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Facebook पर मेरी मौजूदगी के 5 साल का जश्न मनाया जा रहा है. सपोर्ट करने के लिए आपका धन्यवाद. आपके सपोर्ट के बिना मेरे लिए...
29/11/2024

Facebook पर मेरी मौजूदगी के 5 साल का जश्न मनाया जा रहा है. सपोर्ट करने के लिए आपका धन्यवाद. आपके सपोर्ट के बिना मेरे लिए यह कर पाना संभव नहीं था. 🙏🤗🎉

किलोमीटर की मानव शृंखला  गीता सन्देश के साथ दिनांक  -3  नवम्बर 2022दिन - गुरुवार पूर्वाह्न 11  से 12  बजे तक            ...
21/10/2022

किलोमीटर की मानव शृंखला गीता सन्देश के साथ
दिनांक -3 नवम्बर 2022
दिन - गुरुवार
पूर्वाह्न 11 से 12 बजे तक

आज के मंगला दर्शन श्री पंचमुखी बाला जी महाराज जी के राजा कटरा वाले हनुमान मंदिर कोलकाता से
25/08/2020

आज के मंगला दर्शन श्री पंचमुखी बाला जी महाराज जी के राजा कटरा वाले हनुमान मंदिर कोलकाता से

_*🙏🏻🙏🏻🌹आज के श्रृंगार दर्शन श्री खजराना गणेश जी के इंदौर मध्यप्रदेश से🌹🙏🏻🙏🏻*_
15/08/2020

_*🙏🏻🙏🏻🌹आज के श्रृंगार दर्शन श्री खजराना गणेश जी के इंदौर मध्यप्रदेश से🌹🙏🏻🙏🏻*_

09/11/2019

क्या आप जय श्रीराम नहीं बोलेंगे

आज मंगलवार है, महावीर का वार है, यह सच्चा दरबार है ।सच्चे मन से जो कोई धयावे, उसका बेडा पार है ॥चेत सुति पूनम मंगल का जन...
15/10/2019

आज मंगलवार है, महावीर का वार है, यह सच्चा दरबार है ।
सच्चे मन से जो कोई धयावे, उसका बेडा पार है ॥

चेत सुति पूनम मंगल का जनम वीर ने पाया है,
लाल लंगोट गदा हाथ में सर पर मुकुट सजाया है ।
शंकर का अवतार है, महावीर का वार है,
सच्चे मन से जो कोई धयावे, उसका बेडा पार है ॥

ब्रह्मा जी के ब्रह्म ज्ञान का बल भी तुमने पाया है,
राम काज शिव शंकर ने वानर का रूप धारिया है ।
लीला अप्रम पार है, महावीर का वार है,
सच्चे मन से जो कोई धयावे, उसका बेडा पार है ॥

बाला पन में महावीर ने हरदम ध्यान लगाया है,
श्रम दिया ऋषिओं ने तुमको ब्रह्म ध्यान लगाया है ।
राम रामाधार है, महावीर का वार है,
सच्चे मन से जो कोई धयावे, उसका बेडा पार है ॥

राम जनम हुआ अयोध्या में कैसा नाच नचाया है,
कहा राम ने लक्ष्मण से यह वानर मन को भाया है ।
राम चरण से प्यार है, महावीर का वार है,
सच्चे मन से जो कोई धयावे, उसका बेडा पार है ॥

पचवटी से माता को जब रावण लेकर आया है,
लंका में जाकर तुमने माता का पता लगाया है ।
अक्षय को मारा है, महावीर का वार है,
सच्चे मन से जो कोई धयावे, उसका बेडा पार है ॥

मेघनाथ ने ब्रह्मपाश में तुमको आन फसाया है,
ब्रह्मपाश में फस कर के ब्रह्मा का मान बढ़ाया है ।
बजरंगी वाकी मार है, महावीर का वार है,
सच्चे मन से जो कोई धयावे, उसका बेडा पार है ॥

लंका जलायी आपने जब रावण भी घबराया है,
श्री राम लखन को आकर माँ का सन्देश सुनाया है ।
सीता शोक अपार है, महावीर का वार है,
सच्चे मन से जो कोई धयावे, उसका बेडा पार है ॥

'सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना।'बजरंगबली की इस 1 चौपाई में ही है किस्मत बदलने की ताकत,
12/10/2019

'सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना।'
बजरंगबली की इस 1 चौपाई में ही है किस्मत बदलने की ताकत,

बजरंगबली की पूजा से पहले जान लें ये नियमभगवान शिव के ग्यारहवे रूद्र के रूप में प्रकट हुए हनुमानजी कलयुग के सारथी हैं जो ...
11/10/2019

बजरंगबली की पूजा से पहले जान लें ये नियम

भगवान शिव के ग्यारहवे रूद्र के रूप में प्रकट हुए हनुमानजी कलयुग के सारथी हैं जो हर-एक परिस्थिति में अपने भक्तों पर कृपा करने के लिए तत्पर रहते हैं।

हनुमान जयंती पर हनुमान जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। कहा जाता है कि हनुमान जी की पूजा के कुछ नियम होते हैं और उन नियमों का पालन करना बहुत जरूरी होता है। इसलिए हनुमान जयंती पर भी बजरंग बली की पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

-हनुमान जी की पूजा कर रहे हैं तो सबसे पहले इस बात का रखें कि उनके सामने घी का या फिर चमेली के तेल का दीपक जलाएं।

-हनुमान जी को अर्पित करने वाले प्रसाद का भी ध्यान रखें। जो भी प्रसाद तैयार करें वो स्नान करके पूरी तरह से शु्द्ध हो। प्रसाद भी शुद्ध साम्रगी से तैयार करें।

-हनुमान जी को लाल रंग का ही फूल चढ़ाएं। लाल रंग का फूल हनुमान जी को बहुत प्रिय है।

-हनुमान जयंती पर हनुमान जी को चोला चढ़ाएं तो हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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क्या हनुमानजी बंदर थे? : हनुमान का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। नए शोधानुसार प्रभु श्रीराम का जन्म 10 जनवरी 5114 ...
10/10/2019

क्या हनुमानजी बंदर थे? : हनुमान का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। नए शोधानुसार प्रभु श्रीराम का जन्म 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व अयोध्या में हुआ था। श्रीराम के जन्म के पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था अर्थात आज (फरवरी 2015) से लगभग 7129 वर्ष पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था। शोधकर्ता कहते हैं कि आज से 9 लाख वर्ष पूर्व एक ऐसी विलक्षण वानर जाति भारतवर्ष में विद्यमान थी, जो आज से 15 से 12 हजार वर्ष पूर्व लुप्त होने लगी थी और अंतत: लुप्त हो गई। इस जाति का नाम कपि था। हनुमानजी के संबंध में यह प्रश्न प्राय: सर्वत्र उठता है कि 'क्या हनुमानजी बंदर थे?' इसके लिए कुछ लोग रामायणादि ग्रंथों में लिखे हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के साथ 'वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम' आदि विशेषण पढ़कर उनके बंदर प्रजाति का होने का उदाहरण देते हैं। वे यह भी कहते हैं कि उनकी पुच्छ, लांगूल, बाल्धी और लाम से लंकादहन का प्रत्यक्ष चमत्कार इसका प्रमाण है। यह ‍भी कि उनकी सभी जगह सपुच्छ प्रतिमाएं देखकर उनके पशु या बंदर जैसा होना सिद्ध होता है। रामायण में वाल्मीकिजी ने जहां उन्हें विशिष्ट पंडित, राजनीति में धुरंधर और वीर-शिरोमणि प्रकट किया है, वहीं उनको लोमश ओर पुच्छधारी भी शतश: प्रमाणों में व्यक्त किया है।> > दरअसल, आज से 9 लाख वर्ष पूर्व मानवों की एक ऐसी जाति थी, जो मुख और पूंछ से वानर समान नजर आती थी, लेकिन उस जाति की बुद्धिमत्ता और शक्ति मानवों से कहीं ज्यादा थी। अब वह जाति भारत में तो दुर्भाग्यवश विनष्ट हो गई, परंतु बाली द्वीप में अब भी पुच्छधारी जंगली मनुष्यों का अस्तित्व विद्यमान है जिनकी पूछ प्राय: 6 इंच के लगभग अवशिष्ट रह गई है। ये सभी पुरातत्ववेत्ता अनुसंधायक एकमत से स्वीकार करते हैं कि पुराकालीन बहुत से प्राणियों की नस्ल अब सर्वथा समाप्त हो चुकी है।

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