जय हो!
माता काली का अतिप्राचीन मंदिर. जो बिहार के जहानाबाद जिले में स्थित है. यहां जो मूर्तियां स्थापित हैं. माता काली सहित विष्णु, शिव, गणेश आदि भगवानों की वो गांव में ही पोखर की खुदाई के दौरान निकली थी. मूर्ति बनाने को शैली से देखें तो माता काली की मूर्तियां गुप्तकाल की प्रतीत होती है. इतिहास पर नजर डालें तो गुप्तकाल में मूर्ति पूजा अपने सुनहरे दौर पर थी. गुप्तकालीन राजाओं ने भारी मात्रा में मा
ता काली की मूर्तियां बनाने का आदेश जारी किया था.
अगर मंदिर की अवस्थिति पर और भीतर आएं तो चरुई गांव में माता का मंदिर विराजमान है. यहां बहुत सारे लोग अपनी मुरादें मांगने माता के दरबार में उपस्थित होते हैं. और मनचाहा, मनपसंद मांगे पूरी करके घर जाते हैं। यह मंदिर जहानाबाद जिले में एक शानदार धार्मिक स्थानों में अपना नाम बनाए हुए है.
यह मंदिर आस पास के तमाम गंववालों के लिए एकदम अपना जैसा है. वे सब मानते ही नहीं, उनके मन में ऐसी बातें आती ही नहीं कि ये मंदिर चरुई में है. लोगों का एक खास kisam का जुड़ाव है, मंदिर से जो अपनापन का बोध कराता है.
मंदिर प्रशासन आप सभी धमरानुरागियों का हृदय से स्वागत करता है. मौका मिले तो जरूर पधारिए यहां. दिलों दिमाग में बस जायेंगे माता काली. ��