21/05/2026
बहुत पुराना मकान पूर्वजों का बना हुआ,, जिनके हिस्से में आता है वह निर्धन रहता है,, केवल पितरों की उपासना से ही धनी हो सकता है,,
अक्सर देखा जाता है कि पूर्वजों (पितरों) की अर्जित की हुई भूमि या मकान में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा व्याप्त होती है। यदि उस स्थान पर रहने वाले वंशज पितरों के प्रति उदासीन रहते हैं, तो पितृ दोष या पितृ असंतोष के कारण जीवन में आर्थिक तंगी, वंश वृद्धि में रुकावट और मानसिक अशांति बनी रहती है।
इसके विपरीत, यदि सही विधि से वहां पितरों की उपासना की जाए, तो वही भूमि अक्षय धन और समृद्धि देने वाली बन जाती है। ऐसे पुराने मकानों और परिस्थितियों के लिए कुछ बेहद अचूक और शास्त्रीय उपाय नीचे दिए गए हैं:
1. दैनिक और पाक्षिक सेवा (नियमित उपाय)
दक्षिण दिशा में दीपक: घर की दक्षिण दिशा पितरों की मानी गई है। रोज़ शाम को घर की दक्षिण दिशा में या पीने के पानी के स्थान (मटका/परिंडा) के पास एक दीपक (सरसों के तेल या तिल के तेल का) पितरों के नाम से जलाना शुरू करें।
अमावस्या का विशेष भोग: हर महीने आने वाली अमावस्या पितरों को समर्पित होती है। इस दिन घर में सात्विक भोजन (जैसे खीर, पूरी) बनाएं। भोजन का पहला हिस्सा अग्नि को दें, फिर गाय, कौए और कुत्ते के लिए निकालें।
तर्पण: अमावस्या के दिन हाथ में काले तिल और जल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को तृप्त होने की प्रार्थना करते हुए जल अंजलि दें।
2. मंत्र साधना (दरिद्रता नाशक)
पितरों को प्रसन्न करने और उनकी कृपा से धन-धान्य की प्राप्ति के लिए नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करना चाहिए:
"ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः॥"
यदि संभव हो तो रोज़ 1 माला या अमावस्या को इस मंत्र का पाठ अवश्य करें।
3. वास्तु और शुद्धि उपाय
गंगाजल और कपूर: पुराने मकानों में नकारात्मक ऊर्जा जल्दी घर कर लेती है। इसलिए हर अमावस्या या पूर्णिमा को पूरे घर में गंगाजल छिड़कें और शाम के समय भीमसेनी कपूर जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं।
जीर्णोद्धार (Repairs): यदि मकान में कहीं सीलन है, छत टपकती है या दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) का हिस्सा टूटा-फूटा है, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं। पितृ स्थान का साफ-सुथरा होना अनिवार्य है।
4. श्रीमद्भागवत या गीता पाठ
ऐसे मकान में रहकर यदि गीता के सातवें या ग्यारहवें अध्याय का नियमित पाठ किया जाए और उसका पुण्य पितरों को अर्पित किया जाए, तो पितरों को तुरंत मुक्ति और उच्च गति मिलती है।
जैसे ही पितृ तृप्त होते हैं, उनका आशीर्वाद उस परिवार को "अष्ट लक्ष्मी