माँ अष्टभुजा धाम कोल्हुआ, महराजगंज जौनपुर उ.प्र.

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"ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।"
25/03/2026

"ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।"

15/06/2022

सुना है मैंने, जिस दिन जीसस को सूली लगी, उस दिन उस गांव में एक आदमी की दाढ़ में दर्द था। और जिस रास्ते से लोग जीसस को ले जा रहे थे सूली चढ़ाने, उसी रास्ते पर उसका घर था। सारे गांव से वह परिचित था। लोग देखने जा रहे थे। सारे गांव में तहलका था कि जीसस को आज सूली लग रही है। जो भी गांव का आदमी वहा से निकलता—वह आदमी, आख में उसके आंसू थे, पीड़ा से कराह रहा था; क्योंकि उसकी दाढ़ में दर्द था।
तो लोग उससे पूछते कि अरे, क्या तुम भी जीसस के प्रेमी हो? वह कहता, भाड़ में जाए जीसस, मेरी दाढ़ में दर्द है। पूरा गांव वहां से निकला। और हर आदमी ने पूछा कि अरे, कभी हमने सोचा नहीं था कि तुम भी, जीसस से तुम्हारा कोई लगांव है! वह कहता, कैसा जीसस! कहां की बातें कर रहे हो! मेरी दाढ़ में दर्द है, रातभर से सो नहीं सका।
जीसस को सूली लग रही है, वह जरा भी मूल्य नहीं है। उसकी दाढ़ में दर्द है, वह मूल्यवान है!
वियतनाम में हजारों लोग मरते रहे हैं, वह सवाल नहीं है। आपके पैर में जरा—सा काटा लग जाए, वह मूल्यवान है। सारी जमीन पर कुछ होता रहे, आपकी जेब कट जाए सब गड़बड़ हो गया!
हम जीते हैं, एक स्वार्थ का केंद्र बनाकर। और जितना ही यह स्वार्थ का केंद्र मजबूत होता है, उतनी ज्यादा अशांति होती है। अपने संबंध में जो जितना ज्यादा सोचता है, उतना परेशान होगा। जो अपने संबंध में जितना कम सोचता है, उतनी परेशानी क्षीण हो जाती है। जो इस विराट जगत को चारों तरफ देखता है—इसकी पीड़ा को, इसके सुख को, इसके दुख को—उसे मौका भी नहीं रह जाता यह सोचने का कि मेरे पैर में काटा है। स्वार्थ की जो बुद्धि है, वह अशांति जन्माती है।
इसलिए कुछ, जैसे जीसस ने सेवा पर बहुत जोर दिया। वह इसी कारण दिया। इसलिए नहीं कि सेवा से दूसरे को लाभ होगा। वह तो होगा, पर वह गौण है। सेवा पर इसलिए जोर दिया कि उससे तू अपना खयाल भूल सकेगा। और अगर खुद का खयाल भूलता चला जाए, तो वह समर्पण बन जाता है।
तो कृष्ण कहते हैं, स्वार्थरहित जो व्यक्ति हो, वह परमात्मा के लिए खुला होता है। जो स्वार्थ से भरा हो, वह बंद होता है।
तो चौबीस घंटे में कुछ समय तो स्वार्थरहित होना सीखना चाहिए। फिर धीरे— धीरे उसका आनंद आने लगेगा। कभी स्वार्थरहित छोटा—मोटा कृत्य भी करके देखें। कभी किसी की तरफ यूं ही अकारण मुस्कुराकर देखें।
गीता दर्शन–ओशो

जय माँ अष्टभुजा देवी।
19/09/2021

जय माँ अष्टभुजा देवी।

जय माँ अष्ठभुजा💐💐💐
19/01/2021

जय माँ अष्ठभुजा💐💐💐

28/09/2020
02/10/2019
27/06/2019

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Jai Mata Di
09/10/2016

Jai Mata Di

21/04/2016

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