28/08/2026
रक्षा बंधन पर साहिब जी ने दिये प्रवचन
साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज आज राँजड़ी जम्मू में रक्षाबंधन पर अपने प्रवचनों की अमृत वर्षा से संगत को निहाल करते हुए कहा कि पहले लोगों की बहुत उमर होती थी। अब 102 साल सबसे बुजुर्ग होता है।
आप देखें कि मौसम अब बदल रहे हैं। दुनिया के 30 प्रतिशत ग्लेशियर पिघल रहे हैं। इंसान ने प्रकृति का दोहन बहुत गलत किया। पृथ्वी के अन्दर जो धातु, जो तत्व हैं, वो पृथ्वी के लिए जरूरी हैं। जब अधिक दोहन होगा तो प्राकृतिका आपदाएँ आयेंगी।
नेपाल में अभी कितनी बड़ी त्रासदी हुई। ग्लेशियर गल रहे हैं। नदियों का अस्तित्व वर्फ से है। इसलिए गर्मियों में लबालब भरती हैं और सिंचाऊँ मैदान बनाती हैं।
जब हम पृथ्वी के अन्दर के तत्व ज्यादा निकालेंगे तो अन्तर पड़ेगा। पृथ्वी हमारे स्थूल शरीर के लिए जरूरी है।
प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ करोगे तो मानव का अस्तित्व ही खत्म कर देगी।
इस तरह यह संसार नाशवान है। बड़ी जटिल दुनिया है। आत्मा जिस देश से आई है, वो अमर लोक है। वहाँ रोग नहीं हैं, शोक नहीं है, प्राकृतिक आपदाएँ नहीं हैं। कोई समस्याएँ नहीं हैं।
बेगम पुरा जो ट्रेन जो चलती है, वो कबीर साहिब के नाम से है। बेगम अमर लोक को कहते हैं। साहिब ने अमर लोक की बात कही, बेगम पुर की बात कही। इसलिए साहिब के नाम पर बेगम पुर ट्रेन है।
तो वहाँ चाँद, सूर्य आदि नहीं हैं। पानी नहीं है, हवा नहीं है। प्रकृति नहीं है। कोई समस्या नहीं है। वो अनोखा देश है। वो आत्मा का देश है। बेगम यानी यहाँ कोई दुख नहीं है। उस देश की सुधि कोई नहीं बताता है, जहाँ से आत्मा आई है।
कई शब्दों में साहिब ने इंगित किया। साहिब ने झूठ नहीं कहा कुछ भी। एक साजिश के कारण साहिब को साइड किया गया। साहिब जी ने कहा कि सन्यासी की कोई जाति नहीं होती है। मुझे भी लोग कभी चमार बोलते थे, कभी मुसमान बोलते थे, कभी कुछ। ताकि ऊँची जाति के लिए नहीं आएँ। पर लोगों का आना-जाना लगा रहा। भोले-भाले लोगों ने दिल में यह बात बिठा ली। पर मेरा जन्म तो मुसलिम परिवार में नहीं हुआ है। मेरे गुरु ने बोला था कि सन्यासी की कोई जाति नहीं होती है। वेद में लिखा है कि चारों जाति के लोग सन्यासी को प्रणाम करते हैं। इसलिए उसे अपनी जाति नहीं बोलना है। मेरी माँ ने मुझे जनेऊ पहनाया था। फौज में मुझे बोला कि यह दागा निकालो। मैंने कहा कि यह दागा नहीं है। निन्दकों से नहीं डरना है। साहिब ने तो कहा कि निन्दक तो हमारे नौकर का भी नौकर है। वो हमारे बड़े काम का है। बस धन्ने जाट वाली बात है कि निन्दकों ने हमारा बड़ा काम किया है।
साहिब जी ने रक्षाबंधन की सब देशवासियों को बधाई दी।