Panchanath Mahadev Mandir

Panchanath Mahadev Mandir There is the Panchmukhi Shivling of Lord Mahadev established here.

Mr.Akhil Je dedicated work street light under  panchanath mahadev mandir campus .so Manny many thanks regard All of panc...
06/10/2024

Mr.Akhil Je dedicated work street light under panchanath mahadev mandir campus .so Manny many thanks regard All of panchanath mahadev mandir member

09/03/2024
Panchanath Mahadev Mandir comitee k president Dhirendra kumar jha ab nae rahe ,WO do mahina se bimar chal rahe the .unka...
27/05/2017

Panchanath Mahadev Mandir comitee k president Dhirendra kumar jha ab nae rahe ,WO do mahina se bimar chal rahe the .unka sahyog yadgar rahega .

महाशिवरात्रि इस बार खास, ऐसे करें पूजन तो मिलेगा विशेष लाभमहाशिवरात्रि इस बार बेहद खास है। दो दिन पड़ने वाले महाशिवरात्र...
23/02/2017

महाशिवरात्रि इस बार खास, ऐसे करें पूजन तो मिलेगा विशेष लाभ

महाशिवरात्रि इस बार बेहद खास है। दो दिन पड़ने वाले महाशिवरात्रि का पर्व स्वार्थ सिद्ध एवं सिद्ध योग पड़ने से खास बन गया है। ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि चतुर्दशी तिथि 24 फरवरी की रात्रि साढ़े नौ बजे प्रारंभ होगी, जो 25 फरवरी को रात्रि सवा नौ बजे तक रहेगी। महाशिवरात्रि का पर्व रात्रि व्यापिनी होने पर विशेष माना जाता है। ऐसे में 25 फरवरी की रात्रि में चतुर्दशी तिथि न होने से 24 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व शास्त्र सम्मत रहेगा।

दो दिन हैं खास योग
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि महाशिवरात्रि को अर्द्ध रात्रि के समय ब्रह्माजी के अंश से शिवलिंग का प्राकट्य हुआ था, इसलिए रात्रि व्यापिनी चतुर्दशी का अधिक महत्व होता है। इस वर्ष सबसे खास बात यह है कि दोनों दिन सिद्ध योग पड़ रहे हैं। 24 फरवरी को स्वार्थ सिद्ध योग तथा 25 फरवरी को सिद्ध योग पड़ रहा है। 24 फरवरी को चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होने के साथ ही भद्रा भी लग जाएगी, लेकिन भद्रा पाताल लोक में होने के कारण महाभिषेक में कोई बाधा नहीं होगी बल्कि यह अत्यंत शुभ रहेगा।

चार प्रहर की करें पूजा
ज्यातिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि जो व्यक्ति वर्ष भर कोई व्रत उपवास नहीं रखता है और वह मात्र महाशिवरात्रि का व्रत रखता है तो उसे पूरे वर्ष के व्रतों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। इससे पूर्व 30 वर्ष पहले महाशिवरात्रि दो दिन मनाई गई थी। शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। शिव रात्रि पर चार प्रहर की पूजा से सभी प्रकार की कामनाएं पूर्ण होती है।
ऐसे करें महाभिषेक

आसानी से प्रसन्न होने वाले भगवान शिवशंकर को प्रसन्न करने के लिए महाभिषेक किया जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान को गाय के दूध से अभिषेक करने पर पुत्र प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है, जबकि घी से असाध्य रोगों से मुक्ति, दही से पशु आदि की प्राप्ति, गन्ने के रस से लक्ष्मी प्राप्ति, शर्करा मिश्रित जल से विद्या बुद्धि, कुश मिश्रित जल से रोगों की शांति, शहद से धन प्राप्ति, सरसों के तेल से महाभिषेक करने से शत्रु का शमन होता है। इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर बेलपत्री, काला धतूरा चढ़ाने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही भगवान शिव के सम्मुख कुबेर मंत्र के जाप से भी धन एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

स्टेशन रोड बर गाछ।🌹वटसावित्री-व्रत🌳( facts shared by Page follower Somesh Rishi👇)🌹वातावरण में विद्यमान हानिकारक तत्त्वों...
04/06/2016

स्टेशन रोड बर गाछ।

🌹वटसावित्री-व्रत🌳
( facts shared by Page follower Somesh Rishi👇)

