12/07/2024
*संदली दरवाज़े से ख़ास आपके लिए*
URS MUBARAK 729
*मिट्ठे साहब और शहर बुखारा*
बुखारा एक शहर है जो जदीद दौर के अज़बकिस्तान (west ASEA) में वाकेय है। ये मशहूर शहराह रेशम पर तिजारत और इस्लामी तअलीम का बड़ा मरकज़ था, क़दीम ज़माने में बुखारा सल्तनत फ़ारसी का एक मुमताज़ शहर था और बाद में अब्बासी खिलाफत में अहम शहर बन गया।
* मिट्ठे साहब का बुखारा से ताल्लुक़ *
▪️मिट्ठे साहब (मिट्ठे महाबली सरकार रह.) और बुखारा सूफ़ी रिवायत और चिश्ती तरतीब के ज़रिए जुड़े हुए हैं। बुखारा तसव्वुफ के एक बड़े मरकज़ के तौर पर, चिश्ती हुक्म (order) का एक अहम मरकज़ था।
1. *रूहानी सिलसिला*
13 सदी में चिश्ती निज़ाम के बानी ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती रह. ने संजर, बुखारा से हिंदुस्तां का सफ़र किया और तसव्वुफ का पैग़ाम फैलाया।
मिट्ठे साहब, ख्वाजा अजमेरी रह. के 18 वें रूहानी खलीफा और चिश्ती सिलसिले के एक मुअज़्ज़िज़ रुक्न थे। जिन्होने बुखारा के एक मअरूफ आलिम इमाम अबू हनीफा के ज़रिए अपने रूहानी नस्ब का सुराग रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम तक पहुंचाया।
2. *चिश्ती तरतीब*
हिंदुस्तां के बहुत से सुफियों ने, बशमूल मिट्ठे साहब ने शहर के भरपूर रूहानी विरसे से तेहरीक हासिल की। बुखारा और मिट्ठे साहब का ताल्लुक़ तसव्वुफ के इब्तेदाई दौर से ले कर आज तक रूहानी इल्म, हिकमत और बरकात की तरसील की नुमाइंदगी करता है।
3. *सूफी तअलीमात*
मिट्ठे साहब की तअलीमात और फलसफा बुखारा की सूफ़ी रिवायात से गहरा मुतअस्सिर था। जिस में मुहब्बत, हमदर्दी और खुद की दरयाफ्त पर ज़ोर दिया गया था।
4. *तारीखी ताल्लुक़*
बुखारा, ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती रह. के ज़माने में तसव्वुफ का एक अहम मरकज़ था, 13 वीं और 14 सदी में तसव्वुफ को काफी फराेग मिला, जिसका असर आज भी देखा जा सकता है, हमारे सूफियाए कराम तसव्वुफ की रूह को ज़िंदा रखे हुए हैं।
5. *रूहानी रहनुमाई*
ख्याल किया जाता है के मिट्ठे साहब ने बुखारा के औलियाए कामिलीन से रूहानी रहनुमाई हासिल की। खुसूसन ख्वाजा बुज़ुर्ग जो अजमेर हिंदुस्तां में मदफून हैं। जहां 13 वीं सदी के आखिर और 14 वीं सदी शुरू होने से कब्ल करीब 20 साल ख्वाजा अजमेरी के दरबार में खिदमत और सक्काई की और खिदमत को कुबुलियत हासिल हुई, फैज़ियाब हुए और गागरोंन की चौकी अता हुई । उस वक्त हिंदुस्तान में अलाउद्दीन खिलजी (1296 से 1319) की हुकूमत रही।
▪️ये ताल्लुक़ मिट्ठे साहब, ख्वाजा साहब और बुखारा के दरमियान गहरे रूहानी रिश्ते को उजागर करता है, जो तसव्वुफ की आलमगीर ज़बान की नशो नुमा कर अक्कासी करता है जो जियोग्राफी हुदूद से मावरा (beyond/ घिरा हुआ) है।
शेख़ समी उद्दीन चिश्ती
दरगाह गद्दीनाशीन
गागरोंन शरीफ़, गागरोंन
झालावाड़ , राजस्थान
इंडिया