21/12/2024
World Meditation Day
संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 दिसंबर 2024 को पहला विश्व ध्यान दिवस (वर्ल्ड मेडिटेशन डे) मनाने की घोषणा की थी और इसी कारण आज पूरे विश्व में ध्यान के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
ध्यान का महत्त्व प्राचीनतम संस्कृतियों को भी ज्ञात था और हड़प्पा सभ्यता के अवशेषों में ध्यानमग्न आकृतियां भी मिली हैं।
भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में ध्यान को अंतर्मुखी होकर साधना करने का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है और इसी कारण हमारे ऋषियों, योगियों, तपस्वियों ने ध्यान करके ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में सफलता प्राप्त की। सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर मनुष्य के विकास की यात्रा का ज्ञान भी हमारे ऋषियों को ध्यान में ही हुआ।
सतयुग से त्रेता, त्रेता से द्वापर, और द्वापर से कलियुग में आते आते मानव चेतना का पतन होता गया और मनुष्य केवल प्रत्यक्ष अनुभव को ही ज्ञान का आधार मानने लगा। आत्मा और परमात्मा की समझ नहीं रही तो केवल बाहरी इंद्रियों से मिलने वाली सूचनाओं को ही ज्ञान माना जाने लगा।
ध्यान के आध्यात्मिक उद्देश्य को भूलकर उसे शारीरिक और मानसिक लाभ का एक साधन माना जाने लगा है। पहले तो पश्चिम की संकीर्ण सोच में जकड़ा विज्ञान योग और ध्यान के किसी भी लाभ को मानने को ही तैयार नहीं था किंतु समय के साथ भारत का ज्ञान पश्चिमी देशों तक पहुंचा और अब योग एवं ध्यान की महता को पश्चिम देशों की जनता भी स्वीकार करने लगी है। उसी जनमत के दवाब के कारण अब विश्व योग दिवस और विश्व ध्यान दिवस मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र संघ को करनी पड़ी है।
अब प्रश्न यह उठता है कि जब पूरे विश्व में ध्यान के लाभों पर चर्चा हो रही है और अनेक प्रकार के ध्यान का बाजार खड़ा किया जा रहा है तो उसमें परम पूज्य सदगुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के बताए आध्यात्मिक ध्यान और उसके अकल्पनीय अनुभव के बारे में मानवता को कैसे जागृत किया जाए।
पूज्य सदगुरुदेव सियाग ने स्वयं यह कहा है कि यह पूरी मानवता के उत्थान और दिव्य रूपांतरण का विषय है और इसमें स्वयं साधना करके ही अनुभव किया जा सकता है।
इसलिए हम सभी का यह उत्तरदायित्व है कि अंतर्मुखी होकर पूज्य गुरुदेव के निर्देशों के अनुसार ध्यान करें और अपने अनुभव पूर्ण सत्यता और विनम्रता के साथ दूसरों को बताएं।
पूर्ण विकास तो सदगुरुदेव सियाग के ध्यान से ही होगा, यह हमें बताना है।