30/06/2026
परमेश्वर है तो इतना दुख क्यों?
यह प्रश्न केवल आज का नहीं है। बाइबल में भी बहुत से लोगों ने यह प्रश्न पूछा था। अय्यूब, दाऊद, यिर्मयाह और यहाँ तक कि कई भविष्यद्वक्ताओं ने भी दुख और अन्याय को देखकर परमेश्वर से प्रश्न किए।
1. दुख इसलिए है क्योंकि संसार पाप के प्रभाव में है।
जब परमेश्वर ने संसार बनाया, तब सब कुछ बहुत अच्छा था। लेकिन मनुष्य के पाप के कारण संसार में मृत्यु, बीमारी, अन्याय, दर्द और टूटन प्रवेश कर गई (रोमियों 5:12)। इसलिए हर दुख सीधे परमेश्वर की ओर से नहीं आता, बल्कि एक गिरे हुए संसार की वास्तविकता है।
2. परमेश्वर दुख को व्यर्थ नहीं जाने देता।
जो बातें हमें तोड़ने आती हैं, परमेश्वर कई बार उन्हीं बातों का उपयोग हमें मजबूत बनाने के लिए करता है। दुख हमारे विश्वास को परखता है, हमें नम्र बनाता है और परमेश्वर पर निर्भर रहना सिखाता है। जिस प्रकार सोना आग में तपकर शुद्ध होता है, उसी प्रकार विश्वासी परीक्षाओं में निखरता है।
3. परमेश्वर हमारे दुख को समझता है।
यीशु मसीह ने स्वयं अस्वीकृति, विश्वासघात, पीड़ा और क्रूस का दुख सहा। इसलिए जब हम रोते हैं, तो हमारे पास ऐसा उद्धारकर्ता है जो हमारे दर्द को समझता है और हमारे साथ चलता है (यशायाह 53:4)।
4. कई बार दुख हमें परमेश्वर के और निकट ले आता है।
जब सब कुछ अच्छा चलता है, तब मनुष्य अक्सर परमेश्वर को भूल जाता है। लेकिन कठिन समय में वह परमेश्वर को खोजता है। इसलिए परमेश्वर कभी-कभी हमारी परिस्थितियों के बीच अपने प्रेम, सामर्थ्य और उपस्थिति को प्रकट करता है।
5. दुख अंतिम कहानी नहीं है।
बाइबल का संदेश केवल दुख का कारण नहीं बताता, बल्कि आशा भी देता है। एक दिन परमेश्वर हर आँसू पोंछ देगा, और न मृत्यु रहेगी, न शोक, न पीड़ा (प्रकाशितवाक्य 21:4)। इसलिए विश्वासी का वर्तमान दुख उसके भविष्य की महिमा से छोटा है।
याद रखें:
"परमेश्वर हमेशा हमारे ‘क्यों’ का उत्तर नहीं देता, लेकिन वह अपने साथ होने की प्रतिज्ञा अवश्य देता है।"