, दाहिने हाथ से मुद्-गर लेकर, उस पर प्रहार करने जा रही है । उन्हीं माँ बगला को मेरा प्रणाम ।।
👏
जिह्वाग्रमादाय करेण देवीम्,
वामेन शत्रून् परि-पीडयन्तीम् ।
गदाऽभिघातेन च दक्षिणेन,
पीताम्बराढ्यां द्वि-भुजां नमामि ।। २ ।।
🌼
अर्थात् बाँएँ हाथ में शत्रु की जीभ को खींचकर, दाहिने हाथ में गदा लेकर प्रहार करती हुई, पीताम्बरा द्वि-भुजा बगला को मेरा प्रणाम ।।

*।। मूल-पाठ ।।*
👏
चलत्-कनक-कुण्डलोल्लसित-चारु-गण्ड-स्थलीम्,
लसत्-कनक-चम्पक-द्युतिमदिन्दु-बिम्बाननाम् ।
गदा-हत-विपक्षकां कलित-लोल-जिह्वाऽञ्चलाम्,
स्मरामि बगला-मुखीं विमुख-वाङ्-मनस-स्तम्भिनीम् ।। ३ ।।
🌼
अर्थात् चञ्चल सुवर्ण-कुण्डलों से शोभित कपोलों वाली तथा कनक एवं चम्पा के पुष्प-सदृश शरीर की कान्ति वाली चन्द्र-मुखी, गदा-प्रहार से विपक्षियों को सदा विनष्ट करनेवाली, सुन्दर चञ्चल-जीभवाली, विमुखों की वाणी और मन का स्तम्भन करनेवाली बगला-मुखी को स्मरण करता हूँ ।
👏
पीयूषोदधि-मध्य-चारु-विलसद्-रत्नोज्जवले मण्डपे,
तत्-सिंहासन-मूल-पतित-रिपुं प्रेतासनाध्यासिनीम् ।
स्वर्णाभां कर-पीडितारि-रसनां भ्राम्यद् गदां विभ्रतीम्,
यस्त्वां ध्यायति यान्ति तस्य विलयं सद्योऽथ सर्वापदः ।। ४ ।।
🌼
अर्थात् जो भक्त साधक सुधा-समुद्र के बीच में रत्नोज्ज्वल मण्डप में अनेकानेक रत्न-जटित स्वर्ण-सिंहासन पर आसीन, सुवर्ण कान्ति-वाली, एक हाथ से शत्रु की जीभ और दूसरे से घूमती हुई गदा को धारण किए, प्रेतासन पर बैठी हुई, शत्रुओं के शिरों को झूकानेवाली तुमको ध्यान करता है, उसकी समस्त आपदाएँ, तुरन्त समाप्त हो जाती हैं ।
👏
देवि ! त्वच्चरणाम्बुजार्च-कृते यः पीत-पुष्पाञ्जलिम्,
भक्त्या वाम-करे निधाय च मनुं मन्त्री मनोज्ञाक्षरम् ।
पीठ-ध्यान-परोऽथ कुम्भक-वशाद् बीजं स्मरेत् पार्थिवम्,
तस्यामित्र-मुखस्य वाचि हृदये जाड्यं भवेत् तत्क्षणात् ।। ५ ।।
🌼
अर्थात् हे देवि ! जो भक्त तुम्हारे चरण-कमलों के अर्चन में पीत-पुष्पों की अञ्जलि भक्ति-पूर्वक निज वाम कर में रचकर, पीठ-ध्यान में तत्पर होकर, कुम्भक, प्राणायाम द्वारा तुम्हारे मनोज्ञ (मनोहर) अक्षरवाले मन्त्र भूमि-बीज (लं) का स्मरण करता है, उसके शत्रु के मुख-वचन और हृदय में तुरन्त जड़ता व्याप्त हो जाती है ।
👏
वादी मूकति रंकति क्षिति-पतिर्वैश्वानरः शीतति,
क्रोधी शाम्यति दुर्जनः सुजनति क्षिप्रानुगः खञ्जति ।
गर्वी खर्वति सर्व-विच्च जडति त्वन्मन्त्रिणा यन्त्रितः,
