श्री देव दरबार आश्रम

श्री देव दरबार आश्रम ध्यान करने कि नहीं ध्यान रखने की आवश्यकता है।
(श्री मालिक जी महाराज)

07/04/2026

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07/04/2026
आज सुबह 3:56 पर आंख खुल गई कानों में वर्षा की आवाज आई खिड़की से देखा तो छत भीग चुकी थी , नित्य क्रिया के बाद टीवी देखने ...
07/04/2026

आज सुबह 3:56 पर आंख खुल गई कानों में वर्षा की आवाज आई खिड़की से देखा तो छत भीग चुकी थी , नित्य क्रिया के बाद टीवी देखने लगा देश दुनिया की खबरें देखने के बाद संस्कार चैनल पर 4:45 पर साध्वी देव प्रिया जी का विद्यार्थियों को शिक्षा देने का प्रसंग देखने को मिला जिसमें उन्होंने बाल्मिक रामायण में भरत जी द्वारा माता कौशल्या से कहा गया कि हे माता में राम के वन गमन में लेशमात्र भी दोषी नहीं हूं यदि मैं दोषी होऊं तो मुझे प्रजा से कर वसूल कर उसके सुख का ध्यान न रखने वाले राजा को जो पाप लगता है वह पाप लगे। जो प्रजा को पुत्रवत प्यार करने वाले राजा को स्वार्थी मानकर उसका विरोध करें जो पाप उस प्रजा को लगे वह मुझे लगे ,और जो राजा युद्ध के लिए तैयार होकर हाथी घोड़ा पैदल सैनिक लेकर धनुष बाण ढाल तलवार आदि के साथ युद्ध मैदान में जाए और बिना युद्ध किये युद्ध से भाग खड़ा हो जो पाप उसे लगे वह पाप भी मुझे लगे ।साध्वी ने इस अंतिम शब्द की बहुत अच्छी व्याख्या की विद्यार्थियों से प्रश्न पूछे सब तरीके से तैयार राजा यदि युद्ध भूमि छोड़कर भाग खड़ा हो तो उसके अंदर क्या कमी है एक छात्रा ने कहा युद्ध मैं पराजय का भय तो उन्होंने कहा युद्ध का भय था तो युद्ध की तैयारी क्यों की ?तो दूसरे विद्यार्थी ने कहा आत्मविश्वास की कमजोरी उसे उन्होंने स्वीकार तो किया परंतु एक प्रश्न पूछा महाभारत के युद्ध में कर्ण आत्मविश्वास से भरा हुआ था फिर भी उसकी क्या गति हुई यह समझते हुए बताया कि उसने गुरु का शिर अपनी गोद में रखकर विश्राम कराया और एक कीड़े ने जब उसको काटा और उसका खून बह कर दूर तक चला गया तो उसने सोचा कि हमने इतना त्याग किया है गुरुजी प्रसन्न होकर हमें वरदान देंगे परंतु हुआ उल्टा उन्होंने कहा तूने झूठा ब्राह्मण बनकर विद्या प्राप्त की इसलिए जब तुझे प्रबल आवश्यकता होगी तो यह विद्या तेरे काम नहीं आएगी तो एक विद्यार्थी ने पूछा क्या उसका यह प्रारब्ध था तो कहा हां प्रारब्ध का भी जीवन में महत्व होता है । लेकिन मुझे याद आया प्रारब्ध बदलने का उपदेश भगवान ने अर्जुन को दिया था जो युद्ध से भाग खड़ा हुआ उसने युद्ध किया और विजय प्राप्त की इसका सबसे बड़ा कारण परमात्मा पर विश्वास करना और अपने स्वकर्म को निष्ठा के साथ करने पर सफलता कदम चूमती ही रहती है आज यह प्रसंग मैं अपने आश्रम भक्तों को इसलिए सुना रहा हूं जीवन में जैसे भी हो उसी रूप में परमात्मा का आश्रय लेकर अपना स्वकर्म करते रहो सफलता आपके कदम चूमती रहेगी

26/03/2026

काशी विश्व पंचांग के अनुसार रामनवमी 27 मार्च को दोपहर 12:00 बजे श्री देव दरबार आश्रम में मनाई जाएगी सभी लोग समय से शामिल हो कर दर्शन पूजन व प्रसाद प्राप्त करें

जिस देश में वर्ष में दो बार कन्या पूजा की जाती हो उसी देश  में भ्रूण हत्या रोकने के लिए हर अल्ट्रासाउंड केंद्र पर यह लिख...
21/03/2026

जिस देश में वर्ष में दो बार कन्या पूजा की जाती हो उसी देश में भ्रूण हत्या रोकने के लिए हर अल्ट्रासाउंड केंद्र पर यह लिखवाने की आवश्यकता क्यों पड़ी यहां लिंग परीक्षण नहीं किया जाता यह कानूनी अपराध है । वहीं जिस देश में माता की पूजा के लिए नौ नौ दिन कुल 18 दिन व्रत कर साधना की जाती हो मां की पूजा की जाती हो और संपन्न परिवार की माताएं वृद्ध आश्रम में भेजी जाती हों इससे दुर्भाग्य और क्या ज्यादा हो सकता है। जो शिक्षा हमें धर्म शास्त्रों से प्राप्त हुई उसे हमने किस प्रकार से जीवन में उतारा है यह समझने और सोचने की बात है दोष हम शिक्षा व्यवस्था को दे रहे हैं धर्म शास्त्रों को दे रहे हैं, लेकिन शिक्षा प्राप्त करने का जो माध्यम हम लोग अपना रहे हैं और जिस तरीके से जीवन में उतार रहे हैं वह निःसंदेह सोचनीय है हमें तत्काल प्रयास कर ऐसे धार्मिक प्रवक्ता ऐसे मठाधीश जो धार्मिक आयोजन के नाम पर हमारी माता बहनों को पंडाल में नचाए ,भगवान के आचरण का कलंकित रूप प्रस्तुत कर श्रद्धाको गलत रास्ते पर ले जाए ऐसे लोगों से बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है

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209727

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