Shri Shri Shiv Hanuman Mandir

Shri Shri Shiv Hanuman Mandir This Temple is Estd in 2000.

प्रिय बंधुगण, भक्तजन एवं सनानतीगण, आप सभी से  #श्री_श्री_शिव_हनुमान_मंदिर के भव्य (छत ढलाई) निर्माण कार्य में आप सभी के ...
11/01/2026

प्रिय बंधुगण, भक्तजन एवं सनानतीगण,
आप सभी से #श्री_श्री_शिव_हनुमान_मंदिर के भव्य (छत ढलाई) निर्माण कार्य में आप सभी के सहयोग की आवश्यकता है। आपकी छोटी-सी आर्थिक मदद, सामग्री दान (ईंट, सीमेंट, गिट्टी, बालू, छड़ इत्यादि) या श्रमदान (कारसेवा के रूप में निर्माण कार्य में मदद कर) इस नेक कार्य को पूरा करने में सहायक होगी। आपके सहयोग से हम इस धार्मिक मंदिर के छत का निर्माण कर सकेंगे, जिससे सभी सनातनी एवं भक्तगण को लाभ मिलेगा। हम आपके उदार सहयोग के लिए सदैव आभारी रहेंगे।

निवेदक - राहुल सिंह (अधिवक्ता)
श्री श्री शिव हनुमान मंदिर समिति

हर हर महादेव शंभू
07/08/2022

हर हर महादेव शंभू

08/11/2021

तो फिर गेंहू तो सूखा ही लिए होंगे सबलोग ? आज से #नहाय_खाय के साथ ापर्व के सुभारंभ हो गईल 💯❤️

🌞जय छठी मईया 🙏🏻❤️

In Today Newspaper..
23/05/2020

In Today Newspaper..

 #आज  ावित्री_व्रतपौराणिक कथाओं में कई जगह इस बात का जिक्र किया गया है कि महिलाओं द्वारा अपनी पति की लंबी आयु के लिए रखे...
22/05/2020

#आज ावित्री_व्रत

पौराणिक कथाओं में कई जगह इस बात का जिक्र किया गया है कि महिलाओं द्वारा अपनी पति की लंबी आयु के लिए रखे गए व्रतों में बहुत शक्ति होती है। वट सावित्री का व्रत भी महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को रखा जाता है, जो इस बार दिन शुक्रवार 22 मई 2020 को है। इस व्रत में वट वृक्ष यानि कि बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। वट वृक्ष पर सुहागिनें जल चढ़ा कर कुमकुम, अक्षत लगाती हैं और पेड़ की शाखा में चारों तरफ से रोली बांधती हैं। पूरे विधि विधान से पूजा करने के बाद सती सावित्री की कथा सुनती हैं। कहा जाता है कि इस कथा को सुनने से सौभाग्यवती महिलाओं को अखंड सौभाग्य की की प्राप्ति होती है।

ानते_हैं_क्या_है_वट_सावित्री_व्रत-

कैसे पड़ा वट सावित्री नाम: पौराणिक मान्यताओं की मानें तो सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को जीवित किया था। इसलिए इस व्रत का नाम वट सावित्री पड़ा। वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ का महत्व अधिक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सनातन संस्कृति में ऐसा माना जाता है कि बरगद के पेड़ पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। इसके अलावा, सुहागिन महिलाएं ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी से अमावस्या तक तीन दिनों के लिए उपवास रखती हैं। कुछ महिलाएं केवल अमावस्या के दिन ही व्रत रखती हैं। इस व्रत में सावित्री-सत्यवान की पुण्य कथा का श्रवण किया जाता हैं।

#ये_है_पूजा_विधि: इस दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद सुहागिनें नए वस्त्र धारण करती हैं। वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं खूब सजती-संवरती हैं। सबसे पहले भगवान सूर्य को अर्घ्य दें, इसके बाद सभी पूजन सामग्रियों को किसी बांस से बनी टोकरी या पीतल के पात्र में इकट्ठा कर लें। अपने नजदीकी वट वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें और माता सावित्री को वस्त्र व सोलह श्रृंगार चढाएं। फल-फूल अर्पित करने के बाद वट वृक्ष को पंखा झेलें। रोली से पेड़ की परिक्रमा करें और फिर व्रत कथा को ध्यानपूर्वक सुनें। इसके बाद दिन भर व्रत रखें।

ावित्री_अमावस्या_मुहूर्त:-

अमावस्या तिथि की शुरुआत: 21 मई को रात 09 बजकर 35 मिनट पर
अमावस्या तिथि की समाप्ति: 22 मई को रात 11 बजकर 08 मिनट पर

इसके अनुसार आप दिन भर में किसी भी समय वट वृक्ष सहित माता सावित्री की पूजा कर सकते हैं। विद्वानों के अनुसार इस बार वट सावित्री व्रत पूजा के लिए आपको चौघड़िया तिथि की जरूरत नहीं पड़ेगी।

ंत्र_का_करें_जाप: माना जाता है कि सावित्री को अर्घ्य देने से पहले इस श्लोक का जाप फायदेमंद होता है-

अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान्‌ पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।।

