25/05/2026
डेरा ब्यास में बाबा जी ने कल रविवार को लगभग 3 महीने बाद सत्संग फरमाया। यह सत्संग आत्मा को भीतर तक झकझोर देने वाला था। बाबा जी ने तुलसी साहिब जी की वाणी पर बहुत गहरा प्रकाश डाला —“दिल का हुजरा साफ कर, जाना के आने के लिए, ध्यान गैरों का उठा, उसको बिठाने के लिए…”
बाबा जी ने समझाया कि यदि मन दुनियावी मैल, अहंकार, मोह और इच्छाओं से भरा हो, तो मालिक उसमें कैसे बसेगा?
जिस तरह भोजन से पहले बर्तन साफ किए जाते हैं, उसी तरह आत्मा के भीतर जमी जन्मों-जन्मों की गंदगी को भी भजन-सिमरन से साफ करना जरूरी है।
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रिश्तों का सबसे बड़ा सच
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बाबा जी ने डेरा की एक सच्ची घटना सुनाई जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
एक सेवादार अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करता था। पत्नी के देह छोड़ने के बाद वह बार-बार पूछता था —
“क्या मेरी पत्नी ने मुझे याद किया?”
लेकिन जवाब मिला —
“वो पूछती है… दीवान साहिब कौन हैं?”
बाबा जी ने समझाया कि शरीर के रिश्ते यहीं तक सीमित हैं। आगे सिर्फ नाम और मालिक का रिश्ता साथ जाता है।
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मन को आईना बनाओ
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बाबा जी ने कहा कि हम सत्संग में शरीर से तो बैठ जाते हैं, लेकिन मन कभी कारोबार में, कभी परिवार में और कभी दुनियावी चिंताओं में भटकता रहता है।
यदि मन मालिक की ओर नहीं मुड़ेगा, तो केवल माथा टेकने से कुछ हासिल नहीं होगा।
“गली जोग न होई…”
यह करणी और अमल का रास्ता है।
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संसार का मोह — मीठा ठग
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बाबा जी ने कहा कि दुनिया के रिश्ते मीठे ठग हैं।
जब तक स्वार्थ होता है, लोग साथ रहते हैं… फिर नए रिश्ते ढूंढ लेते हैं।
धन-दौलत, कपड़े, बड़े घर और दुनियावी शोहरत — कुछ भी साथ नहीं जाता।
अंत में सिर्फ कर्म और नाम ही साथ जाते हैं।
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असली मंदिर कहाँ है?
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बाबा जी ने बहुत सुंदर शब्दों में कहा —
“मालिक का असली घर हमारे अंदर है।”
हम बाहर मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे ढूंढते हैं, जबकि सच्चा दरबार हमारे दिल के भीतर है।
“घट-घट में हरि जू बसै…”
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संत क्यों आते हैं?
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बाबा जी ने कहा कि संत अपनी पूजा करवाने नहीं आते, बल्कि हमें मालिक तक पहुँचाने आते हैं।
लेकिन हम उन्हें केवल स्टेज पर बैठाकर माथा टेकते रहते हैं, जबकि असली भक्ति उनके बताए मार्ग पर चलना है।
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आज का सबसे बड़ा संदेश
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• रोज भजन-सिमरन करो
• मन को धीरे-धीरे बदलो
• मालिक से दुनियावी चीजें मत मांगो
• सिर्फ इतनी दया मांगो कि भाणे में रह सकें
• धर्म को नफरत नहीं, प्रेम का माध्यम बनाओ
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आखिरी विनती
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आज का सत्संग बहुत गहरा और आत्मा को जगाने वाला था।
हर शब्द भीतर झांकने के लिए प्रेरित कर रहा था।
🙏🏻राधास्वामी जी 🙏