श्री-नित्ये, बगला-मुखि ! प्रतिदिनं कल्याणि ! तुभ्यं नमः ।। ६ ।।
🌼
अर्थात् तुम्हारे मन्त्र के जानकार साधक के द्वारा यन्त्रित किया गया वादी गूँगा, राजा रंक, अग्नि शीतल, क्रोधी शान्त, दुष्ट-जन सु-जन, तीव्र गतिवाला लँगड़ा, घमण्डी छोटा तथा सर्वज्ञ जड़ हो जाता है । इसीलिए हे कल्याणि ! श्री-स्वरुपे ! नित्ये ! भगवति बगले ! मैं तुम्हें प्रतिदिन नमस्कार करता हूँ ।
👏
मन्त्रस्तावदलं विपक्ष-दलने स्तोत्रं पवित्रं च ते,
यन्त्रं वादि-नियन्त्रणं त्रि-जगतां जत्रं च चित्रं च ते ।
मातः ! श्रीबगलेति नाम ललितं यस्यास्ति जन्तोर्मुखे,
त्वन्नाम-स्मरणेन संसदि मुख-स्तम्भो भवेद् वादिनाम् ।। ७ ।।
🌼
अर्थात् विपक्षियों के दमनार्थ तुम्हारा मन्त्र ही पर्याप्त है और तद्-वत् पवित्र स्तोत्र भी । वादियों के नियन्त्रण के लिए त्रिलोक प्रसिद्ध तुम्हारा विजय-शाली-यन्त्र भी विचित्र है । हे माँ ! ‘श्रीबगला’-यह ललित तुम्हारा नाम जिस साधक के मुख को शोभित करता है, वह भाग्य-शाली है, क्योंकि सभा में तुम्हारे नाम का स्मरण करते ही वादियों का मुख स्तम्भित हो जाता है ।
👏
दुष्ट-स्तम्भनमुग्र-विघ्न-शमनं दारिद्र्य-विद्रावणम्,
भूभृत्-सन्दमनं चलन्मृग-दृशां चेतः समाकर्षणम् ।
सौभाग्यैक-निकेतनं सम-दृश कारुण्य-पूर्वेक्षणम्,
मृत्योर्मारणमाविरस्तु पुरतो मातस्त्वदीयं वपुः ।। ८ ।।
🌼
अर्थात् दुष्ट जनों का स्तम्भक, उग्र विघ्नों का शामक, दरिद्रता-निवारक, राजाओं का दमन-कारक, मृगाक्षियों के चञ्चल चित्त का समाकर्षक एवं सम-दर्शियों के लिए सौभाग्य का एकमेव निकेतन, करुणा-पूर्ण नेत्रोंवाला और मृत्यु का भी मारक तुम्हारा सुन्दर शरीर हे माँ ! मेरे आगे प्रकट हो ।
👏
मातर्भञ्जय मद्-विपक्ष-वदनं जिह्वां च संकीलय,
ब्राह्मीं मुद्रय दैत्य-देव-धिषणामुग्रां गतिं स्तम्भय ।
शत्रूंश्चूर्णय देवि ! तीक्ष्ण-गदया गौरांगि, पीताम्बरे !
विघ्नौघं बगले ! हर प्रणमतां कारुण्य-पूर्णेक्षणे ! ।। ९ ।।
🌼
अर्थात् हे गौरांगि ! पीताम्बरे ! माँ देवि ! मेरे विपक्षियों के मुख को तोड़ दो, उनकी जिह्वा को कील दो, वाणी को बन्द करो, देव और दैत्यों की उग्र बुद्धि तथा गतियों को स्तम्भित करो, अपनी तीक्ष्ण गदा से शत्रुओं को चूर्ण कर दो, अपनी करुणा-पूर्ण दृष्टि से भक्तों के विघ्नों के समूह को दूर करो ।
👏
मातर्भैरवि ! भद्र-कालि विजये ! वाराहि ! विश्वाश्रये !
श्रीविद्ये ! समये ! महेशि ! बगले ! कामेशि ! वामे रमे !
मातंगि ! त्रिपुरे ! परात्पर-तरे ! स्वर्गापवर्ग-प्रदे !
