Divine DWAR

Divine DWAR Divine charitable trust is to be formed under B.P.T Act for the development and charity of the humanity.

10/11/2017
04/07/2017

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08/03/2017
19/11/2016

Congratulation to all of us. Our new Rs 2000 note is declared as the "BEST CURRENCY OF THE WORLD"by UNESCO Just few minutes ago.
Dr. Saurabh Mukherjee, head of cultural awareness department of UNESCO announced this to media this afternoon.

Kindly share this. Very proud to be an INDIAN.
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RBI in it's latest circular RBI/2016-2017/123 DCM (Plg) No.1251/10.27.00/2016-17 has advised general public not to accep...
16/11/2016

RBI in it's latest circular RBI/2016-2017/123 DCM (Plg) No.1251/10.27.00/2016-17 has advised general public not to accept new currency note which has any text or sketch drawn on it.
This notification is as part of master circular published on 10th-Nov on withdrawal of Legal Tender of ₹500/- and ₹1000/- Bank Notes.

In a separate press release RBI governor Mr Urjit Patel has clarified that as part of Government’s initiate to curb the use of black money, new notes of ₹ 500/- and ₹ 2000/- are printed with latest cutting edge technology which cannot be counterfeited and from Jan-2017 will be deposited and dispensed using new electronic machines across all banks in India. These German machines are imported as part of Modi's digital India programme and will not be able to accept notes which have any text or sketch drawn on it. Reason for the same is in foreign countries, *p*eople do not write anything on the notes and hence their software are not designed to read anything apart from what’s printed on the note.

Pls forward this information to all your friends and *r*elatives (especially aged ones) to be extra careful while *a*ccepting these new notes to ensure that they do not accept currency notes which *h*ave anything written over it. *A*s such currency notes will no longer be accepted by banks or *RBI*.

As per New Guidelines of Reserve Bank Of  India, Writing any thing on new notes makes the note invalid & it will no more...
15/11/2016

As per New Guidelines of Reserve Bank Of India, Writing any thing on new notes makes the note invalid & it will no more be a legal tender.

Just like US Dollars . If you write anything on US dollars it is not accepted by any one

Requested all, forward to maximum people to understands the importance of this message.

🙏🏼A humble request to all.... Guys whenever you will get new notes please do not write anything on it ...... Let's have ...
10/11/2016

🙏🏼A humble request to all.... Guys whenever you will get new notes please do not write anything on it ...... Let's have a good start..... and also educate about this to your family, friends & others.
🙏🏻🙏🏻🙏🏻
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चीन का बजा दिया भारतीयों ने बैंड, गाली गलौज के बाद अब धमकी पर उतरा वामपंथी चीनवामपंथी चीन ने सोचा था कि वो चाहे जितना आत...
02/11/2016

चीन का बजा दिया भारतीयों ने बैंड, गाली गलौज के बाद अब धमकी पर उतरा वामपंथी चीन
वामपंथी चीन ने सोचा था कि वो चाहे जितना आतंकवाद को समर्थन दे, भारत के खिलाफ गतिविधि चलाये, भारत के लोग उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते
अपने इसी घमंड में चीन लगातार आतंकी पाकिस्तान की आर्थिक और सैन्य मदद करता रहा
परंतु पिछले दिनों भारत में चीनी सामान के बहिष्कार की एक मुहीम सी चल पड़ी और चीन ने इसको हलके में लिया, यहाँ तक की उसने "मसूद अजहर" को आतंकी मानने से भी इंकार कर दिया
भारत के लोगों ने इस बार एकजुटता दिखाई और पूरी दुनिया में सन्देश चला गया कि, भारत के लोग चीन का बहिष्कार कर रहे है, और कारण है "चीन द्वारा आतंकवाद का बचाव"
इसी के बाद चीनी शेयर मार्केट धड़ाम से गिरने लगा, आज चीनी शेयर मार्केट 6 साल के सबसे निचले स्तर पर है, औए यहाँ तक की चीनी करंसी यानि यूयान भी पिछले 6 सालों में सबसे निचले स्तर पर चल रहा है
चीन को समझ आ गया कि भारत के लोग इस बार नहीं छोड़ेंगे तो बौखलाहट में चीनी मीडिया ने भारतियों को "कुत्ता और भोंकने वाला समाज" बता दिया
अभीतक भारत के बाजार में 30% तक चीनी सामान की मांग कम हुई थी, चीन की गाली गलौज के बाद 45% हो गयी
और 25 तारिक तक तो लगभग 60% चीनी सामानों मांग बाजार में कम हो गयी
और अब धनतेरस के दिन चीन की नींद ऐसी उडी हुई है कि चीनी राष्ट्रपति सि जिनपिंग ने भारत को धमकी भी दे दी
जिनपिंग ने कहा है कि, "भारत के लोगों द्वारा चीन के सामानों के बहिष्कार से भारत-चीन के रिश्ते में खराबी आएगी"
जिनपिंग की धमकी का ट्रांसलेशन करें तो चीन का
कहना है कि "भारत हमारा सामान लेता यह वरना बहुत बुरा होगा"
आपको बता दें कि गाली गलौज के बाद चीन अब धमकी पर उतर गया है, अगर भारत के लोगों ने अपनी मुहीम में और तेजी लाई तो जल्द ही चीन की सारी अकड़ निकल जाएगी और वो औकात पर आते हुर भारतीयों के सामने हाथ जोड़ेगा।
http://www.dainikbharat.org/2016/10/blog-post_381.html

