15/03/2026
क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—को एक साथ मिलकर केवल एक असुर के खिलाफ युद्ध करना पड़ा था? आखिर कौन था वो, जिसके डर से स्वर्ग कांप उठा और महादेव को स्वयं बाण चलाना पड़ा? चलिए जानते हैं त्रिपुरासुर की ये अनसुनी कहानी।
यह कहानी है तीन असुर भाइयों की—तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली। इन्होंने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या करके एक ऐसा वरदान पाया जिसने इन्हें लगभग अजेय बना दिया। इन्होंने तीन विशाल उड़ने वाले नगरों का निर्माण किया, जिन्हें 'त्रिपुर' कहा गया।
वरदान की शर्त यह थी कि इन नगरों को तभी नष्ट किया जा सकता है, जब ये तीनों हज़ारों साल में एक बार, सिर्फ एक क्षण के लिए एक सीधी रेखा में आएं। इसी शक्ति के अहंकार में त्रिपुरासुरों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया।
जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तब स्वयं महादेव युद्ध के मैदान में उतरे। पर यह कोई साधारण युद्ध नहीं था! इस विनाशकारी युद्ध के लिए:
धरती को रथ बनाया गया।
सूर्य और चंद्रमा उस रथ के पहिये बने।
स्वयं ब्रह्मा जी सारथी बने।
और भगवान विष्णु महादेव के धनुष के अमोघ बाण बने।
जैसे ही हज़ारों वर्षों बाद वे तीनों नगर एक सीध में आए, महादेव ने अपना धनुष ताना और भगवान विष्णु रूपी बाण छोड़ दिया। एक ही प्रहार में तीनों नगर राख हो गए और बुराई का अंत हुआ। इसी विजय के कारण शिव जी पूरी सृष्टि में 'त्रिपुरांतक' के नाम से पूजे गए।
सत्य और धर्म की इस विजय के लिए कमेंट्स में 'हर हर महादेव' लिखना न भूलें! ऐसे ही और रहस्यों के लिए फॉलो करें।