वृक्षों की रक्षार्थ अमृता देवी विश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों द्वारा जीवन बलिदान विश्व इतिहास में अनोखा उदाहरण है! यह शौर्यपूर्ण बलिदान विक्रम संवत 1787 के भाद्रपद माह की शुक्ल दशमी (सन् 1730) को हुआ! जोधपुर के महाराजा अभयसिंह अपने किले के विस्तार करने हेतु निर्माण कार्य प्रारंभ करवा रहे थे तथा निर्माण कार्य प्रारंभ करने के लिए चुना तैयार करने हेतु खेजड़ी की लकड़ी की आवश्यकता थी! उन्होंने अपने म
ंत्री गिरधर भंडारी को खेज़रली गांव से खेजड़ी के वृक्ष काटने का कार्य सौंपा! स्थानीय विश्नोई जाति के लोगों द्वारा भगवान जंभेश्वर महाराज की शिक्षा की पालना करते हुए खेजड़ी के वृक्षों को काटने का विरोध किया! गिरधर भंडारी के नेतृत्व में सैनिकों ने जन आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया! वृक्षरक्षा के लिए 84 गांव के विश्नोई लोग एकत्र हो गए और और बलपूर्वक वृक्षों के कटास का विरोध करने लगे और उन्होंने वृक्षों को बाहों में भर लिया! इस नारे के साथ कि "सिर साठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण"(सिर के बदले वृक्ष बच जाए तो उस बलिदान को सस्ता समझना) चिपको आंदोलन का श्रीगणेश किया! अमृता देवी विश्नोई के नेतृत्व में लोगों 363 लोगों ने अपने सिर कटा दिए और वृक्षों की रक्षा के निमित्व राजा के शक्तिशाली सैन्य बल के विरुद्ध अपने जीवन का बलिदान दे दिया! यह संदेश तेजी से फैला और राजा जनशक्ति के सामने झुका और बिश्नोईयों के गांव में पेड़ों की कटाई निषिद्ध कर दी तथा ताम्रपत्र जारी किए! यह घटना जोधपुर सरदारसमंद रोड पर जोधपुर से 25 किलोमीटर दक्षिण में स्थित ग्राम खेजरली कलां में हुई! यहां बलिदानों की स्मृति में एक स्मारक बना हुआ है तथा प्रतिवर्ष इस बलिदान की बरसी पर लोगों का विशाल समूह शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र होते है!
Alerts
Be the first to know and let us send you an email when 363 Martyrdom Memorial, Khejarli posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.
Contact The Place Of Worship
Send a message to 363 Martyrdom Memorial, Khejarli: