श्री डूंगरपुरीजी का मंदिर रामसर लोड़ता अचलावता

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29/02/2024

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18/05/2018
04/03/2018

आत्मा का अर्थ विश्वात्मा से हैं जिसे हम सार्वभौम आत्मा या परमात्मा कह सकते हैं विश्वात्मा एक ही हैं जिसके प्रकाश से सब प्रकाश से सब प्रकाशित हैं और जिसके अस्तित्व से ही सबका अस्तित्व हैं विश्वात्मा या सार्वभौम आत्मा का दूसरा नाम ब्रहमा हैं ब्रहमा ब्रहमाण्ड की आत्मा का ही दूसरा नाम हैं जो सर्वव्यापक हैं परन्तु जीवात्माऍ अलग-अलग इकाइयों में हैं और अपने शुभ अशुभ कर्मो के लिये जिम्मेदार हैं जीवात्माऍ कर्म करने के लिए स्वतंत्र हैं जबकि कर्मफल के भोग के लिए वे परमात्मा कि व्यवस्था में परतंत्र हैं सार्वभौम आत्मा या ब्रहमा को मानव की भौतिक ऑखें साधारणतया नही देख सकती उसे अनुभव किया जा सकता हैं या ह्रदय की आखों से देखा जाकता हैं

श्री डूंगरपूरीजी मंदिर लोड़ता रामसर में आपका स्वागत हे अधिक जानकारी के लिए लोग ओन करे http://dungardhora.com/index.html क...
13/01/2018

श्री डूंगरपूरीजी मंदिर लोड़ता रामसर में आपका स्वागत हे अधिक जानकारी के लिए लोग ओन करे http://dungardhora.com/index.html
कॉल 9783788670

22/11/2017

श्री डूंगरपुरीजी महाराज की अवतार लीला-
श्री डूंगरपुराण के अनुसार एक बार देवलोक में धम्रराज के दरबार में देवताओं की सभा हुई वहा पर शुकदेव मुनि ने धरमराजजी से एक बार मृत्युलोक में भरमण करने की अनुमति मागी और कहा कि मै मृत्युलोक में भ्रमण करने जाऊगा मगर आपको एक बार वहा मुझसे मिलने आना होगा धर्मराजजी ने आने का अवसर ढुंढने लगे उसी समय की बात हैं कि जैसलमेर के पास एक गढाडाचां गांव में एक ब्राहामण व ब्राहामणी रहते थे जिनके कोई संतान नही थी पास में एक पहाङी पर डुंगरेसिया माताजी का मंदिर था जहा वे हमेशा पुत्र प्रापत के लिए देवी उपासना करते थे एक बार वर्षा आने कारण वे पुजा के बाद घर नहि जा सके और दोनो मंदिर में सो गये 1 ऐसा अवसर पाकर शुकदेव मुनिजी ने अपना छौटा रूप धारण करके देवीमा आगे बालक की रोने की अवाज आई सुनकर ब्राहामण व ब्राहमणी दोनों मुर्ति के पास गये तो उनहें एक छोटा सा बालक दिखाई दिया और कहने लगे हे डूंगरेसिया माताजी अगर हमें ये बालक दिया हैं तो इसके पालन के लिए बाहमणी के स्तन से दूध भी आना चाहिए तत्काल हि ब्रहामणि के स्तनो दूध सस्त्रावित होने लगा श्री डूंगरेसिया माताजी के चरणो में पाये जाने के कारण बालक का नाम डूंगरा रखा गया श्री भावपुरीजी से सन्सया धारण करने के बाद श्री डूंगरपुरीजी नाम से पुकारे जाने लगे ब्रहामण व ब्रहामणि दवारा उनका पालन पोषण किये जाने के कारण उन्हें उनकी संनता माना जाता हैं श्री डूंगरपुरीजी का जन्म विक्रम संवत * 1770 * में भादवा सुदी पांचम को हुआ। श्री डूंगरपुरी जी के पिताजी का नाम श्री गंगोदक ऋषि व माताजी का नाम श्रीमति चैनावति था। व मार्कण्ड शाखा के श्री माली ब्राहमण व उनका मुदगला था।

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