08/07/2014
ये हैं प्योर वेजिटेरियन बॉडी-बिल्डर, सलमान भी कर चुके हैं इनकी तारीफ
चंडीगढ़।
130 किलो वजन, छह फीट-दो इंच लंबे वरिंदर सिंह घुम्मन हॉलीवुड अभिनेता अरनॉल्ड श्वार्जनेगर के फैन हैं। बचपन से उन्हें फॉलो करते आए हैं, पहले बॉडी बिल्डिंग में फिर एक्टिंग में। पंजाबी फिल्म कबड्डी वंस अगेन और फतेह विक्ट्री में दिख चुके वरिंदर की पहली हिंदी फिल्म रोर टाइगर ऑफ सुंदरबन इस साल रिलीज होगी। इसे अबीस रिजवी ने प्रोड्यूस किया है और डायरेक्टर बेखुदी और रंग फेम एक्टर कमल सदाना है।
सलमान ने की तारीफः
वरिंदर सिंह घुम्मन बॉलीवुड फिल्म में डेब्यू करने जा रहे हैं। सलमान खान इनकी बॉडी की तारीफ कर चुके हैं और अरनॉल्ड श्वार्जनेगर ने अपने फूड सप्लीमेंट ब्रांड का एम्बेसडर इन्हें चुना है। घुम्मन न तो अंडा खाते हैं और न ही मांस-मछली को हाथ लगाते हैं। इनका नाम जानने वालों ने प्योर वेजिटेरियन बॉडी-बिल्डर रखा है। बताते हैं कि मेरा परिवार धार्मिक है। हमारे घर में नॉनवेज नहीं खाया जाता। जब बॉडी बनाने की सोची सभी ने कहा अंडा तो खाना ही पड़ेगा। एक-दो बार ट्राई करने पर भी मुझसे नहीं हुआ। फिर मेरे कोच डॉ. रनवीर सिंह ने मुझे भैंस और गाय की खीस खाने की सलाह दी। चूंकि मेरे फार्म हाउस पर 40 के करीब भैंस गाएं हैं इसलिए इसकी कमी नहीं हुई।
अरनॉल्ड को फॉलो करते हैं घुम्मनः
मिस्टर ओलंपिया बनने का सपना देखने वाले घुम्मन अपने इस नए सफर के बारे में बताते हैं, फिल्मों में मैं अरनॉल्ड सर को फॉलो करते हुए आया। इसलिए उनकी तरह की अलग फिल्में करना चाहता था। इस फिल्म के लिए प्रोड्यूसर अबीस को ऐसे लड़के की तलाश थी जिसकी बॉडी इंटरनेशनल बॉडी बिल्डर की तरह हो। 2011 में मैंने कनाडा इंटरनेशनल चैम्पियनशिप में भाग लिया था। तब मुझे आईफा में भी भाग लेने का मौका मिला। वहीं कहीं मुझे रवि बहल और जावेद जाफरी ने देखा था।
बिना ऑडिशन किए मिला रोलः
उन्होंने मेरा नाम अबीस को सुझाया और इस तरह मुझे बिना ऑडिशन किए इस फिल्म में काम करने का मौका मिल गया। फिल्म की शूटिंग 40 दिन सुंदरबन में हुई है। जंगल में शूटिंग एक्सपीरियंस पर घुम्मन बताते हैं, सेट इंडिया के नहीं बल्कि बांग्लादेश के अंदर आने वाले सुंदरबन के इलाके में लगाया गया था। एक्सपीरियंस डरावने सपने से कम नहीं था। शूटिंग के दौरान अक्सर जंगली सुअर सेट पर घुस आते थे। उनको भगाने के लिए गन फायर करना पड़ता था। इसके अलावा कभी सांप तो कभी मगरमच्छ हमारे स्वागत के लिए अचानक जाते थे। जहरीले कीड़ों का भी डर हमेशा बना रहता था। दिनभर जंगल में शूटिंग करते और रात शिप पर गुजारते थे।