01/05/2026
*श्री राधारमण जी को प्रणाम*
वृंदावन की कुंज गलिन में, बसत मेरो राधारमण।
श्याम सलोना रूप मनोहर, नैनन के तारे धन्य धन्य धन्य ॥
गोपाल भट्ट के प्रेम पगे, शालिग्राम से प्रकट भए।
बिन छैनी, बिन हथौड़ा, स्वयं ही सूरत गढ़ गए ॥
मोर मुकुट माथे सोहे, कर में मुरली रस-धार।
पीत वसन कटि काछनी, छवि पर कोटि काम बलिहार ॥
सेवा में यमुना जल, तुलसी दल अर्पण।
राधा नाम की धुन सुन, नाचत मेरो राधारमण ॥
आज दिवस प्राकट्य को, वृंदावन हर्षाय।
भक्त करें जय-जयकार, कृपा दृष्टि बरसाय ॥
हे राधारमण प्यारे, इतनी अरज हमारी।
चरण शरण में राखो, मिटे जन्म की ख्वारी ॥
*श्री राधारमण लाल की जय!🙏