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Power on : Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimali Ji
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31/08/2026

Kundilini Jagran by Sadgurudev Dr. Narayan Dutt Shrimali Ji 🙏🥰❤️
# Kailash Chandra Shrimali ji

--- *सदगुरु देव  का अमर संदेश सभी भाई बहनों के लिए* 🌺 *वह पत्र जो सद्गुरुदेव ने बहुत पहले ही लिख दिया था* 🌺गुरु पूर्णिमा...
07/08/2026

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*सदगुरु देव का अमर संदेश सभी भाई बहनों के लिए*
🌺 *वह पत्र जो सद्गुरुदेव ने बहुत पहले ही लिख दिया था* 🌺

गुरु पूर्णिमा, वि. संवत् 2056 (सन् 1999)

✍️ परम पूज्य सद्गुरुदेव डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी महाराज के द्वारा

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(1) भूमिका – सद्गुरुदेव का अमर संदेश)

सद्गुरुदेव डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी महाराज केवल एक गुरु नहीं थे, वे युग के महामनीषी थे।
उनकी साधना, उनका ज्ञान और उनकी करुणा इस धरती पर एक अमिट छाप छोड़ गए।
वे जानते थे कि वह दिन आएगा जब उनके शिष्य शरीर रूप से उन्हें न पा सकेंगे,
परंतु वह भी जानते थे कि सच्चा गुरु कभी दूर नहीं जाता।

इसीलिए उन्होंने बहुत पहले, गुरु पूर्णिमा (वि.सं. 2056) के दिन यह पत्र लिखा —
ताकि जब भी किसी शिष्य के हृदय में अकेलापन, निराशा या शंका उठे,
तो यह पत्र उसे याद दिला दे —
कि गुरु न कभी गए हैं, न जा सकते हैं, वे तो शिष्य के हर श्वास में बसे हैं।

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(2) सद्गुरुदेव का मूल पत्र

मेरे परम आत्मीय पुत्रों,

तुम क्यों निराश हो जाते हो, मुझे न पाकर अपने बीच?
मगर मैं तो तुम्हारे बिलकुल बीच ही हूँ।
क्या तुमने अपने हृदय की आवाज़ को ध्यान से सुना है?
शायद नहीं भी सुन पा रहे होगे...
और मुझे मालूम था कि एक दिन यह स्थिति आएगी,
इसीलिए यह पत्र मैंने पहले ही लिखकर रख दिया था,
कि जब वह समय आए, तब यह तुम तक पहुँच सके।

पर मैं तुमसे दूर हुआ ही कहाँ हूँ?
तुमको लगता है कि मैं चला गया हूँ —
पर एक बार अपने हृदय को टटोलकर देखो,
पूछो तो सही अपने भीतर से, क्या वास्तव में गुरुदेव चले गए हैं?
ऐसा हो ही नहीं सकता।
क्योंकि उस हृदय में मैंने प्राण भरे हैं,
उसे मैंने अपने रक्तकणों से सींचा है।
तो फिर उसमें से ऐसी आवाज़ कैसे उठ सकती है
कि “गुरुदेव अब नहीं हैं”?

जिस शरीर को तुम ‘अपना’ समझते हो, वह भी तो तुम्हारा नहीं।
और जब तुम ही तुम नहीं,
तो यह शरीर, यह हृदय, यह आँखों के अश्रुकण —
सब मैं ही हूँ।
तुम्हारे भीतर बैठा हुआ मैं ही हूँ,
बस तुम समझ नहीं पाते हो।
पर जो दूसरे लोग तुम्हें देखते हैं,
वे अवश्य अनुभव करते हैं कि तुम्हारे भीतर कुछ दिव्य है —
वह दिव्यता मैं ही हूँ।

अभी तो मेरे बहुत से कार्य शेष पड़े हैं।
इसीलिए मैंने अपने खून से तुम्हें सींचा,
अपनी तपस्या तुममें डाली और तुम्हें तैयार किया।
अब उन कार्यों को पूर्णता देने की ज़िम्मेदारी तुम्हारी है।
मेरे मानस पुत्र ही मेरे कार्यों को पूर्ण कर सकते हैं।
क्योंकि वह पात्रता, वह योग्यता मैंने तुम्हें ही दी है।

