16/01/2026
⚖️ धर्म प्रचार अपराध नहीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो टूक — जबरन या धोखा न हो तो बाइबल बाँटना भी गुनाह नहीं
भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बेहद अहम और साफ़ फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाइबल बाँटना या ईसाई धर्म का प्रचार करना, उत्तर प्रदेश के 2021 धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत अपराध नहीं है, जब तक कि उसमें जबरदस्ती, धोखा या दबाव का कोई सबूत न हो।
कोर्ट ने इस मामले में यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि बिना एक भी पीड़ित की पहचान किए केस दर्ज कर दिया गया।
न तो किसी ने शिकायत की,
न ही किसी ने कहा कि उसे जबरन या धोखे से धर्म बदलने के लिए मजबूर किया गया।
हाईकोर्ट की टिप्पणी बिल्कुल साफ़ थी —
> “सिर्फ बाइबल बाँटना और ईसाई सिद्धांतों का प्रचार करना कोई अपराध नहीं है।”
यह फैसला याद दिलाता है कि
👉 शांतिपूर्ण धार्मिक अभिव्यक्ति संविधान से संरक्षित है
👉 कानून का दुरुपयोग आस्था के खिलाफ हथियार नहीं बन सकता
👉 कार्रवाई सबूत पर होनी चाहिए, शक पर नहीं
यह निर्णय न सिर्फ़ कानून की जीत है, बल्कि लोकतंत्र और व्यक्तिगत आस्था की आज़ादी की भी।
🕊️ प्रचार अपराध नहीं है। विश्वास की स्वतंत्रता लोकतंत्र की नींव है।
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