🌹वातावरण में विद्यमान हानिकारक तत्त्वों को नष्ट कर वातावरण को शुद्ध करने में वटवृक्ष का विशेष महत्त्व है । वटवृक्ष के नीचे का छायादार स्थल एकाग्र मन से जप, ध्यान व उपासना के लिए प्राचीन काल से साधकों एवं महापुरुषों का प्रिय स्थल रहा है । यह दीर्घ काल तक अक्षय भी बना रहता है। इसी कारण दीर्घायु, अक्षय सौभाग्य, जीवन में स्थिरता तथा निरन्तर अभ्युदय की प्राप्ति के लिए इसकी आराधना की जाती है ।🌳

🌹वटवृक्ष के दर्शन, स्पर्श तथा सेवा से पाप दूर होते हैं; दुःख, समस्याएँ तथा रोग जाते रहते हैं । अतः इस वृक्ष को रोपने से अक्षय पुण्य-संचय होता है । वैशाख आदि पुण्यमासों में इस वृक्ष की जड में जल देने से पापों का नाश होता है एवं नाना प्रकार की सुख-सम्पदा प्राप्त होती है । 🌳

🌹इसी वटवृक्ष के नीचे सती सावित्री ने अपने पातिव्रत्य के बल से यमराज से अपने मृत पति को पुनः जीवित करवा लिया था । तबसे ‘वट-सावित्री नामक व्रत मनाया जाने लगा । इस दिन महिलाएँ अपने अखण्ड सौभाग्य एवं कल्याण के लिए व्रत करती हैं । 🌳

🌹व्रत-कथा : सावित्री मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री थी । द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान से उसका विवाह हुआ था । विवाह से पहले देवर्षि नारदजी ने कहा था कि सत्यवान केवल वर्ष भर जीयेगा । किंतु सत्यवान को एक बार मन से पति स्वीकार कर लेने के बाद दृढव्रता सावित्री ने अपना निर्णय नहीं बदला और एक वर्ष तक पातिव्रत्य धर्म में पूर्णतया तत्पर रहकर अंधे सास-ससुर और अल्पायु पति की प्रेम के साथ सेवा की । वर्ष-समाप्ति के दिन सत्यवान और सावित्री समिधा लेने के लिए वन में गये थे । वहाँ सत्यवान बेहोश होकर गया । यमराज आये और सत्यवान के सूक्ष्म शरीर को ले जाने लगे । तब सावित्री भी अपने पातिव्रत के बल से उनके पीछे-पीछे जाने लगी । यमराज द्वारा उसे वापस जाने के लिए कहने पर

🌹🌳सावित्री बोली :
‘‘जहाँ जो मेरे पति को ले जाय या जहाँ मेरा पति स्वयं जाय, मैं भी वहाँ जाऊँ यह सनातन धर्म है।

🌹सावित्री के वचनों से प्रसन्न हुए यमराज से सावित्री ने अपने ससुर के अंधत्व-निवारण व बल-तेज की प्राप्ति का वर पाया । तथा सत्यवान को मृत्युपाश से मुक्त करा लिया।🌳

🌹व्रत-विधि : इसमें वटवृक्ष की पूजा की जाती है । विशेषकर सौभाग्यवती महिलाएँ श्रद्धा के साथ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक या कृष्ण त्रयोदशी से अमावास्या तक तीनों दिन अथवा मात्र अंतिम दिन व्रत-उपवास रखती हैं । यह कल्याणकारक व्रत विधवा, सधवा, बालिका, वृद्धा, सपुत्रा, अपुत्रा सभी स्त्रियों को करना चाहिए ऐसा ‘स्कंद पुराण में आता है। 🌳
🌹संकल्प करें कि ‘मैं मेरे पति और पुत्रों की आयु, आरोग्य व सम्पत्ति की प्राप्ति के लिए एवं जन्म-जन्म में सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वट-सावित्री व्रत करती हूँ ।
वट के समीप भगवान ब्रह्माजी, उनकी अर्धांगिनी सावित्री देवी तथा सत्यवान व सती सावित्री के साथ यमराज का पूजन कर ‘नमो वैवस्वताय "" इस मंत्र को जपते हुए वट की परिक्रमा करें । इस समय वट को १०८ बार या यथाशक्ति सूत का धागा लपेटें ।

Jai baba panchanath mahadev mandir Jhanjharpur .mahashivratri Puja ceremony on Monday
07/03/2016

Jai baba panchanath mahadev mandir Jhanjharpur .mahashivratri Puja ceremony on Monday

07/03/2016

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Jay baba panchanath mahadev mandir Jhanjharpur ki jay
07/03/2016

Jay baba panchanath mahadev mandir Jhanjharpur ki jay

Jay baba panchanath mahadev mandir
07/03/2016

Jay baba panchanath mahadev mandir

The first time  chhat Puja in panchanath mahadev mandir by panchanath colony
18/11/2015

The first time chhat Puja in panchanath mahadev mandir by panchanath colony

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