उस नित्य लीला विहारिणी शक्ति ने मुझसे एक कार्य कराया —
वह था तुम्हारा निर्माण।
जब मुझे विश्वास हो गया कि तुम्हें ऊर्जा और चेतना प्रदान कर दी है,
तो मेरे कार्य का वह चरण पूरा हुआ।
पर अभी बहुत कुछ अधूरा है,
जो मैंने तुम्हारे मजबूत कंधों पर छोड़ दिया है।
तुम्हें इसके संकेत मिलते रहेंगे।

तुम्हें प्रचंड दावानल बनकर समाज की अज्ञानता, पाखंड, ढोंग और मिथ्या अहंकार की जड़ें जलाकर राख करनी हैं।
और जहाँ कोई सच्चा पथिक मिले, कोई पीड़ित हृदय,
वहाँ प्रेम बनकर बरस जाना —
गुरुदेव का संदेश देना और उसे भी प्रेम का मेघ बना देना।

फिर देखना, वह दिन दूर नहीं जब प्रेम के बादल पूरे विश्व में बरसेंगे,
और उनकी बूंदों से भारत झूम उठेगा।
भारत का हर कोना सिद्धाश्रम बन जाएगा —
और आगे चलकर पूरा विश्व भी।

कौन कहता है यह असंभव है?
एक अकेला मेघ पूरी धरती को नहीं सींच सकता,
पर जब असंख्य मेघ एक साथ उठेंगे,
तो संसार में मौसम ही बदल जाएगा।

तुम भी तो मेरे “अल्फांसो आम” हो —
अव्वल दर्जे के, दुर्लभ, मधुर!
तुम्हें भी फैल जाना है पूरे विश्व में,
मेरे प्रतिनिधि बनकर, मेरी सुगंध बिखेरने के लिए।

गुरु नानक जी की कथा याद रखो —
उन्होंने अच्छे लोगों को कहा कि “उजड़ जाओ”,
और बुरे लोगों को कहा “बसे रहो”।
क्योंकि अच्छाई को फैलना चाहिए,
बुराई को सीमित रहना चाहिए।
इसलिए तुम भी गतिशील बनो, नदी की तरह बहो,
ताकि तुम्हारे जल से और प्यासे हृदय तृप्त हो सकें।

एक दिन घर से निकल पड़ो —
हाथ में कुछ पत्रिकाएँ लेकर,
गुरुदेव का संदेश लेकर,
और लौटो तभी जब उन पत्रिकाओं को योग्य हाथों तक पहुँचा दो।
फिर देखना, कैसे नहीं गुरुदेव की कृपा बरसती है!
एक बार प्रयास तो करो —
एक बार तूफ़ान बनो अपने भीतर,
गुरुदेव का हाथ बनकर देखो!
फिर सब कुछ स्वयं घटित होता चला जाएगा।

छोटी-छोटी समस्याओं से मत डरना,
क्योंकि समुद्र में इतनी गहराई नहीं
कि वह निखिलेश्वरानंद के शिष्यों को डुबो सके।
मैं तुम्हारे पीछे खड़ा हूँ, सदा खड़ा रहूँगा।
तुम मुझसे कभी अलग नहीं थे, न हो सकते हो।
दीपक की लौ से प्रकाश को अलग नहीं किया जा सकता —
तुम तो मेरी किरणें हो, मेरा प्रकाश हो, मेरा सृजन हो।

“तुम भी तो...” मैंने पहले कहा था,
पर अब कहता हूँ — “तुम ही तो!”
कौन कहता है मैं उपस्थित नहीं हूँ?
अब तो मैं पहले से भी अधिक उपस्थित हूँ।
वह दिन दूर नहीं जब तुम अपने रोम-रोम में
अपने गुरुदेव और माताजी का अनुभव करोगे।

मैंने तुम्हें बहुत प्रेम से पाला है,
कभी कठोर परीक्षा नहीं ली —
क्योंकि मैं चाहता था कि यह प्रेम
तुम कभी न भूल सको,
और इस गुरु परिवार से जुड़े रहो
जहाँ प्रेम ही जीवन है।

समय आने पर मैं तुम्हें गढ़ता रहूँगा।
मेरे वचन कभी व्यर्थ नहीं जाते —
तुम्हारी आँखों के सामने
मैं अपने हर वायदे को साकार कर दिखाऊँगा।
और उस क्षण तुम्हारे नेत्रों में
प्रेमाश्रु के अलावा कुछ नहीं बचेगा,
क्योंकि “तुम ही तो मेरे हो...”