दासोऽहं शरणागतः करुणया विश्ववेश्वरि ! त्राहि माम् ।। १० ।।
🌼
अर्थात् हे माँ बगले ! भैरवी, भद्र-काली, वाराही, भुवनेश्वरी, श्रीविद्या, षोडशी, बाला-त्रिपुर-सुन्दरी, कमला आदि सब तुम्ही हो, स्वर्ग और मोक्ष भी तुम्हीं देती हो, परात्पर ब्रह्म भी तुम हो, मैं तुम्हारा शरणागत हूँ । हे विश्वेश्वरि ! करुणा करके मेरी रक्षा करो ।
👏
त्वं विद्या परमा त्रिलोक-जननी विघ्नौघ-संच्छेदिनी,
योषाकर्षण-कारिणि पशु-मनः-सम्मोह-सम्वर्द्धिनी ।
दुष्टोच्चाटन-कारिणी पशु-मनः-सम्मोह-सन्दायिनी,
जिह्वा-कीलन-भैरवी विजयते ब्रह्मास्त्र-विद्या परा ।। ११ ।।
🌼
अर्थात् तुम परमा विद्या हो, त्रिलोकों की जननी हो, विघ्न-समूह की नाशिका हो, स्त्रियों को आकर्षित करने वाली हो, जगत्-त्रय का आनन्द बढ़ाने वाली हो, दुष्टों का उच्चाटन करने वाली हो, पशु-जन के मन को सम्मोह देनेवाली हो और शत्रु की जिह्वा-कीलन करने में भैरवी हो । सदैव विजय देनेवाली परा ब्रह्मास्त्र-विद्या हो ।
👏
विद्या-लक्ष्मीर्नित्य-सौभाग्यमायुः,
पुत्रैः पौत्रैः सर्व-साम्राज्य-सिद्धिः ।
मानं भोगो वश्यमारोग्य-सौख्यम्,
प्राप्तं सर्वं भू-तले त्वत्-परेण ।। १२ ।।
🌼
अर्थात् सम्पूर्ण विद्याएँ, लक्ष्मी, नित्य सौभाग्य, दीर्घायु, पुत्र-पौत्रादि-सहित सर्व-साम्राज्य-सिद्धि, मान, भोग, वश्यता, आरोग्यता, सुख आदि समस्त जो-जो भी मनुष्य को प्राप्त होना चाहिए, वह सब तुम्हारी कृपा से इस पृथ्वी पर ही साधक को प्राप्त होता है ।
👏
पीताम्बरां द्वि-भुजां च, त्रि-नेत्रां गात्र-कोमलाम् ।
शिला-मुद्-गर-हस्तां च, स्मरामि बगला-मुखीम् ।। १३ ।।
🌼
अर्थात् कोमल शरीरवाली, वज्र और मुद्गर हाथों में धारण करने वाली, त्रि-नेत्र एवं दो भुजाओं वाली पीताम्बरा बगला-मुखी का मैं स्मरण करता हूँ ।
👏
पीत-वस्त्र-लसितामरि-देह-प्रेत-वासन-निवेशित-देहाम्,
फुल्ल-पुष्प-रवि-लोचन-रम्यां दैत्य-जाल-दहनोज्जवल-भूषां ।
पर्यंकोपरि-लसद्-द्विभुजां कम्बु-जम्बु-नद-कुण्डल-लोलाम्,
वैरि-निर्दलन-कारण-रोषां चिन्तयामि बगलां हृदयाब्जे ।। १४ ।।
🌼
अर्थात् पीले वस्त्र पहननेवाली, शत्रु के शव पर अधिष्ठाता, फूल की तरह विकसिता और सूर्य की तरह दीप्त लोचन, असुरों के निधन के लिए जो उजले वस्त्र धारण करती है, पलँग पर शोभा पाने वाली द्वि-भुजा देवी, वलयाकार स्वर्ण-कुण्डल-सुशोभिता, शत्रुओं के निधन के लिए जो अत्यन्त क्रोधी हैं, उन्हीं का हृदय-कमल में ध्यान करता हूँ ।
👏
गेहं नाकति, गर्वितः प्रणमति, स्त्री-संगमो मोक्षति,
द्वेषी मित्रति, पातकं सु-कृतति, क्ष्मा-वल्लभो दासति ।
