विष्णु अवतारी श्री बाबा गंगाराम का पावन धाम राजस्थान के झुंझुनू नगर में श्री पंचदेव मंदिर के नाम से विख्यात है। बाबा कलयुग में प्रत्यक्ष देव हैं जो भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। इस मंदिर की स्थापना भक्त शिरोमणि श्री देवकीनंदन ने की थी। श्री बाबा गंगाराम जी की महिमा
विष्णु अवतारी बाबा गंगाराम का पावन धाम राजस्थान के झुंझुनू नगर में श्री पंचदेव मंदिर के नाम से विख्यात है, बाबा की महिमा सारे
संसार में फ़ैल रही हैं, इनके चमत्कारों को गिनना सूर्ये को दीपक दिखाने के समान हैं।
बाबा गंगाराम का अवतार श्रावण शुक्ल दशमी सन 1895 में श्री हरि विष्णु के अंश से वैश्य वंश में हुआ था। कलियुग में भगतो के कल्याण के लिए परगट हुए बाबा गंगाराम प्रत्यक्ष देव हैं, जो भी श्रद्धा और विश्वास से बाबा को ध्याते हैं, उसकी समस्त मनोकामनाएं बाबा अवश्य पूरी करते हैं। बाबा के जनकल्याण हेतु सपने में मंदिर के निर्माण का दिव्य आदेश भक्त शिरोमणि देवकीनंदन और उन की धर्मपत्नी शक्ति स्वरूपा गायत्री देवी को दिया, जिसके पश्चात झुंझुनू में गंगादशहरा के पावन दिन सन 1975 में उन्होंने पंचदेव मंदिर की स्थापना की, मंदिर में बाबा गंगाराम सहित श्री शिव परिवार,पवनपुत्र हनुमान, माँ दुर्गा , एवं माँ लक्ष्मी की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
त्याग, तपस्या और भक्ति का इतिहास - भक्त शिरोमणि श्री देवकीनंदन एवं शक्ति स्वरूपा देवी गायत्री बाबा की लीलाओं के प्रबल वाहक थे, उन्होंने बाबा की भक्ति में तन-मन-धन न्योछावर करते हुए भक्ति का जो इतिहास लिखा, वो अभूतपूर्व हैं। झुंझुनू में पंचदेव मंदिर की स्थापना के पश्चात् उन्होंने सांसारिक मोह माया से विरिक्त हो गई। उन्होंने अपनी करोड़ों की सम्पदा , चल-अचल संपत्तिका तिनके की भांति त्याग कर दिया और अपनी संतति सहित मंदिर परिसर को ही अपना संसार समझकर बाबा की सेवा में सपर्पित हो गए। राजा हरिशचंद्र की भांति उनका यह त्याग, आज के भौतिक युग में स्वयं एक उदाहरण बन गया। अंततः मंदिर परिसर में सन 1992 में उनके महाप्रयाण के समय त्यागमूर्ति देवी गायत्री की करुण पुकार पर जलती हुई चिता पर उनके पार्थिव शरीर से जो चमत्कार हुए, वे उनकी भक्ति की पराकाष्ठा को सिद्ध करते हैं। ततपश्चात देवी गायत्री में भी अपनी भक्ति और तप से बाबा गंगाराम की महिमा को सारे संसार में प्रकाशित करते हुए सन 2017 में महाप्रयाण किया।
श्री बाबा गंगाराम के पावन धाम श्री पंचदेव मंदिर में भक्त- दृय की साधना में मूर्तिमान स्वरुप नवनिर्मित "आशीर्वाद मंदिर" की स्थापना से ऐसा प्रतीत होता हैं, मानो परिसर में स्वर्ग ही उतर आया हो। सफ़ेद संगमरमर से निर्मित इस मंदिर का आकर्षण एवं कलात्मकता मन मोह लेती हैं। शिव स्वरुप देवकीनंदन एवं शक्ति स्वरूपा देवी गायत्री की युगल प्रतिमा क दर्शन से भक्तगण उनका आशीर्वाद पाकर अपने जीवन को धन्य बनाते हैं।
मंदिर की रज की महिमा - बाबा के धाम की "रज" की महिमा अपरम्पार हैं,इस 'रज' में त्याग-तपस्या का तेज समाया हुआ हैं, इसी कारण मंदिर जाने वाले श्रदालु भक्तगण इसे प्रसाद स्वरुप अपने साथ ले जाते हैं, इससे समस्त कष्टों का निवारण होता हैं और असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं। उक्त 'रज' के वितरण की व्यवस्था कीर्तन स्थल पैर की गई है।
बाबा की भक्ति से लोगो को भौतिक सुख तो प्राप्त होते ही हैं, साथ ही जीवन में सही दिशा भी प्राप्त होती हैं, इस प्रकार त्याग तपस्या और भक्ति का साकार स्वरुप बाबा गंगाराम धाम आज लाखों भक्तोंके विश्वास का केंद्र बिंदु बन गया हैं।