सदैव स्नेह और आशीर्वाद सहित,
— तुम्हारा सद्गुरुदेव
डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली

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(3) भावार्थ एवं प्रेरणा

यह पत्र सद्गुरुदेव के हृदय से निकला दिव्य संदेश है।
यह हमें सिखाता है कि गुरु शरीर नहीं, चेतना हैं।
वे हमारे भीतर हैं, हमारे कर्मों में, हमारी दृष्टि में, हमारे स्वभाव में।

सद्गुरुदेव चाहते हैं कि उनका हर शिष्य केवल साधक न रहे —
बल्कि “चलता-फिरता सिद्धाश्रम” बन जाए।
हर जगह प्रेम, प्रकाश और ज्ञान बाँटे।
गुरु-भक्ति का असली अर्थ यही है कि
हम स्वयं गुरु का कार्य, गुरु की दृष्टि, और गुरु का हृदय बन जाएँ।

जो साधक इस पत्र को समझकर जीवन में उतार लेता है,
उसके लिए कोई असंभव नहीं रहता।
क्योंकि उस क्षण से गुरुदेव स्वयं उसके साथ चलने लगते हैं।

31/07/2026

Aapse pyara koi nahi🥹🥰❤️ Humaare pyaare sadgurudev 🙏❤️

तुम्हारा तो पता नहीं..  पर मेरा दिल बहोत तारसता है तुमसे बात करने के लिए 🙂🍃❤️हे सदगुरूदेव 🤗💞
29/04/2026

तुम्हारा तो पता नहीं.. पर मेरा दिल बहोत तारसता है
तुमसे बात करने के लिए 🙂🍃❤️

हे सदगुरूदेव 🤗💞

15/03/2026

जय सदगुरूदेव 🙏🥰❤️

गुरु की शिक्षा ही हमारा सबसे बड़ा बल है। Jai sadgurudev 🙏❤️
21/02/2026

गुरु की शिक्षा ही हमारा सबसे बड़ा बल है।
Jai sadgurudev 🙏❤️

07/02/2026

अपनी सारी चेतना को अपने सारे ज्ञान को और अपने पूरे जीवन के अनुभव को कण-कण को साक्षी भूत रख करके स्पष्ट कहता हूं... मैं आपसे बोहोत प्यार करता हूँ|

Humaare Pyaare Sadgurudev 🥹🥹🙏❤️❤️
Aisa prem, koi nahi kar skta..🤗❤️

🌹🍀तीन दिव्य शिविर: एक ही गुरु चेतना (जहाँ गुरु हैं, वहीं शिव हैं)🍀🌹गुरु सान्निध्य में महाशिवरात्रि साधना महोत्सव❤️❤️गुरु...
05/02/2026

🌹🍀तीन दिव्य शिविर: एक ही गुरु चेतना (जहाँ गुरु हैं, वहीं शिव हैं)🍀🌹

गुरु सान्निध्य में महाशिवरात्रि साधना महोत्सव❤️❤️

गुरु सान्निध्य में महाशिवरात्रि का संपन्न होना केवल एक पर्व का आयोजन नहीं, बल्कि साधक के जीवन में चेतना के जागरण का क्षण होता है। गुरु की कृपा और मार्गदर्शन में की गई साधना, शिव तत्व से साक्षात्कार कराती है। जब शिवरात्रि गुरु सान्निध्य में मनाई जाती है, तब उपासना केवल विधि नहीं रह जाती, वह अनुभूति बन जाती है: जहाँ साधक के भीतर शिव का प्रकाश उतरता है और जीवन के अंधकार का क्षय होता है।🙏❤️

Shivratri Shivir:

1: सद्गुरुदेव श्री नंदकिशोर श्रीमाली जी
📍 शिविर स्थल : ओंकारेश्वर

2: सद्गुरुदेव श्री कैलाश चंद्र श्रीमाली जी
📍 शिविर स्थल : काशी विश्वनाथ (वाराणसी)

3: सद्गुरुदेव श्री अरविंद श्रीमाली जी
📍 शिविर स्थल : एलोरा, छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र)

आप सभी का स्वागत है🙏❤️✨️✨️

गुरु वह प्रकाश हैं, जो जीवन के प्रत्येक अंधकार को दूर कर देते हैं।🥰🤗🙏❤️जय सदगुरूदेव 🙏❤️
04/02/2026

गुरु वह प्रकाश हैं, जो जीवन के प्रत्येक अंधकार को दूर कर देते हैं।🥰🤗🙏❤️
जय सदगुरूदेव 🙏❤️

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