मृत्युर्वैद्यति, दूषण सु-गुणति, त्वत्-पाद-संसेवनात्,
वन्दे त्वां भव-भीति-भञ्जन-करीं गौरीं गिरीश-प्रियाम् ।। १५ ।।
🌼
अर्थात् हे माँ ! तुम्हारी चरण-सेवा से घर स्वर्ग बन जाता है, अहंकारी नम्र तथा विनीत बन जाता है, स्त्री-संसर्ग करने वाला मोक्ष प्राप्त करता है, शत्रु मित्र बन जाता है, पापी पुण्यवान् बन जाता है, राजा दास बन जाता है, यम भी वैद्य बन जाता है तथा दुर्गुण सद्गुण में बदल जाता है । हे संसार-भय दूर करने वाली, शिव-प्रिया, गौरी, बगला ! तुम्हारी वन्दना करता हूँ ।
👏
आराध्या जदम्ब ! दिव्य-कविभिः सामाजिकैः स्तोतृभि-
र्माल्यैश्चन्दन-कुंकुमैः परिमलैरभ्यर्च्चिता सादरात् ।
सम्यङ्-न्यासि-समस्त-निवहे, सौभाग्य-शोभा-प्रदे !
श्रीमुग्धे बगले ! प्रसीद विमले, दुःखापहे ! पाहि माम् ।। १६ ।।
🌼
अर्थात् अध्यात्म-वादी कवि, सामाजिक जनता और स्तुति करने वाले भक्त जगज्जननी बगला की सादर पूजा करते हैं । पुष्प-माला, चन्दन, कुंकुम और सुगन्धित-द्रव्यों से देवी की आराधना की जाती है । सब प्राणियों के शरीर में सम्यक् रुप से रहने वाली, सौभाग्य-प्रदा, श्री-मुग्धा, विमला, दुःख-हारिणी माँ बगला मेरी रक्षा करें ।
👏
यत्-कृतं जप-सन्नाहं, गदितं परमेश्वरि !
दुष्टानां निग्रहार्थाय, तद् गृहाण नमोऽस्तु ते ।। १७ ।।
💐
अर्थात् हे परमेश्वरि ! दुष्टों के निग्रहार्थ तुम्हारे विषय में जो मैंने जपादि-पूर्वक कहा है, उसे तुम स्वीकार करो, तुम्हें नमस्कार है ।
👏
सिद्धिं साध्येऽवगन्तुं गुरु-वर-वचनेष्वार्ह-विश्वास-भाजाम्,
स्वान्तः पद्मासनस्थां वर-रुचि-बगलां ध्यायतां तार-तारम् ।
गायत्री-पूत-वाचां हरि-हर-नमने तत्पराणां नराणाम्,
प्रातर्मध्याह्न-काले स्तव-पठनमिदं कार्य-सिद्ध प्रदं स्यात् ।। १८ ।।
🌼
अर्थात् हे हरि-हर आदि की वन्दनीया माँ बगला ! सद्-गुरु के वचनों में विश्वास रखने वाला, तुममें अटल भक्ति रखने वाला, गायत्री-सिद्ध व्यक्ति, साध्य-विषय में सिद्धि प्राप्ति के लिए अपने हृदय में पद्मासना, उत्तम ज्योति-विशिष्टा बगला का ध्यान कर प्रातः और मध्याह्न में इस स्तव का निरन्तर पाठ करे, तो कार्य सिद्ध होता है ।
👏
विद्या लक्ष्मीः सर्व-सौभाग्यमायुः,
पुत्रैः पौत्रौः सर्व-साम्राज्य-सिद्धिः ।
मानं भोगो वश्यमारोग्य-सौख्यम्,
प्राप्तं सर्वं भू-तले त्वत्-परेण ।। १९ ।।
🌼
अर्थात् विद्या, लक्ष्मी, सारे सौभाग्य, आयु, पुत्र-पौत्रादि के साथ सारे साम्राज्य की प्राप्ति, सम्मान, भोग, यश, आरोग्य तथा सुख आदि संसार का सब कुछ तुम्हारी आराधना से प्राप्त होता है ।
👏
यत्-कृतं जप-संध्यानं, चिन्तनं परमेश्वरि !