Anti Secular News Portal - Dainik Bharat

31/10/2016

आज पूरे देश में चीनी माल को प्रतिबंधित करने की मांग जोर शोर से उठ रही है। भारतीय जनमानस का एक वर्ग चीनी माल न खरीदने को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने में लगा है, वहीं दूसरी ओर समाज के दूसरे वर्ग का कहना है कि यह कार्य भारत सरकार का है।
दरअसल, यह बात एक तरह से सही भी है कि जब सरकार चीन से नए अर्थिक और व्यापारिक अनुबंध कर रही है और स्वयं चीनी माल का आयात कर रही है, तो भारत की जनता से यह अपेक्षा करना कि वह उस सस्ती विदेशी वस्तु को खरीदने के मोह को त्याग दे जिस पर 'इम्पोर्टिट ' का लेबल लगा हो व्यर्थ है। आखिर बाज़ार अर्थव्यवस्था पर चलता है भावनाओं पर नहीं।
देखा जाए तो चीनी माल पर सरकार के विरोध को मुख्‍य मानने वाले लोगों तर्क है कि जब सरदार पटेल की मूर्ति ही चाइना में बन रही है, अधिकतर इलेक्ट्रॉनिक आइटम चाइनीस हैं और तो और जो मोबाइल इंइियन कम्पनियों द्वारा निर्मित हैं उनके पार्ट्स तो चाइनीस ही हैं तो फिर चीनी माल का विरोध करना ही विरोधाभासी है।
वैसे देखा जाए तो इस तरह के तर्कों को सामने रखने वाले लोगों को यह बात पता होनी चाहिए कि सरदार पटेल की मूर्ति की सच्चाई यह है कि उसका निर्माण भारत में ही हो रहा है, जिसका ठेका एक भारतीय कम्पनी 'एलएंडटी ' को दिया गया है और केवल उसमें लगने वाली पीतल की प्लेटों को ही चीन से आयात किया जा रहा है, जिसकी कीमत मूर्ति की सम्पूर्ण लागत का कुल 9% है। चूंकि इस काम को सरकार ने एक प्राइवेट कंपनी को ठेके पर दिया गया है, तो यह उस कंपनी पर निर्भर करता है कि वह कच्चा माल कहां से ले।
अब बात करते हैं भारतीय बाजार में सस्ते चीनी माल की , तो यह एक बहुत ही उलझा हुआ मुद्दा है, जिसे समझने के लिए हमें कुछ और बातों को समझना होगा। सर्वप्रथम तो हमें यह समझना होगा कि ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में चीनी माल से भारतीय बाजार ही नहीं, विश्व के हर देश के बाजार भरे हैं, चाहे वो अमेरिका अफ्रीका या फिर रूस ही क्यों नहीं हो।
यकीनन, विश्व के हर देश के बाज़ारों में सस्ते चीनी माल ने न सिर्फ उस देश की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है, बल्कि वहां के स्थानीय उद्योगों को भी क्षति पहुंचाई है। वह दूसरे देशों से कच्चे माल का आयात करता है और अपने सस्ते इलेक्ट्रॉनिक उपकरण , खिलौनों और कपड़ों का निर्यात करता है । इस प्रकार चीन तेजी से एक आर्थिक शक्ति बनकर उभर रहा है और अमेरिका को आज अगर कोई देश चुनौती दे सकता है तो वह चीन है।
चाइना वह देश है जो अपने भविष्य के लक्ष्य को सामने रखकर आज अपनी चालें चलता है, जो न सिर्फ अपने लक्ष्य निर्धारित करता है, बल्कि उन्‍हें हासिल करने की दिशा में कदम भी उठाता है। उसके लक्ष्‍य की राह में भारत एवं पाकिस्तान एक साधन भर है। पाकिस्तान का उपयोग चीन द्वारा वहां इकॉनोमिक कोरिडोर (सीपीईसी) बनाकर किया जा रहा है। उस पर वह बेवजह 46 बिलियन डॉलर खर्च नहीं कर रहा। वह इसके प्रयोग से न सिर्फ यूरोप और मध्य एशिया में अपनी ठोस आमद दर्ज कराएगा, बल्कि भारत से युद्ध की स्थिति में सैन्य सामग्री और आयुध भी बहुत ही आसानी के साथ कम समय में अपने सैनिकों तक पहुंचाने में कामयाब होगा, जबकि भारत के लिए ऐसी ही परिस्थिति में यह प्राकृतिक एवं सामरिक कारणों से मुश्किल होगा। इसी कॉरीडोर के निर्माण के कारण चीन हर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देता है, फिर वह चाहे आतंकवाद या फिर आतंकी अजहर मसूद ही क्यों न हो।