वहीं, वट वृक्ष की पूजा करते समय इस श्लोक का जाप फलदायी माना गया है-

यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।।

04/03/2019
|| आमंत्रण ||आज दिनांक 04/03/2019 को   #महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर  #श्री_श्री_शिव_हनुमान_मंदिर_समिति,सिध्दो-कान्हु चौ...
04/03/2019

|| आमंत्रण ||

आज दिनांक 04/03/2019 को #महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर #श्री_श्री_शिव_हनुमान_मंदिर_समिति,सिध्दो-कान्हु चौक(बड़ा गोलचक्कर) स्थित मंदिर के प्रांगण में भण्डारा का आयोजन दोपहर 12:30 बजे किया जा रहा है, कृप्या सभी शिवभक्त मंदिर प्रांगण में पहुँच कर भगवान शिव का आशिर्वाद और प्रसाद प्राप्त करें । 🙏🙏

निवेदनकर्ता : #श्री_श्री_शिव_हनुमान_मंदिर_समिति
संस्थापक - उदय शंकर सिंह (अधिवक्ता)
सिध्दो-कान्हु चौक(बड़ा गोलचक्कर) नीतिबाग कालोनी, स्लैग रोड, भुईंयाडीह, जमशेदपुर ।

सभी शिवभक्तों को महाशिवरात्रि की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏
04/03/2019

सभी शिवभक्तों को महाशिवरात्रि की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏

10/07/2017

हिंदू पंचांग के बारह मासों में सावन भगवान भोलेनाथ को सर्वाधिक प्रिय है। इसीलिए यदि संभव हो तो शिव-भक्तों को सावन के सोमवार का व्रत अवश्य रखना चाहिए। प्रात:काल स्नान के बाद गाय के दूध, दही, घी, शहद अथवा स्वच्छ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें, बेलपत्र चढ़ाएं और चंदन लगाएं। आक के फूल, धतूरा, धूप-दीप आदि अर्पित करके किसी शिव स्रोत का पाठ एवं 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का जप करें। दिनभर उपवास रखें, सूर्यास्त के बाद प्रदोषकाल में पुन:शिव जी की अर्चना करने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें।

उज्जैन में सावन के प्रत्येक सोमवार को मृत्युलोक के अधिपति श्रीमहाकालेश्वर की सवारी निकलती है। वहां सावन की यह छटा उलर भारतीय पंचांगों में दिए गए श्रावण के कृष्णपक्ष से भाद्रपद के कृष्णपक्ष तक छाई रहती है। महीने के आखिरी सोमवार को श्रीमहाकाल की सवारी के दर्शनार्थ देश-विदेश से असंख्य श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

सर्प भगवान शंकर के आभूषण हैं। अत: नागपंचमी का पर्व भी इसी मास की शुक्लपक्ष पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन रुद्रावतार श्रीहनुमान के ध्वजारोहण और कुश्ती-दंगल की भी परंपरा है, जो इसे आध्यात्मिक स्वास्थ्य दिवस बना देती है।

शक्ति की आराधना

जिस सावन मास में शिव जी का सर्वत्र पूजन हो, उसमें उनकी शक्ति शिवा की उपेक्षा कैसे की जा सकती है? सावन के प्रत्येक मंगलवार को मंगलागौरी की विशेष पूजा होती है। देवी पार्वती के इस अति विशिष्ट रूप का श्रीविग्रह वाराणसी के पंचगंगा घाट पर विद्यमान है। मंगलागौरी का दर्शन-पूजन करने के लिए सावन के प्रत्येक मंगलवार को यहां बहुत बड़ी संख्या में स्त्रियां आती हैं। पुराणों के अनुसार मंगलागौरी की परिक्रमा करने से संपूर्ण पृथ्वी की प्रदक्षिणा का पुण्यफल मिलता है। इनकी उपासना से अविवाहित कन्याओं के मंगली-दोष का भी शमन होता है।

काशी के दुर्गाकुंड पर विराजमान भगवती दुर्गा का विशेष मेला भी सावन में ही लगता है।

पूर्वी उलरप्रदेश के गांवों में श्रावण मास के कृष्णपक्ष की तृतीया को कजली तीज मनाने की परंपरा है। इसी लोकोत्सव से लोक गायन की एक प्रसिद्ध शैली का जन्म हुआ, जो कजरी के नाम से विख्यात हो गई। राजस्थान सहित उलर भारत के अधिकांश क्षेत्रों में सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया हरियाली तीज के नाम से विख्यात है। इस अवसर पर नवविवाहिताएं मायके जाती हैं। इस दिन मेहंदी रचाना और हरी चूडि़यां पहनकर झूला झूलना अति शुभ माना जाता है। इस दिन विवाहिताओं को मायके से विश्ेाष उपहार भेजा जाता है, जिसे 'सिंघारा' कहा जाता है। इस दिन विवाहिताएं जगदंबा से अखंड सुहाग का आशीष मांगती हैं। ऐसी मान्यता है कि विरह की अग्नि में तपकर गौरी शिव जी से इसी दिन मिली थीं।

सावन की पहली सोमवारी को जलाभिषेक के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ।
10/07/2017

सावन की पहली सोमवारी को जलाभिषेक के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ।

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
30/08/2016

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

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