शत्रूणां स्तम्भनार्थाय, तद् गृहाण नमोऽस्तु ते ।। २० ।।
🌼
अर्थात् हे परमेश्वरि ! शत्रुओं के स्तम्भन के लिए मैंने जो जप, ध्यान तथा चिन्तन किया, वह सब ग्रहण करो । तुमको मेरा प्रणाम है ।

।। फल-श्रुति ।।
👏
नित्यं स्तोत्रमिदं पवित्रमिह यो देव्याः पठत्यादरात्,
धृत्वा यन्त्रमिदं तथैव समरे बाहौ करे वा गले ।
राजानोऽप्यरयो मदान्ध-करिणः सर्पा मृगेन्द्रादिकाः,
ते वै यान्ति विमोहिता रिपु-गणा लक्ष्मोः स्थिरा सर्वदा ।। २१ ।।
🌼
अर्थात् भगवती पीताम्बरा के इस पवित्र स्तोत्र का पाठ जो साधक नित्य आदर-पूर्वक करता है तथा इनके यन्त्र को बाहु में अथवा कर में या गले में युद्ध-काल में धारण करता है, तो राजा एवं शत्रु-गण विमोहित हो जाते हैं । इतना ही नहीं, इसे साधक को लक्ष्मी की भी स्थिरता प्राप्त होती है ।
👏
संरम्भे चौर-संघे प्रहरण-समये बन्धने व्याधि-मध्ये,
विद्या-वादे विवादे प्रकुपित-नृपतौ दिव्य-काले निशायाम् ।
वश्ये वा स्तम्भने वा रिपु-वध-समये निर्जने वा वने वा,
गच्छँस्तिषठँस्त्रि-कालं यदि पठति शिवं प्राप्नुयादाशु धीरः ।। २२ ।।
🌼
अर्थात् हे देवि ! विप्लव-काल में, चोरों के समूह में, शत्रु पर प्रहार-काल में बन्धन में, व्याधि-पीड़ा में, विद्या-सम्बन्धी विवाद में, मौखिक कलह में, नृप-कोप में और रात्रि के दिव्य-काल में, वश्य कार्य में, स्तम्भन में तथा शत्रु-वध के समय, निर्जन स्थान में अथवा वन में कहीं भी चलता हुआ, बैठा हुआ तीनों काल में जो साधक तुम्हारे स्तोत्र का पाठ करता है, वह धीर पुरुष शीघ्र ही कल्याण प्राप्त करता है ।
👏
अनुदिनमभिरामं साधको यस्त्रि-कालम्,
पठति स भुवनेऽसौ पूज्यते देव-वर्गैः ।
सकलममल-कृत्यं तत्त्व-द्रष्टा च लोके,
भवति परम-सिद्धा लोक-माता पराम्बा ।। २३ ।।
🌼
अर्थात् जो साधक प्रति-दिन त्रि-सन्ध्या में इसका पाठ करता है, वह इस जगत् में देवताओं के द्वारा पूजित होता है । उसके सारे काम बन जाते हैं और वह संसार में तत्त्व-दर्शी बनता है । जगज्जननी पराम्बा बगला उसके लिए परम सिद्ध देवी बन जाती है ।
👏
ब्रह्मास्त्रमिति विख्यातं, त्रिषु लोकेषु दुर्लभम् ।
गुरु-भक्ताय दातव्यं, न देयं यस्य कस्यचित् ।। २४ ।।
🌼
अर्थात् त्रिलोक में ‘ब्रह्मास्त्र’ नाम से ख्यात इस स्तोत्र को सबको न देकर केवल गुरु-भक्त शिष्यों को देना चाहिए ।
👏 🌼🌼🌼👏
।। श्रीरुद्र-यामले उत्तर-खण्डे श्रीब्रह्मास्त्र-विद्या श्रीबगला-मुखी स्तोत्रम् ।।
आचार्य सन्तोष तिवारी
कानपुर

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01/03/2022

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