दूसरी ओर भारत की सरकार अपने लक्ष्य पांच साल से आगे देख नहीं पाती, क्योंकि जो पार्टी सत्ता में होती है, वह देश के भविष्य से अधिक अपनी पार्टी के भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लेती है, और भारत की जनता की पसंद भी हर पांच साल में बदल जाती है।
देखा जाए तो यह भी भारत का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि भारत का आम आदमी , पार्टी या प्रत्याशी का चुनाव देश हित को ध्यान में रखकर करने के बजाय अपने छोटे-छोटे स्वार्थों या फिर अपनी जाति अथवा सम्प्रदाय को ध्यान में रखकर चुनता है। यह एक अलग विषय है कि हम लोगों के कोई वैश्विक लक्ष्य कभी नहीं रहे यही वजह है कि आजादी के 70 सालों बाद आज भी हमारे यहां बिजली , पीने का पानी , कुपोषण और रोजगार ही चुनावी मुद्दे होते हैं।
खैर, हम बात कर रहे थे चीनी माल की तो यह आश्चर्यजनक है कि विदेशी बाजारों में जो चीनी माल बेहद सस्ता मिलता है, वह स्वयं चीन में महंगा है। यह आम लोगों के समझने का विषय है कि भारतीय बाजार में उपलब्ध चीनी माल सस्ता तो है, लेकिन साथ ही घटिया भी है। बिना गैरन्टी का यह सामान न सिर्फ हमारे स्वास्थ्य को बल्कि हमारे उद्योगों को भी हानि पहुंचा रहा है।
हम भारतीय इस बात को नहीं देख पा रहे कि 1962 में चीन ने भारतीय सीमा में अपनी सेनाओं के सहारे घुसपैठ की थी। वही घुसपैठ वह आज भी कर रहा है, बस उसके सैनिक और उनके हथियार बदल गए हैं । आज उसके व्यापारियों ने सैनिकों की जगह ले ली है और चीनी माल हथियार बनकर हमारी अर्थव्यवस्था हमारे मजदूर हमारे उद्योग हमारा स्वास्थ्य सभी पर धीरे-धीरे आक्रमण कर रहा है।
टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राजकुमार के अनुसार "यह भारतीय उद्योगों को बर्बाद करने का चीन का बहुत बड़ा षड्यंत्र है। जान-बूझकर वह सस्ता माल भारतीय बाजार में उतार रहा है और हमारा उपभोक्ता इस चाल को समझ तभी पाता है, जब वह इसका प्रयोग कर लेता है। इस घटिया माल को न बदला जा सकता है और न ही वापस किया जा सकता है।"
भारत सरकार चीन के साथ जो व्यापारिक समझौते कर रही है, वह आज के इस ग्लोबलाइजेशन के दौर में उसकी राजनैतिक एवं कूटनीतिक विवशता हो सकती है, लेकिन वह इतना तो सुनिश्चित कर ही सकती है कि चीन से आने वाले माल पर क्‍वालिटी कंट्रोल हो ।
यकीनन, भारत सरकार इस प्रकार की नीति बनाए कि भारतीय बाजार में चीन के बिना गारन्टी वाले घटिया माल को प्रवेश न मिले, क्योंकि चीन भी घटिया माल बिना गारन्टी के सस्ता बेच रहा है, लेकिन जब उसी माल पर उसे गारन्टी देनी पड़ेगी तो क्वॉलिटी बनानी पड़ेगी और जब क्वालिटी बनाएगा तो लागत निश्चित ही बढ़ेगी और वह उस माल को सस्ता नहीं बेच पाएगा।
इसके साथ-साथ सरकार को भारतीय उद्योगों के पुनरुत्थान के प्रयास करना चाहिए । 'मेक इन इंडिया ' को सही मायने में चरितार्थ करने के उपाय खोज कर इस प्रकार के भारतीय उद्योग खड़े किए जाएं जो चीन और चीनी माल दोनों को चुनौती देने में सक्षम हों। अन्त में भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहां जनता ही राजा होती है, वहां की जनशक्ति अपने एवं देश के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई भी कदम उठाने को स्वतंत्र है ही ।

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